अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर से जोरदार हमला करने की धमकी दी। इसके बाद ईरान की टीम स्विटजरलैंड के शांति वार्ता स्थल से बाहर निकल गई है। ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल स्विटजरलैंड में शांति समझौते के मुद्दे पर बात कर रहा है।

अपने ट्रुथ सोशल पर बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कह दिया है कि अगर ईरान अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी (हिज्बुल्लाह) को काबू में नहीं रख पाता या नहीं रखना चाहता, तो अमेरिका क्षेत्रीय ताकतों को दरकिनार करके सीधे उस सोर्स पर हमला करेगा जहाँ से ये सब हो रहा है।

प्रतिनिधिमंडल वापस लौटा

रॉयटर्स ने ईरान की सेमी-ऑफिशियल तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया है कि ट्रंप की धमकी के कारण ईरान का प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड में बातचीत की जगह से चला गया है।

ट्रंप ने दी ईरान को धमकी

राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा, “ईरान को लेबनान में अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी को तुरंत गड़बड़ी फैलाने से रोकना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था, बल्कि उससे भी ज्यादा जोरदार।”

ट्रंप की यह चेतावनी राजनयिक प्रक्रिया के लिए एक नाजुक समय पर आई है। अमेरिकी और ईरानी अधिकारी इस महीने की शुरुआत में हस्ताक्षरित एक एमओयू के तहत स्विट्जरलैंड में बैठक कर रहे हैं, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, होर्मुज जलमार्ग, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और कई मोर्चों पर सीजफायर जैसे व्यापक वार्ताओं के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई है। समझौते में तनाव कम करने और अधिक स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के उद्देश्य से 60 दिनों की वार्ता का प्रावधान किया गया है।

लेबनान में सीजफायर पर सबकी निगाहें

ईरान, पाकिस्तान, कतर और अमेरिका के बीच हुई वार्ता के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ट्रंप सरकार ने लेबनान में सीजफायर बनाए रखने की कोशिशों में प्रगति की है। हालांकि उन्होंने माना कि स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।

जेडी वेंस ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में हमने लेबनान में सीजफायर को कायम रखने की कोशिश में प्रगति देकी है। इस तरह के सीजफायर हमेशा थोड़े अव्यवस्थित होते हैं।”

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा, ट्रंप व्यापक क्षेत्रीय सीजफायर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और लेबनान सीजफायर को समझौते की दिशा में एक अहम कदम मानते हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने वार्तो को मिडिल ईस्ट में संबंधों को नया रूप देने के अवसर बताया। साथ ही कहा कि अमेरिकी प्रशासन को उम्मीद है कि अगर ईरान उन नीतियों को छोड़ देता है जिन्हें अमेरिका अस्थिरता पैदा करने वाला मानता है तो ईऱान के साथ एक नई शुरुआत की जा सकती है।

ईरान क्या मांग कर रहा?

ईरान कई शर्तें पूरी होने तक वार्ता के अगले चरण में आगे बढ़ने के लिए नहीं मान रहा है। ईरान ने जोर दिया कि लेबनान पर इजरायल का हमला रुके तभी सार्थक वार्ता शुरू हो सके, विशेष रूप से उसका परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता।

ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ हाल ही में हुए समझौते के तहत आर्थिक लाभ की भी मांग की। उन्होंने लेबनान में संघर्ष रोकने में नाकाम होने पर अमेरिका को दोषी ठहराया। लेबनान में मार्च से ही इजरायल और हिज्बुल्लाह एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं।

हिज्बुल्लाह ईरान का सबसे शक्तिशाली सहयोगी है और इसे मिडिल ईस्ट में ईरान के सशस्त्र समूह के अगुवा माना जाता है। ईरान दशकों से इस संगठन को वित्तीय, सैन्य और राजनीतिक समर्थन देता रहा है।

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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के मुद्दे पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि स्विट्जरलैंड में ईरान के साथ हुई वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और इससे व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता के द्वार खुल सकते हैं। वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी टीम को कई मुद्दों के राजनयिक समाधान खोजने के लिए सशक्त बनाया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें