Middle East Tension: ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध में सीजफायर के बाद इस्लामाबाद में हुई शांति समझौते की बातचीत विफल रही। इसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिका होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह से बंद कर देगा, जिससे होर्मुज पर ईरान की ओर जहाजों की आवाजाही ठप हो जाएगी।
ट्रंप द्वारा दी गई डेडलाइन खत्म होने के बाद अब मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि अमेरिकी नेवी ने होर्मुज पर ब्लॉकेज का काम शुरू हो गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर कोई ईरानी जहाज अमेरिकी सेना द्वारा लगाए गए नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, “ईरान की नौसेना समुद्र की तलहटी में पड़ी है। पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। हमने उनके उन कुछ जहाजों को निशाना नहीं बनाया जिन्हें वे “तेज हमलावर जहाज” कहते हैं, क्योंकि हमने उन्हें ज्यादा खतरा नहीं माना।”
ईरान में आ सकती है आर्थिक तबाही
डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को लेकर जो प्लानिंग की है, और अगर होर्मुज ब्लॉकेज सफल रहता है तो सीधे तौर पर ईरान को हर रोज करीब-करीब 276 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा, जो वो तेल-गैस बेचने से हासिल करता है।
ईरान की कमाई का मुख्य जरिया ही तेल और गैस है। उसकी 80 प्रतिशत कमाई इससे ही होती है। होर्मुज पर अगर अमेरिका आक्रामक होता है तो ईरान आर्थिक तौर पर और तबाह हो सकता है। दूसरी ओर ईरान अब भी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है और होर्मुज को अपनी शर्तों पर खोल रहा है, बंद कर रहा है।
चीन की भी बढ़ेगी परेशानी?
अहम बात यह भी है कि होर्मुज बंद होने से बड़ा नुकसान केवल ईरान को नहीं बल्कि चीन को भी हो सकता है। इसकी वजह यह है कि दुनिया में चीन ऐसा देश है, जो कि ईरान का 80 प्रतिशत तेल खरीदता है।
इसके अलावा चीन अपनी तेल आपूर्ति का 45 से 50 फीसदी हिस्सा होर्मुज के जरिए ही लाता है। इतना ही नहीं, चीन में इस्तेमाल होने वाली गैस का करीब 30 फीसदी हिस्सा भी होर्मुज से ही होकर गुजरता है।
चीन को ज्यादा नुकसान कैसे?
खास बात यह भी है कि चीन अपनी जरूरतों के लिए तेल और गैस आयात केवल ईरान से नहीं बल्कि सऊदी अरब, इराक, यूएई और कतर जैसे देशों से भी करता है। अब चीन के लिए दिक्कत की बात यह है कि सभी देशों से तेल गैस के आपूर्ति का रास्ता केवल होर्मुज जलमार्ग का ही है।
ऐसे में जब तक होर्मुज जलमार्ग में ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और ब्लॉकेज का संकट रहेगा, तो चीन के लिए तेल गैस की आपूर्ति बाधित हो सकती है।
चीन ने क्या कहा?
इसी मामले में चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने भी यही कहा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नियंत्रित करता है और यह हमारे लिए खुला है। डोंग जून ने कहा, “हमारे जहाज होर्मुज स्ट्रेट में लगातार आ-जा रहे हैं। ईरान के साथ हमारे व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं। हम उनका सम्मान करेंगे और अपेक्षा करते हैं कि अन्य लोग हमारे मामलों में दखल न दें।”
चीनी रक्षा मंत्री का बयान अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की उस धमकी के बाद आया है, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि वो होर्मुज की घेराबंदी करने जा रहे हैं। उनका यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप को चेतावनी जैसा है, क्योंकि होर्मुज पर अमेरिकी कब्जे का मतलब होगा कि चीन की तेल-गैस की आधी सप्लाई तुरंत ही ठप हो जाएगी।
चीन को निशाना बना रहा अमेरिका
खास बात यह है कि ट्रंप ईरान के कंधे पर बंदूक रखकर सांकेतिक तौर पर चीन को भी निशाना बना रहे हैं। इसके संकेत तब भी मिले थे, जब होर्मुज संकट के बीच ट्रंप प्रशासन द्वारा आक्रामकता दिखाते हुए ये कहा गया था कि अगर कोई देश ईरान को सप्लाई करता है, तो उस पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, और अमेरिका में उसके सामान पर टैरिफ भी लगाया जा सकता है।
न्यूयॉर्क पोस्ट और वॉशिंगटन पोस्ट पहले ये दावा कर चुके हैं कि चीन ईरान को सुपरसोनिक मिसाइले देने के साथ ही अपना एयर डिफेंस सिस्टम भी उपलब्ध करा रहा है। ऐसे में अब होर्मुज के जरिए अमेरिका चीन को निशाना बना सकता है।
अब देखना ये भी होगा कि इस मामले में चीन का रुख क्या होता है… क्या वो अपने लिए कोई दूसरा रास्ता खोजता है, या खुलकर अमेरिका के खिलाफ बोलने की हिम्मत दिखाता है।
ईरान ने पाकिस्तानी जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जाने की दी इजाजत

ईरान ने पाकिस्तान के दो व्यापारिक जहाजों को सोमवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने और कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात जाने की अनुमति दे दी है जबकि पहले उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। ‘पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉर्पोरेशन’ (पीएनएससी) के ये दोनों व्यापारिक जहाज (शालीमार और खैरपुर) ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध शुरू होने के बाद फारस की खाड़ी में जाने वाले पहले पाकिस्तानी जहाज हैं। पढ़िए पूरी खबर…
