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अब यूरोप में कॉपीराइट पर घमासान

शरणार्थियों के मुद्दे पर आपस में झगड़ रहे यूरोप में कॉपीराइट कानून को लेकर नया मोर्चा खुल गया है। इंटरनेट की आजादी के लिए खतरा करार दिए जा रहे एक प्रस्तावित कानून को फिलहाल यूरोपीय संसद ने नामंजूर कर दिया है, लेकिन इसके समर्थक और विरोधी लगातार मैदान में डटे हुए हैं।

यूरोपीय संघ में सुधारों के कड़े समर्थक फ्रांस के कई यूरोपीय सांसद मतदान के बाद खफा दिखे।

शरणार्थियों के मुद्दे पर आपस में झगड़ रहे यूरोप में कॉपीराइट कानून को लेकर नया मोर्चा खुल गया है। इंटरनेट की आजादी के लिए खतरा करार दिए जा रहे एक प्रस्तावित कानून को फिलहाल यूरोपीय संसद ने नामंजूर कर दिया है, लेकिन इसके समर्थक और विरोधी लगातार मैदान में डटे हुए हैं। विरोधियों का कहना है कि अगर ये कानून पास हो जाता तो इंटरनेट की दुनिया बेरंग हो जाती। इंटरनेट पर वायरल होने वाले मीम बंद हो जाते। ना तो किसी फिल्म से कोई स्टिल लिया जा सकता था, ना किसी का कोई कहा गया कोट और ना ही गानों के रिमिक्स। यानी सोशल मीडिया पर जो मीम धूम मचाते हैं, उन पर तलवार लटकी थी। यह बिल कहता है कि गूगल, फेसबुक और दूसरी दिग्गज कंपनियों को प्रकाशकों, लेखकों, प्रसारकों और कलाकारों के साथ अपनी कमाई साझा करनी होगी। बिल के समर्थकों की दलील है कि इंटरनेट पर सामग्री को चोरी रोकनी होगी और मूल रूप से कंटेट को रचने वालों को उनका वाजिब हक दिया जाए। यूरोप के बड़े अखबार और संगीतकार इस बिल का समर्थन कर रहे हैं।

इंटरनेट का लगातार विस्तार हो रहा है। नए नए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं। आज सोशल मीडिया ना सिर्फ दोस्तों और परिचितों से जुड़ने का अहम जरिया है, बल्कि लोग उस पर अपने सुख दुख भी साझा कर रहे हैं। वही मनोरजंन का भी ठिकाना है। यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और व्हट्सएप के बिना आज कल गुजारा नहीं है। लेकिन इसके साथ कॉपीराइट से जुड़ी चुनौतियां भी पैदा हुई हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों की बढ़ती हुई तादाद को देखते हुए यूरोपीय संघ अपने कॉपीराइट कानून में बदलाव करना चाहता है। इसी के तहत यूरोपीय संसद की एक समिति ने एक नए कॉपीराइट बिल को मंजूरी दी, जिसके बाद उसे मतदान के लिए यूरोपीय संसद में पेश किया गया। इस बिल का आर्टिकल 13 खास तौर से विवाद की वजह बना। इसमें नए कॉपीराइट फिल्टर लगाने की बात कही गई है। इसके मुताबिक बड़ी बेवसाइटों का यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म पर अगर कोई यूजर्स कंटेट अपलोड कर रहा तो उससे कॉपीराइट का कोई उल्लंघन न हो।

यूट्यूब, गूगल और फेसबुक जैसी दिग्गज कंपनियों ने इस पर खास तौर से विरोध दर्ज कराया कि यूजर के सारे कंटेट को परखने की जिम्मेदारी उनके ऊपर डाल दी गई है, जो असंभव है। उदाहरण के लिए यूट्यूब पर हर मिनट 400 घंटे के वीडियो अपलोड होते हैं। इसका मतलब है कि घंटे भर में 24 हजार घंटे के वीडियो और अगर एक दिन यानी 24 घंटे का हिसाब लगाया जाए तो यह आंकड़ा 5।7 लाख घंटों की वीडियो को छूता है। इतने विशाल कंटेट को संभालना इंसानी क्षमता के बाहर दिखता है। इतना ही नहीं, अगर किसी वीडियो में किसी व्यक्ति ऐसी टीशर्ट पहनी है जिस पर किसी म्यूजिक रिकॉर्ड का कवर छपा है तो एल्गोरिद्म उसे भी कॉपीराइट का उल्लंघन मानते हुए वीडियो को ब्लॉक कर देगा। दूसरी समस्या लाइवस्ट्रीम की है। उस वक्त कैसे इस बात की गारंटी दी जा सकती है कि लाइव प्रसारण में किसी भी तरह कॉपीराइट का उल्लंघन ना हो।

