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मिस्र बम धमाके में मृतकों की संख्या बढ़कर हुई 235, राष्ट्रपति ने की राष्ट्रीय शोक की घोषणा

सूत्रो ने बताया कि विस्फोट के बाद बंदूकधारियों ने श्रद्धालुओं और वहां से भाग रहे लोगों पर गोलियां भी चलाईं।

Author काहिरा | Updated: November 25, 2017 10:29 AM
Egypt Bomb Blast, 75 Injured, Mosque, Bomb Blast Near a Mosque, Bomb Blast in Egypt, 75 Injured in A Bomb Blast, 75 Injured in egypt, Egypt Bomb Blast, International newsमिस्र के उत्तरी सिनाई में जनवरी, 2011 से ही कई हिंसक हमले हुए हैं। (Source PTI)

मिस्र की वायुसेना ने उत्तरी सिनाई प्रांत में मस्जिद पर हुए हमले के कुछ ही घंटों के भीतर कई आतंकवादियों को मार गिराया और उनके वाहन नष्ट कर दिये। गौरतलब है कि अशांत उत्तरी सिनाई में आतंकवादियों ने कल जुमे की नमाज के दौरान एक मस्जिद पर बम हमला किया जिससे कम से कम 235 नमाजियों की मौत हो गई और 109 अन्य घायल हो गए। सेना के प्रवक्ता तामेर एल-रफाई ने एक बयान में कहा कि वायुसेना ने उत्तरी सिनाई के आसपास के क्षेत्रों में आतंकवादियों के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है जिसमें आतंकवादी मारे गये हैं और जानलेवा हमले में प्रयुक्त वाहन नष्ट कर दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के हथियार डिपो को भी निशाना बनाया गया है। आतंकवादियों ने कल जुमे की नमाज के दौरान अल-अरिश शहर में स्थित अल-रौदा मस्जिद पर बम से हमला करने के बाद गोलीबारी की जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग मारे गये।

हमले के तुरंत बाद राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सीसी ने अधिकारियों के साथ आपात बैठक बुलाकर सुरक्षा हालात का जायजा लिया था। बाद में जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ बल प्रयोग की बात कही थी। मिस्र सरकार ने हमले के बाद तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। सूत्रों ने बताया कि अलआरिश शहर के अल रौदा मस्जिद के समीप यह बम रखा गया था जो नमाज के दौरान फट गया। समाचार एजेंसी एमईएनए के अनुसार, चार वाहनों में सवार बंदूकधारियों ने मौके से भागने से कोशिश कर रहे लोगों पर गोलियां भी चलाईं। ‘अहराम आॅनलाइन’ के अनुसार, कम से कम 235 नमाजियों की मौत हो गई और 109 अन्य घायल हो गए।

विस्फोट में मस्जिद को भी काफी नुकसान पहुंचा है। मिस्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता खालिद मुजाहिद ने इस घटना को ‘आतंकी हमला’ करार दिया। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा लगता है कि जिन लोगों को निशाना बनाया गया है वे सुरक्षा बलों के समर्थक हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मस्जिद में सूफी विचार को मानने वाले लोग इस मस्जिद में आते थे। घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए करीब 50 एंबुलेंस को मौके पर भेजा गया। अब तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले पर शोक जताने के लिए राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल-सीसी से फोन पर बात की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ‘‘बर्बर आतंकवादी’’ समूहों को बर्दाश्त नहीं करेगा। दोनों नेताओं की फोन पर हुई बातचीत के बाद व्हाइट हाउस ने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय बर्बर आतंकवादी समूहों को बर्दाश्त नहीं कर सकता है और उसे आतंकवाद और चरमपंथ को उसके सभी स्वरूपों में हराने के अपने प्रयास तेज करने चाहिए।’’ बातचीत के दौरान ट्रंप ने मिस्र हमले में मारे गये लोगों के प्रति शोक प्रकट किया।

व्हाइट हाउस के अनुसार, ‘‘ट्रंप ने हमले की निंदा की और दुहराया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका हमेशा मिस्र के साथ खड़ा रहेगा।’’ कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुदु ने एक बयान में कहा कि वह आतंकवादी हमले से ‘‘सकते और सदमे में हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कनाडा के सभी लोगों, सोफी और अपनी ओर से मैं आज के हमला पीड़ितों के मित्रों और परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। हम सभी घायलों के जल्दी और पूर्ण रूप से स्वस्थ होने की कामना करते हैं।’’ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् ने भी इस ‘‘बर्बर और कायराना आतंकवादी हमले’’ की निंदा करते हुए अपने बयान में कहा है कि ऐसा करने वालों को और इससे किसी भी रूप में जुड़े लोगों को न्याय की जद में लाया जाना चाहिए।

मिस्र के उत्तरी सिनाई में जनवरी, 2011 की क्रांति के बाद से ही कई हिंसक हमले हुए हैं। जनवरी, 2011 में हुई क्रांति से राष्ट्रपति हुस्री मुबारक की सत्ता चली गई थी। साल 2013 में मोहम्मद मुर्सी को राष्ट्रपति पद से अपदस्थ किए जाने के बाद उत्तरी सिनाई में हमलावरों ने पुलिस और सेना को निशाना बनाया है। इसके बाद से 700 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।

सेना ने इलाके में सैन्य अभियान शुरू कर रखा है, संदिग्धों को गिरफ्तार किया और आतंकवादियों के मकानों को ध्वस्त कर दिया। मिस्र में इस साल कई आतंकी हमले हुए हैं। बीते 26 मई को मिस्र के मध्य क्षेत्र में ईसाई समुदाय के लोगों को ले जा रही बस पर बंदूकधारियों ने हमला किया गया था जिसमें कम से कम 28 लोग मारे गए थे और 25 अन्य घायल हो गए। अलेक्जेंड्रिया और टांटा में गिरजाघरों को निशाना बनाकर बीते नौ अप्रैल को दो आत्मघाती हमले हुए थे जिनमें 46 लोग मारे गए थे।

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