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रक्षा राज्‍य मंत्री बोले- चीन की सीमा पर हालात संवेदनशील हैं

रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा, "आज हम अपने मुश्किल पड़ोस के साथ कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। एलएसी (चीन के साथ) पर हालात संवेदनशील हैं। गश्त, अतिक्रमण और सैन्य गतिरोध की घटनाएं बढ़ सकती हैं।"

Author नई दिल्ली | Published on: March 1, 2018 9:21 PM
रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे। (Source: Twitter)

रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने गुरुवार को कहा कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालात संवेदनशील हैं तथा यहां स्थिति ज्यादा गंभीर बनने की संभावना है। उन्होंने इस बात की भी आशंका जताई कि भारत के पड़ोस में अस्थिरता के कारण महाविनाश के अस्त्र (डब्ल्यूएमडी) का प्रसार होने की संभावना बढ़ गई है जोकि ऐसे लोगों (नॉन स्टेट एक्टर) के हाथ भी लग सकते हैं जिनका किसी भी देश के सरोकार से कोई मतलब नहीं है। यहां सेना के सालाना सम्मेलन में भामरे ने कहा, “आज हम अपने मुश्किल पड़ोस के साथ कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। एलएसी (चीन के साथ) पर हालात संवेदनशील हैं। गश्त, अतिक्रमण और सैन्य गतिरोध की घटनाएं बढ़ सकती हैं।”

उन्होंने कहा कि एलएसी की शुचिता बनाए रखने के लिए हमें सभी जरूरी कदम उठाने होंगे। बाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भामरे ने कहा, “एलएसी पर कई सारी बातें हो रही हैं। आप नहीं जान सकते कि इनमें से किस बात को लेकर मामला गंभीर हो सकता है।” इससे पहले सेमिनार में उन्होंने कहा कि परंपरागत खतरों के अलावा साइबर क्षेत्र में घात के अपरंपरागत खतरे भी हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए बढ़ते धार्मिक रूढ़िवाद का प्रसार चिंता का विषय है। पाकिस्तान इस्लामिक स्टेट (आईएस) विचारधारा को पूर्व की ओर फैलाने में एक वाहक की तरह कार्य कर रहा है।

दूसरी तरफ, भारत एवं चीन के बेहतर संबंधों के अध्ययन के लिए गठित इंडिया ग्लोबल सेंटर फॉर चाइनीज स्ट्डीज (आईजीसीसीएस) ने एक विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया जिसमें विशेषज्ञों ने सरकार, समाज और व्यापार के स्तर पर चीन को और अधिक गहराई से समझने पर जोर दिया। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित पैनल चर्चा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध प्रकाशन ‘ऑर्गनाईजर’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर एवं आईजीसीसीएस के निदेशक प्रसून शर्मा ने कहा, “हमें यानी भारत को सरकार, समाज और व्यापार जैसे तीन व्यापक एवं अलग-अलग स्तरों पर चीन को और अधिक गहराई में समझने की दरकार है।”

 

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