डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप होंगी व्हाइट हाउस में सलाहकार, नहीं लेंगी कोई वेतन

व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि इवांका संघीय कर्मी के तौर पर अपने काम के लिए वेतन नहीं लेंगी।

मदरसों के छात्रों को बिजनेस के गुर सिखाएंगी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की बेटी। (photo source – AP)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पुत्री इवांका ट्रंप अपने पिता के अवैतनिक सलाहकार के तौर पर एक और पदभार संभालेंगी। व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि इवांका संघीय कर्मी के तौर पर अपने काम के लिए वेतन नहीं लेंगी। उनके पति जारेद कुशनेर राष्ट्रपति के वरिष्ठ सहयोगी के तौर पर काम करते हैं। वह एक रियल एस्टेट कारोबारी हैं और वह भी अपनी सेवाओं के लिए वेतन नहीं लेते हैं। व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा, ‘‘हम बहुत खुश हैं कि इवांका ट्रंप ने राष्ट्रपति की बेटी होने के नाते और राष्ट्रपति के समर्थन में अपनी अभूतपूर्व भूमिका के लिये यह कदम उठाने का फैसला किया है।’’

उसने कहा, ‘‘अवैतनिक कर्मी के रूप में इवांका की सेवायें नैतिकता, पारदर्शिता के प्रति हमारी प्रतिबद्धताओं को मजबूत करती हैं और उन्हें (इवांका को) अमेरिकी लोगों के लिए वास्तविक नीतिगत लाभों को पहुंचाने की पहलों का नेतृत्व करने का अवसर देती हैं जो उन्हें पहले नहीं मिला था।’’डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद इवांका पिछले कुछ माह से नियमित तौर पर व्हाइट हाउस में उपस्थित रहती हैं। यहां उनका एक कार्यालय भी है।

इवांका ट्रंप एक तरफ अपने पिता के अवैतनिक सलाहकार के तौर पर पदभार संभालेंगी तो दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन अफगानिस्तान में अपनी नीति की समीक्षा कर रहा है। अफगानिस्तान में अपनी नीति पर अमेरिकन सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल जे एल वोटेल ने कांग्रेस के समक्ष कल एक सुनवाई के दौरान ‘हाउस आर्म्ड सर्विसेस कमेटी’ के सदस्यों से कहा, ‘‘इस समय (अफगानिस्तान में) हम गतिरोध की स्थिति में है। इस समय यह सरकार के हित में है लेकिन गतिरोध की प्रवृत्ति समय के साथ कमजोर पड़ने की होती है इसलिए मुझे लगता है कि हमें इसे समर्थन देना जारी रखना होगा।’’

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में जमीनी स्तर पर करीब 8000 अमेरिकी सैन्यकर्मी हैं। अमेरिका के वहां दो अभियान है। ‘‘एक आतंकवाद के खिलाफ अभियान है जो पूरी तरह संसाधनों से युक्त है और यह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुझे इस पर पूरा भरोसा है।’ वोटेल ने कहा, ‘‘दूसरा नाटो अभियान है जिसके तहत प्रशिक्षण, सलाह और सहायता का काम किया जा रहा है। मुझे लगता है कि इस अभियान में, हमें अपने उद्देश्यों पर नजर डालने पर विचार करना चाहिए कि हम किस प्रकार इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन दें और सुनिश्चित करें कि अफगानिस्तान सरकार के पास अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समय एवं क्षमताएं हों।’’

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