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यूरोपिएन कोर्ट का फैसला- कंपनियां लगा सकती है मुस्लिम महिला कर्मचारियों के हिजाब पहनने पर रोक

बेल्जियम और फ्रांस की मुस्लिम महिला कर्मचारियों ने कंपनियों की ओर से हिजाब पहनने पर रोक लगाने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

Author March 14, 2017 23:40 pm
(चित्र का इस्तेमाल सिर्फ खबर के प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है।)

यूरोप में हिजाब पहनने को लेकर चल रहे विवाद में मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। यूरोप के दो अलग-अलग हिस्सों बेल्जियम और फ्रांस की मुस्लिम महिला कर्मचारियों ने कंपनियों की ओर से हिजाब पहनने पर रोक लगाने के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर फैसला सुनाते हुए यूरोपीय अदालत ने कंपनियों को मुस्लिम महिला कर्मचारियों के हिजाब पहनने पर रोक लगाने की पूरी छूट दे दी। दुनिया भर में मुस्लिम महिलाओं के हिजाब पहनने के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर छिड़ी बहस के बीच यूरोपीय अदालत का यह फैसला सामने आया है।  यूरोपीय संघ की शीर्ष अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि संघ की कंपनियां अपने कर्मचारियों को इस्लामिक हिजाब जैसे धार्मिक एवं राजनीतिक प्रतीकों को पहनने से रोक सकती हैं। यूरोपीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (ईसीजे) ने कहा कि यदि कोई कंपनी अपने यहां ‘किसी राजनीतिक, दार्शनिक या धार्मिक प्रतीक’ के पहनने पर रोक लगाती है तो यह कोई ‘प्रत्यक्ष भेदभाव’ नहीं माना जाएगा।

बेल्जियम की याचिकाकर्ता मुस्लिम महिला समीरा अचबिता जी 4 एस सेक्युरिटी सर्विसेज में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम कर रही थी। कंपनी में अलिखित नियम था कि कर्मचारियों को कार्यस्थल पर कोई राजनीतिक, धार्मिक या दार्शनिक प्रतीक नहीं पहनना चाहिए। जिसके बाद कंपनी ने समीरा के हिजाब पहनने पर आपत्ति की तो समीरा ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी कि हिजाब पहनने पर प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। वहीं, इसी तरह के दूसरे केस में फ्रांस की कंपनी ने ग्राहकों की शिकायत पर महिला कर्मचारी के हिजाब पहनने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी नहीं मानने पर मुस्लिम महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद इस पूरे विवाद ने एक नया रुख अपना लिया है।

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