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तालिबानी हमले के 5 साल बाद पाकिस्तान पहुंचीं नोबेल विजेता मलाला यूसुफजई, संबोधन में हुईं भावुक

9 अक्टूबर, 2012 को स्वात घाटी में तालिबान के बंदूकधारियों ने मलाला की स्कूल बस रोकी और उसमें घुस कर सवाल किया कि मलाला कौन है। जबाव मिलने पर उन्होंने मालाला को गोली मार दी जिससे वह बुरी तरह घायल हो गईं।

Author March 30, 2018 3:12 PM
नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ। (फोटो सोर्स रॉयटर्स)

तालिबान के हमले में घायल होने के बाद मलाला यूसुफजई पहली बार गुरुवार (29 मार्च, 2018) को पाकिस्तान पहुंचीं। वतन वापसी पर मलाला भावुक हो गईं और कहा कि वह पिछले पांच वर्षों से रोजाना घर लौटने के सपने देख रही थीं। सत्तारूढ़ पीएमएल-एन ने ट्वीट किया कि पाकिस्तान पहुंचने के कुछ ही घंटों के भीतर मलाला ने प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी और कुछ अन्य अधिकारियों से प्रधानमंत्री कार्यालय में मुलाकात की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने ट्वीट किया, ‘पाकिस्तान गुल मकाई का उनके घर में स्वागत करता है। हमें आप पर गर्व है।# मलालाघरवापसलौटी।’ वतन लौटने के बाद 20 वर्षीय मलाला ने कहा, “मैं पिछले पांच वर्षों से पाकिस्तान लौटने के सपने देख रही थी।” उन्होंने कहा, “जब कभी मैं विमान में होती थी या लंदन की सड़कों पर कार में होती थी, मैं यह सपने देखती थी कि मैं इस्लामाबाद और कराची में हूं, लेकिन यह सच नहीं होता था। लेकिन आखिरकार आज मैं यहां हूं और बहुत खुश हूं।” उन्होंने कहा कि उनकी यह प्रबल इच्छा है कि वह पाकिस्तान में आजाद घूम सकें।

मलाला ने कहा कि वह बच्चों की शिक्षा को लेकर काम कर रही हैं और पाकिस्तान में महिलाओं का सशक्तीकरण करना चाहती हैं। गौरतलब है कि तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा और उनके अधिकारों की वकालत करने के लिए 2012 में पाकिस्तान की स्वात घाटी में मलाला के सिर में गोली मार दी थी। इससे पहले गुरुवार को कड़ी सुरक्षा के बीच 20 वर्षीय मलाला अपने माता- पिता के साथ इस्लामाबाद के बेनजीर भुट्टो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से बाहर निकलीं। मलाला सलवार-कमीज और दुपट्टा पहने हुए थी। वह बेहद खुश नजर आ रही थीं। सुरक्षा कारणों से मलाला की पाकिस्तान यात्रा और उनके चार दिन के सभी कार्यक्रमों को गोपनीय रखा गया था। अब्बासी ने कहा कि वह खुश हैं कि देश की बेटी अपने वतन वापस आ गई।

उन्होंने कहा, “यह आपका घर है। अब आप कोई आम नागरिक नहीं हैं। आपकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।” मलाला फंड के सीईओ भी उनके साथ थे। संभावना है कि पाकिस्तान में भी ‘मीट द मलाला’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। गौरतलब है कि 9 अक्टूबर, 2012 को स्वात घाटी में तालिबान के बंदूकधारियों ने मलाला की स्कूल बस रोकी और उसमें घुस कर सवाल किया कि मलाला कौन है। जवाब मिलने पर उन्होंने उसे गोली मार दी, जिससे मलाला बुरी तरह घायल हो गई थीं। इस घटना ने लड़कियों की शिक्षा की पुरजोर वकालत करने वाली मलाला को दुनिया भर में मानवाधिकारों का प्रतीक बना दिया।

घटना के बाद मलाला ब्रिटेन चली गई जहां उनका इलाज बर्मिंघम में हुआ और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा भी वहीं पूरी की। मलाला 2014 में सबसे कम उम्र में नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली व्यक्ति बनीं। वह फिलहाल ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी कर रही हैं।

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