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जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान को ‘ज़ोरदार और स्पष्ट’ संदेश मिलना चाहिए: भारत

भारत ने पाकिस्तान को एक ऐसा ‘असफल राष्ट्र’ बताया है जो खुद तो अपने ही लोगों पर अत्याचार करता है।

Author संयुक्त राष्ट्र | September 27, 2016 3:20 PM
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करतीं भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। (REUTERS/Brendan McDermid/26 Sep, 2016)

भारत ने मंगलवार (27 सितंबर) को पाकिस्तान को एक ऐसा ‘असफल राष्ट्र’ बताया है जो खुद तो अपने ही लोगों पर अत्याचार करता है जबकि दूसरों को सहिष्णुता, लोकतंत्र और मानवाधिकार के उपदेश देता है। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान को ‘जोरदार और स्पष्ट’ संदेश मिलना चाहिए कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान के प्रतिक्रिया के अधिकार (आरओआर) के जवाब में भारत ने कहा है कि पाकिस्तान को इस बात का स्पष्टीकरण देना चाहिए कि आतंकवाद की रोकथाम के लिए अरबों डॉलर की मदद मिलने के बावजूद उसकी धरती पर आतंकी ठिकाने कैसे फल-फूल रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के सोमवार (26 सितंबर) को संरा महासभा में संबोधन पर अपने प्रतिक्रिया के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि पाकिस्तान स्वराज द्वारा लगाए गए ‘सभी निराधार आरोपों को खारिज करता है।’ साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा था कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा कभी भी नहीं था और कभी भी नहीं होगा। मलीहा ने कश्मीर को ‘विवादास्पद इलाका बताया जिसकी अंतिम स्थिति संरा सुरक्षा परिषद के विभिन्न प्रस्तावों के मुताबिक अभी तक तय नहीं की गई है।’

लोधी की टिप्पणियों पर भारत के प्रतिक्रिया के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संरा में भारतीय मिशन में प्रथम सचिव ईनम गंभीर ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि हमारी विदेश मंत्री के आज के संबोधन को पाकिस्तानी राजदूत ने गौर से और साफ-साफ नहीं सुना है।’ संरा में भारतीय मिशन में प्रथम सचिव ईनम गंभीर ने स्वराज के संबोधन को उद्धृत किया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है तथा हमेशा रहेगा और कहा, ‘हमें उम्मीद है कि यह संदेश जोरदार और स्पष्ट है।’

प्रतिक्रिया के अधिकार में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने दावा किया था कि उरी में भारतीय सेना के शिविर पर हुआ हमला और खासतौर पर हमले के लिए चुने गए समय से ‘स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं कि इसे कश्मीर में भारत के ‘अत्याचारों से ध्यान भटकाने’ के लिए अंजाम दिया गया है। लोधी ने कहा कि कश्मीर में जारी अशांति का दोष पाकिस्तान पर मढ़ने और अपनी बर्बर हरकतों से ध्यान भटकाने के लिए भारत उरी हमले का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात से भलीभांति अवगत है कि भारत भ्रामक सूचनाओं को फैलाने के अपने सुनियोजित लक्ष्यों को साधने के लिए पहले भी ऐसी घटनाओं को अंजाम दे चुका है।’’

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के संरा महासभा में संबोधन पर भारत के प्रतिक्रिया के अधिकार के जरिए कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए गंभीर ने कहा था कि विश्व ने पाकिस्तान की ओर से ‘एक असफल राष्ट्र के विचार सुने है’ जो अपने लोगों पर अत्याचार पर अत्याचार किए जा रहा है और दूसरी ओर सहिष्णुता, लोकतंत्र और मानवाधिकार के उपदेश दे रहा है। उन्होंने कहा था, ‘हम इन उपदेशों को सिरे से खारिज करते हैं।’ गंभीर ने कहा कि पाकिस्तानी राजदूत ने कश्मीर में हालात पर अपने प्रतिक्रिया के अधिकार में ‘काल्पनिक और भ्रामक प्रस्तुतिकरण’ दिया था जो उनके देश द्वारा लगातार किए जा रहे आतंक के निर्यात से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भटकाने की एक और कोशिश है।

गंभीर ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के इन सवालों के जवाब नहीं दे रहा है कि आतंक के खिलाफ लड़ाई के लिए उसे मिलने वाली अरबों डॉलर की अंतरराष्ट्रीय मदद और पाकिस्तानी सेना के ‘बहुप्रचारित आतंक निरोधी अभियानों के बावजूद’ उसके यहां आतंक की सुरक्षित ठिकाने कैसे फल-फूल रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधि क्या इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि वे देश की नीति के तौर पर आतंक का निर्यात नहीं कर रहे और छद्म आतंकवाद का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं ?’ गंभीर ने पूछा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधि क्या इस बात से इनकार कर सकते हैं कि पाकिस्तान ने वर्ष 2004 में यह आश्वासन दिया था कि वह अपने इलाकों और अपने नियंत्रण वाले इलाकों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी हमलों के लिए नहीं होने देगा? पाकिस्तान के प्रतिनिधि क्या इस बात से इनकार कर सकते हैं कि उच्चतम स्तर पर दिए गए इस आश्वासन को, इस भरोसे को कायम रखने में वह नाकाम रहा है।’

