अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ सीजफायर को आगे बढ़ाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अगले सप्ताह तक समझौता हो सकता है। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत काफी तेजी से चल रही है। ट्रंप ने एबीसी न्यूज को बताया कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े एक एमओयू को अभी तक मंजूरी नहीं दी है।
सीजफायर के बीच ही पिछले दिनों अमेरिका और ईरान के सशस्त्र बलों ने एक-दूसरे पर हमले किए थे और उसके बाद यह सवाल उठ रहा था कि क्या सीजफायर को लेकर चल रही बातचीत पूरी तरह रुक जाएगी?
ट्रंप ने सोमवार को बताया था कि लेबनान में बढ़ रहे तनाव के बीच उन्होंने चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह के प्रतिनिधियों और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की थी। ट्रंप ने दावा किया था कि हिजबुल्लाह इस बात पर सहमत है कि इजरायल के खिलाफ की जा रही गोलीबारी बंद कर दी जाएगी।
इससे पहले ऐसी खबरें सामने आई थी कि ईरान इस बातचीत से पीछे हट सकता है हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस ताजा बयान के बाद सीजफायर को लेकर कोई समझौता जल्द होने की उम्मीद है। ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका तनाव नहीं बढ़ाना चाहता और वह कूटनीतिक रास्ते पर चलना चाहता है।
इजरायल ने किए लेबनान पर हमले
पिछले दिनों इजरायल ने लगातार लेबनान पर हमले किए हैं। 26 सालों में पहली बार ऐसा हुआ जब इजरायल की सेना लेबनान में गई। नेतन्याहू ने इजरायल की सेना को बेरूत में हिजबुल्लाह के कब्जे वाले दक्षिणी इलाकों पर हमला करने का निर्देश दिया था। यह माना जा रहा था कि हालत और गंभीर होंगे और इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत हुई।
ईरान ने दी थी चेतावनी
ईरान ने सोमवार को सख्त तेवरों के साथ कहा था कि उसने लेबनान में हुई कार्रवाई के बाद अमेरिका के साथ बातचीत बंद कर दी है। ईरान ने वाशिंगटन और इजरायल को साफ शब्दों में चेताया था।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर लेबनान सहित सभी मोर्चों पर है और अगर किसी एक मोर्चे पर इसका उल्लंघन होता है तो इसे सभी जगह पर सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा। अराघची ने यह भी चेतावनी दी थी कि अमेरिका और इजरायल सीजफायर के उल्लंघन के नतीजों के लिए जिम्मेदार हैं।
अमेरिका-ईरान जंग से सीख ले रहा चीन?
चीन अपनी न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास बड़े पैमाने पर मिलिट्री बेस बना रहा है। माना जा रहा कि चीन ऐसा इसलिए कर रहा है जिससे कभी परमाणु हथियारों के खिलाफ जंग हो तो अमेरिका का पहला हमला चीन की जवाबी कार्रवाई को रोक न सके। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
