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‘लश्कर जैसे संगठनों पर कार्रवाई करे पाकिस्तान, 600 देवबंदी मदरसों को भी बंद कर देना चाहिए’

हाउस फोरेन रिलेशंस कमेटी के अध्यक्ष ने कहा, ‘पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूहों पर कार्रवाई करने के साथ ऐसे परिसरों को भी बंद करने की जरूरत है।

Author वॉशिंगटन | March 3, 2017 6:25 PM
पाकिस्तान का झंडा लहराता हुआ। (फाइल फोटो)

अमेरिका के एक प्रभावशाली सांसद ने कहा है कि पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी समूहों पर कार्रवाई करनी चाहिए या फिर आतंकवादियों को मुकदमे के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरणों को सौंपना चाहिए ताकि न्याय मिल सके। वाशिंगटन के यूएस कैपिटोल में गुरुवार (2 मार्च) को नयी दिल्ली आधारित थिंक-टैंक ‘विवेकानंद इंटनेशनल फाउंडेशन’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य एड रॉयस ने कहा, ‘पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूहों पर कार्रवाई करने के साथ ऐसे परिसरों को भी बंद करने की जरूरत है। पाकिस्तान को यह समझने की आवश्यकता है कि अगर वह (पाकिस्तान) आतंकवादी हमलों के दोषियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाता है तो उसे इन दोषियों को हेग को सौंप देना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में उनके खिलाफ सुनवाई हो सके और न्याय दिया जा सके।’ उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपने 600 देवबंदी मदरसों को बंद करने के बारे में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी कांग्रेस और ट्रम्प प्रशासन को लगता है कि ऐसे स्कूल आतंकवादियों के पनपने का स्थल हैं।

प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के प्रमुख रॉयस ने कहा, ‘मेरे विचार में, ऐसी भावनाएं हैं कि पाकिस्तान को देवबंदी मदरसों को बंद करने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। ऐसे करीब 600 मदरसे हैं जहां से ऐसे लोग निकलते हैं जो जिहाद के पक्ष में दलीलें देने और उसे करने के सिवाय कुछ नहीं जानते।’ ‘कांग्रेशनल कॉकस ऑन इंडिया एंड इंडियन-अमेरिकंस’ के संस्थापक सदस्य रॉयस ने कहा कि कांग्रेस और नया प्रशासन कुछ नये मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। रॉयस ने कहा, ‘एक मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच 500 अरब डॉलर के व्यापार का है। इस दिशा में हम नीतियों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं… इसलिए हमें भारत के साथ एक प्रभावी द्विपक्षीय कारोबारी समझौते की जरूरत है। हम कारोबार को और उदार कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘साथ ही, यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका में रह रहे भारतीय अमेरिकी आबादी की आधी संख्या स्नातकोत्तर डिग्री रखती है और हम जानते हैं कि भारतीय-अमेरिकी लोगों का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।’ उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका को ‘कानून के नियम, लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और अपने धर्म का पालने करने की आजादी के बुनियादी मूल्यों’ पर अपनी नीतियां बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का नौंवा सबसे बड़ा कारोबारी सहयोगी है। अमेरिकी कांग्रेस सदस्य कहा कि बीते कई वर्षों में आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ा है और बीते एक दशक में रक्षा संबंधों में मजबूती आयी है।

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