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फुकुशिमा संयंत्र से निकले ट्रिटियम को लेकर बहस

मार्च, 2011 में जापान के पूर्वोत्तर में आई सुनामी में फुकुशिमा संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गया था।

Author तोक्यो | April 12, 2016 11:20 PM
जापान का फुकुशिमा संयंत्र। (एपी फाइल फोटो)

जापान के फुकुशिमा में पांच साल पहले आई भारी सुनामी में क्षतिग्रस्त दाइची संयंत्र से निकले तत्त्व का निपटान किया जाए या नहीं, इसको लेकर जापान में सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह तत्त्व ट्रिटियम है। इस रेडियोधर्मी सामग्री को भारी मात्रा में जल से हटाना लगभग असंभव है। इस जल का उपयोग फुकुशिमा दाइची संयंत्र के पिघले हुए रिएक्टरों को ठंडा करने में किया गया था। उल्लेखनीय है कि मार्च, 2011 में जापान के पूर्वोत्तर में आई सुनामी में यह संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गया था। यह पानी अब भी जमा हो रहा है और रिएक्टरों को अत्यधिक ठंडा रखने के लिए प्रतिदिन 300 टन पानी की जरूरत अब भी पड़ती है। कुछ पानी रिसकर सागर में जा रहा है।

इस संयंत्र के आसपास भारी टैंक लगे हैं, जिनकी संख्या 1,000 है और प्रत्येक टैंक में सैकड़ों टन पानी है, जिनमें से रेडियोएक्टिव सेसियम और स्ट्रोनटियम हटाया जा चुका है, लेकिन ट्रिटियम नहीं हटाया जा सका है। अब प्रयोगशाला में पानी को ट्रिटियम मुक्त करने की कवायद की गई, लेकिन फुकुशिमा संयंत्र के लिए आवश्यकता को देखते हुए यह अत्यंत खर्चीला प्रयास है। वैसे भी यह संयंत्र प्रशांत तट पर है। वैज्ञानिकों का तर्क है कि ट्रिटियम वाले पानी को समुद्र में छोड़ने से खतरा न्यूनतम होगा। लेकिन ट्रिटियम वाला पानी प्रशांत महासागर में छोड़े जाने के उनके इस सुझाव पर जापान और अन्य जगहों पर आपत्ति जताई गई है।

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