कुछ आलोचकों का यह भी कहना है कि ये नए फिल्टर बहुत ही जटिल होंगे, जिसके चलते इनसे बड़ी अमेरिकी कंपनियों की ही जेब भरेगी। यूजर जेनरेटेड कंटेट पर चलने वाले छोटे प्लेटफॉर्मों को गूगल जैसी बड़ी कंपनियों से इन्हें खरीदना होगा, क्योंकि वही इन्हें तैयार कर पाएंगी। छोटी कंपनियां और स्टार्टअप तो इन्हें अफॉर्ड नहीं कर पाएंगे। बिल का आर्टिकल 11 प्रेस पब्लिकेशन सामग्री के संरक्षण पर जोर देता है। इसका मतलब है कि गूगल और फेसबुक जैसी वेबसाइटें अखबार, पत्रिकाओं और अन्य प्रेस माध्यमों में प्रकाशित सामग्री को बिना भुगतान किए नहीं ले सकतीं।

बड़े पैमाने पर इस बिल का विरोध हुआ। इसके खिलाफ मुहिम को लगभग आठ लाख लोगों ने अपने हस्ताक्षरों के जरिए समर्थन दिया। ऑनलाइन एनसाइक्लोपीडिया विकीपीडिया ने इसे इंटरनेट की आजादी के लिए खतरा बताया और इसके विरोध में अपने इतालवी संस्करण को दिन के लिए बंद रखा। विकीपीडिया के सहसंस्थापक जिमी वेल्स बिल के खिलाफ सोशल मीडिया पर चली मुहिम का समर्थन किया और बिल के आर्टिकल 11 और 13 को उन्होंने ‘डरावना सपना’ करार दिया। वैसे यूरोपीय संसद ने साफ किया था कि विकीपीडिया एनसाइक्लोपीडिया होने के नाते इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। लेकिन कंपनी का कहना है कि इंटरनेट की आजादी और इस कानून से प्रभावित होने वाली वेबसाइटों के साथ एकजुटता जताते हुए वह इस बिल का विरोध करती है। लगता है इसी विरोध का असर है कि बिल को यूरोपीय संसद में 278 के मुकाबले 318 मतों से खारिज कर दिया गया। 31 सांसद बिल पर मतदान से दूर रहे।

यूरोपीय संघ में सुधारों के कड़े समर्थक फ्रांस के कई यूरोपीय सांसद मतदान के बाद खफा दिखे। एक सासंद पेरवॉश बीएरस कहा कि अमेरिका की वे कंपनियां जीत गईं जो कलाकारों का कंटेट चुराती हैं और कोई टैक्स भी नहीं देतीं। वहीं कुछ सांसदों ने इसे अमेरिकी कंपनियों की लॉबिंग और दबाव का नजीता बताया। अब सितंबर में यह बिल बदलावों के साथ फिर मतदान के लिए यूरोपीय संसद में रखा जाएगा। कुल मिलाकर, दलीलें दोनों पक्षों की अपनी जगह वाजिब लगती हैं। जहां इंटरनेट की आजादी और सूचना के प्रवाह पर कोई बंदिश नहीं होनी चाहिए, वहीं कॉपीराइट का उल्लंघन भी रोकना होगा। बीच का रास्ता ही निकालना होगा। दोनों पक्षों की चिंताओं पर ध्यान देना होगा। दुनिया में बढ़ते इंटरनेट प्रसार को देखते हुए कॉपीराइट से जुड़े सवालों से बचा नहीं जा सकता। इनके जबाव आज नहीं कल तलाशने ही होंगे। तो फिर आज ही क्यों नहीं?

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