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पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख रखने वाले रॉबर्ट विलियम्स सहायक सचिव पद के लिए नामित

ट्रंप प्रशासन के शुरुआती दौर से ही दक्षिण और मध्य एशिया के सहायक मंत्री का पद खाली पड़ा है।

Author Updated: December 13, 2018 6:14 PM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो सोर्स : AP Photo/Susan Walsh)

पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख अपनाने को लेकर पहचाने जाने वाले रॉबर्ट विलियम्स को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (12 दिसंबर) को दक्षिण एशिया मामलों के लिए विदेश विभाग के सहायक सचिव पद के लिए नामित किया। विलियम्स के पास विश्लेषक और खुफिया अधिकारी के तौर पर दक्षिण एशिया और अफगानिस्तान मामलों में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। ट्रंप ने कहा कि वह किसी अनुभवी खुफिया अधिकारी को इस पद पर नामित करना चाहते थे।

व्हाइट हाउस में वह आगे बोले रॉबर्ट विलियम्स बीते 20 से अधिक वर्षो से दक्षिण एशिया और अफगानिस्तान मामलों के विशेषज्ञ होने के अलावा एक विश्लेषक और खुफिया अधिकारी हैं। बता दें कि ट्रंप प्रशासन के शुरुआती दौर से ही दक्षिण और मध्य एशिया के सहायक मंत्री का पद खाली पड़ा है। खुफिया अधिकारी होने के कारण विलियम्स के बारे में सार्वजनिक तौर पर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।

हालांकि, राजनयिक समुदाय में उनकी छवि पाकिस्तान पर सख्त रुख रखने वाले अधिकारी और एक ऐसे व्यक्ति की है, जो अमेरिका के कूटनीतिक साझेदार के तौर पर भारत की महत्ता को पहचानते हैं। ट्रंप के मुताबिक, विलियम्स 2017 से वाशिंगटन में डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआईए) में तैनात थे। वह इंटेलिजेंस एंड डायरेक्टरेट फॉर ऑपरेशन्स के सहायक डिप्टी डायरेक्टर रह चुके हैं|

तिब्बत पर US ने पारित किया सख्त कानूनः अमेरिकी संसद द्वारा तिब्बत पर एक सख्त कानून पारित किए जाने का स्वागत करते हुए देश के एक शीर्ष सीनेटर ने बुधवार को कहा कि यह कानून दशकों से हो रहे अन्याय के समाधान की दिशा में मजबूत द्विदलीय कदम है। संसद के दोनों सदनों ने ‘रेसिप्रोकल एक्सेस टू तिब्ब्त एक्ट’ पारित कर दिया है। अब यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए गया है, जिसके बाद इसे कानून का दर्जा मिल जाएगा।

अमेरिकी नागरिकों, सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों को इसके तहत तिब्बत तक जाने की अनुमति नहीं देने वाले चीनी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाने सहित अन्य कठोर कदम शामिल हैं। अमेरिकी सीनेटर पैट्रिक लीह ने सदन में कहा यह कानून दशकों से हो रहे अन्याय के समाधान की दिशा में मजबूत द्विदलीय कदम है।

उन्होंने रेखांकित किया कि चीन की सरकार ने मनमाने तरीके से तिब्बत जाने के लिए विदेशी राजनयिकों, पत्रकारों और पर्यटकों को विशेष परमिट जारी करने की अनिवार्यता लगा रखी है और वह अकसर परमिट देने से इंकार भी कर देता है। जबकि शिन्जियांग सहित अन्य क्षेत्रों के लिए ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है।

( आईएएनएस इनपुट्स के साथ)

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