ताज़ा खबर
 

‘एक चीन’ नीति पर राज़ी होने के लिए डोनाल्ड ट्रंप को बीजिंग से कुछ मिला

ट्रंप ने पिछली परंपराओं को तोड़ते हुए नवंबर (2016) में अपनी जीत के बाद ताइवान को फोन किया था और ‘एक चीन’ नीति पर सवाल उठाए थे।

Author वॉशिंगटन | February 28, 2017 1:41 PM
अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के सख्‍त रुख से पाकिस्‍तान सकते में है। (Source: AP)

व्हाहट हाउस ने मंगलवार (28 फरवरी) को संकेत दिया कि ‘एक चीन’ नीति पर सहमत होने के एवज में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बीजिंग से ‘कुछ मिला’ है। ट्रंप ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत के बाद पहले इस नीति पर सवाल उठाए थे। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर से उनके दैनिक संवाददाता सम्मेलन में जब पिछले कुछ महीनों में ‘एक चीन’ नीति को लेकर ट्रंप के रुख में आए बदलाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति को हमेशा कुछ मिलता है।’ ट्रंप ने पिछली परंपराओं को तोड़ते हुए नवंबर में अपनी जीत के बाद ताइवान को फोन किया था और ‘एक चीन’ नीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने संकेत दिया था कि यदि बीजिंग नए व्यापार समझौते का पालन करने पर सहमत नहीं होता है तो वाशिंगटन एक चीन को समर्थन देने की अपनी करीब तीन दशक पुरानी नीति का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है। हालांकि ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ इस माह की शुरुआत में फोन पर पहली बार की गई बातचीत में ‘एक चीन’ नीति को अमेरिका के समर्थन की पुन: पुष्टि की थी।

स्पाइसर ने कहा, ‘उनकी (ट्रंप) राष्ट्रपति शी के साथ बातचीत हुई। मैं इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दूंगा लेकिन राष्ट्रपति शी के अनुरोध पर और वार्ता करने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘एक चीन’ नीति की पुन: पुष्टि की।’ स्पाइसर से पूछा गया, ‘क्या उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि अमेरिकियों को कुछ मिले?’ प्रेस सचिव ने कहा, ‘राष्ट्रपति को हमेशा कुछ न कुछ मिलता है।’ ट्रंप ने आयोवा के गवर्नर टेरी ब्रैनस्टेड को चीन के लिए अपना राजदूत नियुक्त किया है। व्हाइट हाउस ने टेरी ब्रैनस्टेड की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘वह चीन के प्रति नरम नीतियां अपनाने के रूप में जाने जाते हैं। मुझे लगता है कि वह हमारे देश का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार काम करेंगे। उन्हें चीनी अर्थव्यवस्था और चीन सरकार के बारे में अच्छी समझ है। इससे हमारे देश को काफी लाभ होगा।’

‘वन चाइना पॉलिसी’ को लेकर बोले डोनाल्ड ट्रंप, हुक्म नहीं चला सकता चीन

चीन ने सोमवार (12 दिसंबर) को अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को आगाह करते हुए कहा कि अगर उन्होंने ताइवान को महत्व देकर ‘एक चीन की नीति’ से ‘समझौता’ किया तो इससे चीन एवं अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर काफी बुरा असर पड़ेगा। ट्रम्प ने हाल में ताइवान को लेकर अमेरिकी की लंबी समय से चली आ रही नीति की आलोचना की थी जिसे लेकर चीन ने बेहद कड़ी प्रतिक्रिया दी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने ट्रम्प की टिप्पणी को लेकर यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘एक चीन की नीति का पालन करना चीन-अमेरिका संबंधों का आधार है, अगर उससे समझौता किया गया या उससे छेड़छाड़ हुई तो चीन-अमेरिका संबंधों का ठोस एवं स्थिर विकास और साथ ही प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की गुंजाइश नहीं बचेगी।’ उन्होंने कहा, ‘चीन ने संबंधित खबर का संज्ञान किया है और उसे लेकर काफी चिंतित है।’

रविवार (11 दिसंबर) को ट्रम्प ने एक टीवी साक्षात्कार में सवाल उठाया था कि जब तक बीजिंग व्यापार और अन्य मुद्दों पर रियायतें नहीं देता तब तक क्या अमेरिका को ‘एक चीन की नीति’ को जारी रखना चाहिए? अमेरिका 1979 से ताइवान पर चीन के रूख का सम्मान करता रहा है जिसे चीन खुद से अलग हुआ एक प्रांत मानता है। लेकिन ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन से रियायतें मिले बिना इसे जारी रखना चाहिए। वह हाल के वर्षों में ताइवान को लेकर इस तरह की टिप्पणी करने वाले पहले अमेरिकी नेता हैं। गेंग ने ट्रम्प की टिप्पणी को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि ताइवान का मुद्दा चीन की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा हुआ है और चीन के मूल हितों से संबंधित है।’

लेकिन इन कड़ों शब्दों के साथ कठोर प्रतिक्रिया करने के बावजूद चीन ने कोई राजनयिक विरोध दर्ज नहीं कराया है। हालांकि कुछ दिन पहले ट्रम्प के ताइवानी राष्ट्रपति से फोन पर बात करने के बाद चीन ने इस तरह का विरोध दर्ज कराया था। गेंग ने कहा कि चीन चाहता है कि नया अमेरिकी प्रशासन और उसका नेतृत्व ताइवान के मुद्दे की संवेदनशीलता को पूरी तरह समझे, एक चीन की नीति और साथ ही चीन एवं अमेरिका के बीच तीन संयुक्त बैठकों में तय हुए सिद्धांतों पर कायम रहे। उन्होंने साथ ही कहा कि अमेरिका विवेकपूर्ण तरीके से ताइवान से जुड़े सवालों से निपटे ताकि द्विपक्षीय संबंधों के हित प्रभावित ना हों।

 

डोनाल्ड ट्रंप के ‘मुस्लिम बैन’ के आदेश पर रोक बरकरार; फेडरल कोर्ट के आदेश से भड़के ट्रंप

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App