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CAA के ख‍िलाफ प्रस्‍ताव पर आया EU का बयान, ओम ब‍िरला ने ल‍िखा था कड़ा खत

ईयू का यह बयान ओम बिरला के उस खत के बाद आया है जिसमें उन्होंने यूरोपीय संसद में प्रस्ताव पेश किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ईयू विधायी निकाय के प्रमुख से सोमवार को कहा कि किसी विधायिका द्वारा किसी अन्य विधायिका को लेकर फैसला सुनाना अनुचित है और इस परिपाटी का निहित स्वार्थ वाले लोग दुरुपयोग कर सकते हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्ताव पेश किए जाने पर कड़ी आपत्ति के बाद यूरोपियन यूनियन ने बयान जारी किया है। ईयू ने सोमवार (27 जनवरी, 2020) को जारी बयान में कहा, ‘यूरोपीय संसद और उसके सदस्यों द्वारा व्यक्त की गई राय ‘यूरोपीय संघ की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती है।’ यूरोपीय संघ (ईयू) के संस्थापक सदस्य देशों में शामिल फ्रांस का भी मानना है कि नया नागरिकता कानून (सीएए) भारत का एक आतंरिक राजनीतिक विषय है। फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने सोमवार को यह कहा।

ईयू का यह बयान ओम बिरला के उस खत के बाद आया है जिसमें उन्होंने यूरोपीय संसद में प्रस्ताव पेश किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए ईयू विधायी निकाय के प्रमुख से सोमवार को कहा कि किसी विधायिका द्वारा किसी अन्य विधायिका को लेकर फैसला सुनाना अनुचित है और इस परिपाटी का निहित स्वार्थ वाले लोग दुरुपयोग कर सकते हैं। सीएए के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्तावित चर्चा और मतदान की पृष्ठभूमि में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।

उल्लेखनीय है कि 751 सदस्यीय यूरोपीय संसद में करीब 600 सांसदों ने सीएए के खिलाफ छह प्रस्ताव पेश किए, जिनमें कहा गया है कि इस कानून का क्रियान्वयन भारतीय नागरिकता प्रणाली में खतरनाक बदलाव को प्रर्दिशत करता है। ओम बिरला ने इसपर ईयू यूरोपीय संसद के अध्यक्ष डेविड मारिया सासोली से पत्र के जरिए कहा था, ‘मैं यह बात समझता हूं कि भारतीय नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 को लेकर यूरोपीय संसद में ‘ज्वाइंट मोशन फॉर रेजोल्यूशन’ पेश किया गया है। इस कानून में हमारे निकट पड़ोसी देशों में धार्मिक अत्याचार का शिकार हुए लोगों को आसानी से नागरिकता देने का प्रावधान है।’’

बिरला ने कहा कि इसका लक्ष्य किसी से नागरिकता छीनना नहीं है और इसे भारतीय संसद के दोनों सदनों में आवश्यक विचार-विमर्श के बाद पारित किया गया है। इससे पहले नायडू ने कहा कि वह ऐसे मामलों में विदेशी निकायों के हस्तक्षेप की प्रवृत्ति से चिंतित हैं जो पूरी तरह भारतीय संसद और सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास पूरी तरह अवांछनीय हैं और उम्मीद है कि भविष्य में इस तरह के बयानों से बचा जाएगा। (भाषा इनपुट)

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