अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर बताया कि ईरान इस बात पर सहमत है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेगा। ट्रंप ने इस तरह की खबरों को भी बकवास बताया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर का भुगतान कर रहा है।

ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए ईरान के साथ एमओयू पर दस्तखत किए जा चुके हैं। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में 300 मिलियन डॉलर का जिक्र किया है लेकिन असल में यह 300 बिलियन डॉलर है।

जी7 सम्मेलन में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ पत्रकारों से बातचीत में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या समझौते में ईरान के लिए प्रतिबंधों में राहत शामिल है, ट्रंप ने इससे इनकार कर दिया।

इससे पहले ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई थी। 19 जून को स्विट्जरलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम में समझौते पर दस्तखत किए जाएंगे। ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ अमेरिका का समझौता दुनिया के लिए अच्छा होगा। उन्होंने कहा था कि मिडिल ईस्ट में बहुत कुछ अच्छा होने वाला है और अहम बात यह है कि तेल की कीमतें तेजी से गिर रही हैं और शेयर बाजार भी ऊपर चढ़ रहा है। 

ट्रंप ने शांति समझौते की सराहना की क्योंकि इसके तहत होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोल दिया गया है। यह जलमार्ग बेहद अहम है और इससे दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इसके बंद होने से खाड़ी के देशों से तेल की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी और इससे दुनिया भर के बाजारों में अच्छी-खासी उथल-पुथल हो गई थी। भारत में भी इस वजह से गैस की आपूर्ति में काफी मुश्किलें आई थी और महंगाई बढ़ गई है। 

फाइनेंशियल टाइम्स ने अमेरिका के एक अफसर के हवाले से बताया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट फंड बनाने की अनुमति देने के लिए तैयार है लेकिन इसके लिए शर्त यही है कि ईरान को पहले परमाणु समझौते को स्वीकार करना होगा। 

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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर सहमति बन गई है। इस सहमति के बाद तेल कीमतों में गिरावट आई है, उर्जा संकट कम होता दिख रहा है, लेकिन इजरायल अभी भी अपने रुख पर कायम है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।