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भारतीय मूल के छात्र को अमेरिकी कोर्ट से राहत, समलैंगिक रूममेट की जासूसी के आरोप में है दोषी

रटजर्स यूनिवर्सिटी के एक पूर्व छात्र रवि को मार्च 2012 को 15 अपराधों का दोषी करार दिया गया।

Author न्यूयॉर्क | Updated: September 10, 2016 5:12 PM
Dharun Ravi, Indian Us Dharun Ravi, Tyler Clementi Suicide, New Jersey court, Dharun Ravi Tyler Clementiभारतीय मूल के छात्र धारुण रवि। (John Munson/The Star-Ledger via AP File)

अपने समलैंगिक रूममेट की जासूसी करने के दोषी करार दिए गए भारतीय मूल के छात्र धारुण रवि को एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। न्यू जर्सी की अपीली अदालत ने उसकी दोषसिद्धि को खारिज करते हुए नए सिरे से मामला चलाने का आदेश दिया है। रवि इस दोषसिद्धि के चलते 20 दिन जेल में बिता चुके हैं। उनके रूममेट ने बाद में आत्महत्या कर ली थी। शुक्रवार (9 सितंबर) को जारी 61 पन्ने के फैसले में नेवार्क स्थित सुपीरियर कोर्ट ऑफ न्यूजर्सी के अपीली विभाग ने कहा कि ज्यूरी ने रवि को जिस कानून के तहत, ‘पूर्वाग्रहों के चलते अपने रूममेट को डराने-धमकाने’ का दोषी करार दिया था, वह कानून बाद में ‘संवैधानिक रूप से निरस्त’ कर दिया गया।

रटजर्स यूनिवर्सिटी के एक पूर्व छात्र रवि को मार्च 2012 को 15 अपराधों का दोषी करार दिया गया। ये अपराध थे- पूर्वाग्रह के चलते डराने-धमकाने, निजता में दखल देने, अभियोजन बाधित करने और वेब कैम के जरिए अपने रूममेट टेलर क्लीमेंटी (18) और किसी अन्य युवक के बीच सितंबर 2010 में हुए यौनाचार की जासूसी से जुड़े साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के थे। इस घटना के कुछ ही दिन बाद क्लीमेंटी ने यहां पास में स्थित जॉर्ज वाशिंगटन पुल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।

रवि पर क्लीमेंटी की मौत की वजह बनने का आरोप नहीं लगाया गया था। रवि (24) को मिडलसेक्स काउंटी जेल में एक माह की सजा दी गई थी और उसे 20 दिन बाद जून 2016 में रिहा कर दिया गया था। उसके अच्छे व्यवहार को देखते हुए उसे सजा में पांच दिन की छूट दी गई थी। रवि को 10 साल कैद हो सकती थी। उसे तीन साल की परिवीक्षा की सजा सुनाई गई। इसके अलावा उसे 300 घंटे की सामुदायिक सेवा और 11 हजार डॉलर का का जुर्माना लगाया गया। रवि के वकील स्टीव अल्तमान ने वॉल स्ट्रीट जनरल को बताया कि वह अदालत के फैसले से खुश हैं।

उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि दोषसिद्धि का आधार और सरकार की ओर से किए गए मामले के प्रतिनिधित्व में गलती थी।’ उन्होंने कहा, ‘धारुण रवि ने जो कुछ भी किया, या नहीं किया, उसमें समलैंगिक लोगों से डरने की भावना का समावेश नहीं था।’ पूर्वाग्रह के आधार पर किसी को डराने-धमकाने के मुद्दे पर अब तक के अधिनियम का कहना था कि प्रतिवादियों को उक्त अपराध का दोषी ठहराया जा सकता है, यदि यह मानने का पर्याप्त आधार हो कि उनके पीड़ितों को उनकी नस्ल, रंग, लिंग, जातीयता, धार्मिक या लैंगिक रुझान के चलते प्रताड़ित किया गया या डराया-धमकाया गया।

हालांकि राज्य के उच्चतम न्यायालय ने एकमत से फैसला सुनाया कि 2001 का अधिनियम ‘असंवैधानिक रूप से अस्पष्ट’ है। इसके साथ ही न्यायालय ने पीड़ित की मानसिक स्थिति से जुड़ी तीसरी धारा को निरस्त कर दिया। फैसले में कहा गया था कि प्रतिवादी के इरादे और मानसिक स्थिति महत्वपूर्ण है न कि पीड़ित की।

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