नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार, 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 100 लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
ल्हेंडे खोला और भोटे कोशी नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने सड़कें, पुल और कई मकान बहा दिए। बाढ़ के बाद हुए भूस्खलन से नेपाल और तिब्बत के बीच अहम आवाजाही केंद्र जिरोंग पोर्ट भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने से बिजली और संचार सेवाएं भी ठप हो गईं।
यह पहली बार नहीं है जब इन नदियों (ल्हेंडे खोला, भोटे कोशी की एक सहायक नदी है) को ऐसी आपदा का सामना करना पड़ा है। पिछले साल भी इसी नदी तंत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियल झील फटने से अचानक बाढ़ आई थी। उस दौरान नेपाल के चार बड़े हाइड्रोपावर प्लांट प्रभावित हुए थे और देश की करीब 8 फीसदी बिजली आपूर्ति पर असर पड़ा था।
हालांकि, इस ताजा घटना का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों ने भूकंप के कारण हुए हिमस्खलन को इसका कारण बताया है, हालांकि आधिकारिक जांच अभी जारी है।
फ्लैश फ्लड क्या होती है? भूकंप से यह कैसे आ सकती है? और नेपाल की भौगोलिक बनावट उसे ऐसी आपदाओं के लिए ज्यादा संवेदनशील क्यों बनाती है? आइए समझते हैं।
फ्लैश फ्लड कैसे आती है?
फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़, जिसमें बहुत कम समय में पानी का तेज और भारी प्रवाह निचले इलाकों को डुबो देता है। पहाड़ी इलाकों में ऐसी बाढ़ ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि ढलान के कारण पानी बहुत तेज रफ्तार और भारी ऊर्जा के साथ नीचे की ओर आता है। रास्ते में आने वाली सड़कें, पुल, घर और दूसरी संरचनाएं तक बह सकती हैं। पानी की रफ्तार इतनी ज्यादा हो सकती है कि नीचे रहने वाले लोगों को बचने या सुरक्षित जगह पहुंचने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है।
ताजा फ्लैश फ्लड ने हाइड्रोपावर प्लांट और संचार से जुड़े भारी बुनियादी ढांचे को पलभर में तबाह कर दिया, जिससे प्रभावित सीमावर्ती इलाके बाहरी दुनिया से कट गए। हालांकि, इस आपदा की वजह अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं की गई है। लेकिन अधिकारियों की ओर से इस संभावना पर विचार किया जा रहा है कि भूकंप के कारण आया हिमस्खलन इस फ्लैश फ्लड की वजह बना हो सकता है।
भूकंप से हिमस्खलन कैसे हो सकता है?
हिमालय पर्वतमाला की चोटियां विशालकाय हिमनदों और नाजुक रूप से संतुलित चट्टानी संरचनाओं से ढकी हुई हैं। भूकंप इस नाजुक संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे चट्टान, बर्फ, मिट्टी और अन्य ठोस पदार्थ हिंसक रूप से विस्थापित हो सकते हैं।
रॉयटर्स के अनुसार , अधिकारियों को संदेह है कि ल्हेंडे खोला नदी में आए भूकंप के कारण बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन हुआ। भोटे कोशी की यह संकरी, ऊंचाई पर स्थित सहायक नदी हिमस्खलन के अधिकांश मलबे को अपने साथ बहा ले गई। रास्ते में कहीं, मलबा संभवतः एक घना और अस्थायी बांध बन गया। ऐसे मामलों में पानी इस अस्थिर अवरोध के पीछे तेजी से जमा हो सकता है, जब तक कि लगातार बढ़ता दबाव बांध की दीवार में दरार न डाल दे।
इस दरार के कारण हिमस्खलन से निकले ठोस मलबे के साथ पानी की एक विशाल धारा तेजी से नीचे की ओर बस्तियों की ओर बढ़ रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लेंडे खोला नदी में अभी भी फंसे मलबे के कारण दूसरी बाढ़ आने की संभावना है।
नेपाल की भौगोलिक संरचना
नेपाल की बेहद ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक संरचना में दुनिया की कुछ सबसे ऊंची पर्वत चोटियां और उनके बीच संकरी लेकिन गहरी नदी घाटियां मौजूद हैं। यह भौगोलिक बनावट पानी के लिए प्राकृतिक फनल की तरह काम करती है, जिससे पानी की रफ्तार तेजी से बढ़ जाती है और बाढ़ की विनाशकारी क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
हालांकि इससे कई भूवैज्ञानिक जटिलताएं उत्पन्न होती हैं, लेकिन कुछ तात्कालिक बाधाएं इस प्रकार हैं:
प्राकृतिक रूप से दुर्गम भूभाग और आपदा के कारण आपातकालीन राहत सेवाओं में कठिनाई उत्पन्न हो जाती है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि बाढ़ का पानी उतरने तक बचाव हेलीकॉप्टर प्रभावित क्षेत्रों में नहीं उतर पाएंगे। संकरी घाटियों के कारण बस्तियां घनी आबादी में बसी होती हैं। ऐसे मामलों में एक ही बाढ़ इन समुदायों को भौगोलिक रूप से सहायता से अलग कर सकती है।
बाढ़ के पानी का ढलान और ऊंचाई भी खतरे को और बढ़ा देती है। तेज ढलानों से नीचे बहते हुए पानी अपने साथ नदी तल और किनारों पर पड़ी भारी मात्रा में मिट्टी और चट्टानों को बहा ले जाता है। इस बाढ़ के गाद ने ग्यिरोंग बंदरगाह के भूमि मार्ग पर तैनात 574 बचाव कर्मियों के लिए रसद संबंधी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति में लेंडे खोला एक सीमा पार नदी है जो नेपाल और चीन दोनों से होकर बहती है। यह भोटे कोशी नदी की एक उच्च ऊंचाई वाली सहायक नदी है,जो इस क्षेत्र के परस्पर जुड़े जलविज्ञानीय नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें त्रिशुली और नारायणी नदियां भी शामिल हैं।
ये तीनों नदियां पहाड़ों के बीच से होकर गहरी नदी घाटियां बनाती हैं और फिर नीचे की ओर बहते हुए मैदानों में पहुंच जाती हैं। इसी परस्पर जुड़े प्रवाह के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे निचले राज्यों में तुरंत बाढ़ की चेतावनी जारी की गई।
इसके अलावा, तेज गति से बहने वाली नदियां पनबिजली उत्पादन के लिए अत्यधिक मूल्यवान हैं, जो विदेशी निवेश और श्रमिकों को आकर्षित करती हैं। जैसे कि आठ दक्षिण कोरियाई नागरिक जो बाढ़ के दौरान एक पनबिजली संयंत्र की चपेट में आने के बाद से लापता हैं।
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चीन अधिकृत तिब्बत से आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। नेपाल के डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की ओर से जारी किए गए एक बयान में बताया गया है कि नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी कैचमेंट एरिया में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा होने से हालात काफी खराब हो गए। चीन-नेपाल बॉर्डर पर भारी नुकसान हुआ है। पढ़ें पूरी खबर।
