पेंटागन के पूर्व अधिकारी और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट (AEI) के सीनियर फेलो माइकल रुबिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम पर टिप्पणी दी। उन्होंने कहा, “मुझे कोई समझौता होता नहीं दिख रहा है। ट्रंप के अल्टीमेटम अक्सर रेत पर पेंसिल से खींची गई लकीरों जैसे होते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “इसके बावजूद, डोनाल्ड ट्रंप जो कर रहे हैं उसके पीछे एक सैन्य रणनीति है। हर बार जब वह कोई अल्टीमेटम देते हैं, तो ईरानी प्रतिक्रिया देते हैं और अमेरिका उनकी प्रतिक्रिया को नोट करता है। अगर वह लगातार अल्टीमेटम देते रहें और फिर उन्हें बढ़ाते रहें, तो अमेरिका को खुफिया जानकारी मिलती रहती है और ईरान की तैयारी कमजोर होती जाती है।”
उन्होंने कहा कि कम से कम उन लोगों के लिए जो कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, यह उम्मीद करना अवास्तविक है कि कोई समाधान निकल आएगा, अगर ईरानी नेतृत्व को यह डर न हो कि इससे भी बदतर कुछ हो सकता है।
पूर्व पेंटागन अधिकारी ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की छवि रणनीतिक धैर्य की कमी वाली रही है। इसी वजह से ईरानी शासन या जो भी उसका हिस्सा बचा है, अमेरिका को हराने की कोशिश नहीं कर रहा। बल्कि सिर्फ उसकी धैर्य सीमा को पार करने की कोशिश कर रहा है। अगर वह ऐसा कर लेता है, तो वह जीत का दावा करेगा, चाहे डोनाल्ड ट्रंप इसे किसी भी तरह पेश करने की कोशिश करें।”
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी दी कि अमेरिका एक ही रात में पूरे ईरान को तबाह कर सकता है और वह रात मंगलवार शाम हो सकती है। ट्रंप ने कहा, “पूरे देश (ईरान) को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है। यह कल रात भी हो सकता है।”
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम आज यहां सैन्य प्रयासों से अब तक के सबसे बड़े, सबसे जटिल और सबसे भयावह सर्च ऑपरेशन में से एक की सफलता का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुए हैं। आम तौर पर, जब युद्ध में विमान गिरा दिए जाते हैं, खासकर जब आप किसी शक्तिशाली समूह, किसी दुष्ट समूह से लड़ रहे हों, तो आप वास्तव में ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि आप एक को उठाने के लिए 200 लोगों को भेजते हैं और यह ऐसा काम है जिसे आमतौर पर उतनी बार नहीं किया जाता जितना आप करना चाहते हैं।” पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें…
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बिहार की राजधानी पटना में ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने वैश्विक शांति पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया को अब युद्ध नहीं, शांति की जरूरत है। उन्होंने कहा, “हमें शांति की बात करनी होगी और दुनिया में शांति स्थापित करनी होगी।” पूरी खबर पढ़ें…
