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पाक में दो आतंकवादियों को फांसी

पाकिस्तान सरकार के सजा ए मौत पर से पाबंदी हटाने के बाद प्रशासन ने सेना मुख्यालय और पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ पर हमले के मामले में दोषी ठहराए गए दो आतंकवादियों को शुक्रवार रात फांसी पर लटका दिया। जबकि पेशावर हमले के बाद कबाइली इलाकों में जारी पाकिस्तानी फौज के अभियान में शुक्रवार को […]

Author December 20, 2014 12:21 PM

पाकिस्तान सरकार के सजा ए मौत पर से पाबंदी हटाने के बाद प्रशासन ने सेना मुख्यालय और पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ पर हमले के मामले में दोषी ठहराए गए दो आतंकवादियों को शुक्रवार रात फांसी पर लटका दिया। जबकि पेशावर हमले के बाद कबाइली इलाकों में जारी पाकिस्तानी फौज के अभियान में शुक्रवार को 67 आतंकवादी मारे गए। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार देश में आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए सैन्य अदालतें गठित करेगी।

शुक्रवार रात को फांसी पर लटकाए गए ये दोनों उन 17 आतंकवादियों में शामिल हैं जिन्हें प्रतिबंध हटाए जाने के बाद पहले चरण में फांसी की सजा दी जानी है। मंगलवार को पेशावर के स्कूल में तालिबान हमले में 132 बच्चों सहित 146 लोगों के मारे जाने के बाद प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मौत की सजा पर लगी पाबंदी हटाने का एलान किया था।
रावलपिंडी में 2009 में आर्मी जनरल हेडक्वाटर्स (जीएचक्यू) पर हमले के दौरान पकड़े गए अकील उर्फ डॉ. उस्मान को मौत की सजा सुनाई गई थी जबकि अरशद महमूद उर्फ मेहरबान को पूर्व राष्ट्रपति व सेना प्रमुख मुशर्रफ पर जानलेवा हमले के प्रयास के मामले में दोषी ठहराया गया था। जियो और दुनिया टीवी समेत प्रमुख निजी चैनलों ने रिपोर्टों में बताया है कि अकील और मेहमूद को स्थानीय समयानुसार रात नौ बजे फैसलाबाद जेल में फांसी पर लटका दिया गया। इससे पूर्व, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अकील के परिजनों ने फैसलाबाद जेल में उससे आखिरी बार मुलाकात की जहां उसे फांसी पर चढ़ाए जाने की तैयारियां हो रही थी। उसे फांसी पर चढ़ाने में कोई कानूनी अड़चन नहीं थी।

सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ ने सशस्त्र बलों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहे छह लोगों की मौत की सजा के वारंट पर हस्ताक्षर
किए थे। मेहमूद उन पांच लोगों में शामिल था जिन्हें 2003 में मुशर्रफ पर हमले के लिए मौत की सजा दी गई थी। मुशर्रफ इस हमले में बच गए थे लेकिन 15 अन्य लोग मारे गए थे। आने वाले दिनों में कई अन्य आतंकवादियों को फांसी पर लटकाया जाएगा। इनमें कोट लखपत जेल में बंद वे चार आतंकवादी भी शामिल हैं जिन्हें शनिवार को फांसी दिए जाने की संभावना है।

इस बीच, आतंकवादियों के खिलाफ अभियान तेज करते हुए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को देश भर में कम से कम 67 आतंकवादियों को मार गिराया। इससे पेशावर जनसंहार के बाद मारे गए आतंकवादियों की संख्या बढ़कर 124 हो गई है। सुरक्षा बलों ने खैबर घाटी में अफगान सीमा की ओर जा रहे आतंकवादियों को निशाना बनाया।
सेना ने एक बयान में बताया कि सुरक्षा बलों ने वुरमगाई और स्पुरकोट में आतंकियों पर घात लगा कर हमला किया और मुठभेड़ में 32 आतंकवादी मारे गए। तीन सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। वहीं, खैबर में एक तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने अन्य 18 आतंकवादियों को मार गिराया। इसके अलावा 10 और आतंकवादी बीती रात इसी कबाइली जिले में मारे गए। कराची की मुशर्रफ कालोनी में अर्द्धसैनिक बलों ने चार तालिबान आतंकवादियों को ढेर कर दिया जिनमें उनका कमांडर आबिद माचर शामिल है। पुलिस ने बताया कि पंजाब में गुजरात जिले के लाला मूसा इलाके में दो आतंकवादी मारे गए। फ्रंटियर कोर सैनिकों के प्रवक्ता ने बताया कि एक आतंकवादी बलूचिस्तान के जियारत जिले में मारा गया।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने डॉन न्यूज टीवी के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि सरकार आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए सैन्य अदालतें गठित करेगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला आतंकवादियों के खिलाफ मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के मकसद से की गई है क्योंकि आतंकवादी दोषसिद्धि में वर्षों तक देरी करने के लिए पारंपरिक अदालतों का बेजा फायदा उठाते हैं। उन्होंने कहा कि संदिग्ध आतंकवादियों पर सुनवाई के लिए सैन्य अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मौत की सजा पर लगी रोक हटाने का फैसला सोचसमझ कर किया है।

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