अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को ईरान में चल रहे युद्ध और यूक्रेन में शांति की संभावनाओं पर चर्चा की। यह चर्चा क्रेमलिन प्रमुख (रूसी राष्ट्रपति) की उस वॉर्निंग के कुछ ही घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक वैश्विक ऊर्जा संकट दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।
2026 में दोनों नेताओं के बीच यह पहली फोन कॉल
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। यह उछाल रूस द्वारा 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद पैदा हुई उथल-पुथल के बाद से सबसे बड़ा है। इसके साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के बाद खाड़ी देशों के तेल उत्पादकों ने भी अपना उत्पादन कम कर दिया है।
क्रेमलिन (रूस की राजधानी मॉस्को के बिल्कुल केंद्र में स्थित एक ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण किलेबंद परिसर है) ने बताया कि ट्रंप ने पुतिन को फोन किया। इस साल दोनों नेताओं के बीच यह पहली फोन कॉल थी। इस बातचीत में उन्होंने ईरान में चल रहे संघर्ष को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए रूस के सुझावों, यूक्रेन में सैन्य स्थिति और वैश्विक तेल बाजार पर वेनेजुएला के प्रभाव पर चर्चा की।
ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित अपने गोल्फ क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मेरी राष्ट्रपति पुतिन के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई।” उन्होंने आगे कहा कि पुतिन ईरान के मामले में मदद करना चाहते है। ट्रंप ने कहा, “मैंने उनसे कहा कि आप यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करवाकर ज्यादा मदद कर सकते हैं। वह ज्यादा मददगार साबित होगा।”
तेल का उत्पादन जल्द ही पड़ सकता है ठप
बता दें कि यह फोन कॉल पुतिन की उस टिप्पणी के कुछ ही घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले ने एक वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले परिवहन पर निर्भर तेल का उत्पादन जल्द ही ठप पड़ सकता है।
पुतिन ने कहा कि रूस (दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है और जिसके पास प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा भंडार है) यूरोपीय ग्राहकों के साथ फिर से काम करने के लिए तैयार है, बशर्ते वे लंबे समय के सहयोग की ओर लौटना चाहें। इधर, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच, ट्रंप प्रशासन रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है।
अमेरिकी प्रयासों को बना सकता है जटिल
इस योजना से परिचित तीन सूत्रों के अनुसार, सोमवार को इस संबंध में कोई घोषणा की जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य बढ़ते संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया से होने वाली तेल की शिपमेंट में आई भारी रुकावटों के बाद दुनिया भर में तेल की आपूर्ति को बढ़ाना है। हालांकि, यह कदम यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को मिलने वाले राजस्व से वंचित करने के अमेरिकी प्रयासों को भी जटिल बना सकता है।
सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया कि इन वार्ताओं में प्रतिबंधों में व्यापक ढील देने के साथ-साथ कुछ विशिष्ट देशों—जैसे कि भारत—के लिए अधिक लक्षित विकल्पों पर भी चर्चा हो सकती है। इन विकल्पों के तहत, ये देश अमेरिकी दंड (जिसमें टैरिफ भी शामिल हैं) के डर के बिना रूस से तेल खरीद सकेंगे। पिछले हफ्ते, अमेरिका ने भारत को कुछ समय के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदने की इजाजत दी।
यह वह तेल था जो पहले से ही समुद्र में टैंकरों में मौजूद था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि भारत को पश्चिम एशिया से होने वाली तेल की सप्लाई में कटौती से निपटने में मदद मिल सके। क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि ट्रंप के साथ हुई बातचीत “काफी अहम” थी और “दोनों देशों के बीच आगे के काम के लिए इसका व्यावहारिक महत्व होने की संभावना है।”
उशाकोव ने कहा कि ट्रंप का मानना है कि “यूक्रेन में चल रहे संघर्ष का जल्द से जल्द अंत होना अमेरिका के हित में है, जिसके लिए युद्धविराम और एक लंबे समय तक चलने वाले समझौते की जरूरत है।” उन्होंने आगे कहा कि यूक्रेन में रूसी सैनिकों की बढ़ती बढ़त को देखते हुए कीव को इस संघर्ष को बातचीत के जरिए खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए।
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इजरायल और अमेरिका संयुक्त रूप से ईरान पर हमले कर रहा है। दोनों देश मिलकर इस्लामी गणराज्य पर मिसाइल दाग रही हैं। हालांकि, कुछ मिसाइलें ऐसी जगह गिरीं जहां उन्हें कभी नहीं गिरना चाहिए था। यह टारगेट है – दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में स्थित, शजरेह तय्येबह बालिका प्राथमिक विद्यालय। पूरी खबर पढ़ें…