भारत ने सवाल उठाया कि पाकिस्तानी प्रतिनिधि क्या इस बात से इनकार कर सकते हैं कि उनके देश के सैन्य बलों ने वर्ष 1971 में मानव इतिहास के सबसे ज्यादा जघन्य और बहुत बड़े पैमाने पर नरसंहार को अंजाम दिया था। गंभीर ने कहा, ‘पाकिस्तान के प्रतिनिधि क्या इस बात से इनकार कर सकते हैं कि उसके सैन्य बलों ने उनके अपने ही लोगों के खिलाफ बार-बार हवाई हमले किए हैं और तोपों का इस्तेमाल किया है। क्या वे यह बता सकते हैं कि ऐसा क्यों हैं कि पाकिस्तान के नागरिक समाज का ‘जैश’, ‘लश्कर’, ‘सिपह’ और ‘हरकत’ जैसे बड़ी संख्या में हथियारबंद लोगों की ओर से मुंह बंद कर दिया जाता है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक रणनीति में शामिल नहीं होने वाले राष्ट्रों को अलग-थलग कर देने के सुषमा स्वराज के आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए लोधी ने कहा कि भारत की सरकार अगर ऐसा सोचती है कि वह किसी देश को ‘अलग-थलग’ कर सकती है तो यह उसका ‘भ्रम’ है।

पाकिस्तानी राजूदत मलीहा लोधी ने कहा, ‘कश्मीर और अन्य स्थानों पर युद्ध अपराध करने और युद्ध की खातिर उकसाने के लिए खुद भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग पड़ सकता है।’ लोधी ने कहा कि स्वराज के वक्तव्य से पता चलता है कि भारत की सरकार ने पाकिस्तान के प्रति कितना ‘भ्रम और वैमनस्य’ पाल रखा है। उन्होंने कहा, ‘इन आरोपों का मुख्य उद्देश्य भारतीय कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में निर्दोष और निहत्थे कश्मीरी बच्चों, महिलाओं और पुरुषों पर वहां तैनात भारत के करीब पांच लाख सुरक्षा बलों द्वारा की जाने वाली बर्बरता से विश्व का ध्यान भटकाना है।’

संरा महासभा में शरीफ के संबोधन पर अपने प्रतिक्रिया के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह आतंकवाद को देश की नीति के औजार के तौर पर इस्तेमाल करके युद्ध अपराधों को अंजाम दे रहा है। लोधी ने अपने प्रतिक्रिया के अधिकार में कहा कि आजादी के लिए आवाज उठाने वाले कश्मीरी लोगों को भारतीय बर्बरता का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘युद्ध अपराध किसी देश के द्वारा किए जाने वाले आतंकवाद का सबसे खराब स्वरूप है। बीते कई दशकों से जम्मू-कश्मीर में विदेशी कब्जे के हालात में भारत इन्हें अंजाम दे रहा है।’

लोधी ने कहा कि भारत द्वारा कश्मीर में ‘बड़े पैमाने पर किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों और अत्याचारों’ की पाकिस्तान पूरी और निष्पक्ष जांच की मांग करता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि ‘संरा मानवाधिकार उच्चायुक्त द्वारा प्रस्तावित जांच को भारत स्वीकार करे और उन्हें इसके लिए आने दे।’ कश्मीर में गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी नागरिक बहादुर अली का विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा जिक्र किए जाने पर लोधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाल ही में पकड़े गए ‘भारतीय जासूस कुलभूषण यादव, जो खुफिया विभाग का अधिकारी है’ , ने स्वीकार किया है कि भारत आतंकवादी और विध्वसंकारी गतिविधियों को, खासकर बलूचिस्तान और संघीय प्रशासन वाले कबायली इलाकों में समर्थन देता है।

लोधी ने कहा, ‘निश्चित ही वह कुलभूषण है जो संरा की प्रतिबंधित सूची में शामिल लोगों और संगठनों को वित्तीय मदद, हथियार मुहैया करवा रहा था।’ उन्होंने कहा कि भारत की ‘पाकिस्तान में दखल देने की नीति’ खासकर बलूचिस्तान को अस्थिर करने का प्रयास अब सबके सामने है। यह संयुक्त राष्ट्र के घोषणा पत्र के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।’ लोधी ने भारत को दोष देते हुए कहा कि बीते एक साल से ज्यादा समय से उसने पाकिस्तान के साथ बातचीत बंद कर रखी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लगातार प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सुझावों के बावजूद नई दिल्ली बातचीत शुरू करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने हाल ही में इस सभा के मंच से प्रस्ताव दिया है। लेकिन हम बता देना चाहते हैं कि बातचीत से अकेले पाकिस्तान को कोई फायदा नहीं होने वाला है। यह तो भारत और पाकिस्तान दोनों देशों और नागरिकों के हित में है।’

लोधी ने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ गंभीर और परिणामोन्मुखी बातचीत के लिए ‘तैयार है’ खासतौर से जम्मू-कश्मीर के लंबे समय से चले आ रहे विवाद का हल खोजने के लिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थायी अमन, स्थिरता और विकास के लिए यह बेहद जरूरी है। अपने दूसरे प्रतिक्रिया के अधिकार में पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर को अभी भी विवादित क्षेत्र माना जाता है। इसकी प्रतिक्रिया में गंभीर ने कहा कि पाकिस्तान ने मुश्किल सवालों पर फिर ‘चुप्पी साध ली है।’ उन्होंने कहा, ‘हम पाकिस्तान से ढकोसले, छल और इनकार की ही उम्मीद करते हैं। दुनिया अभी भी उनके जवाब का इंतजार कर रही है।’

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