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राफेल को रिप्लेस करने की तैयारी में दसॉल्ट एविएशन, इस कंपनी के साथ मिलकर बनाने जा रही दुनिया का बेस्ट लड़ाकू विमान

फ्रांस की विमान बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन अपने लड़ाकू विमान राफेल को नेक्स्ट जेनरेशन के फाइटर जेट से रिप्लेस करने जा रही है। कंपनी ने नए विमान के निर्माण के लिए एयरबस के साथ हाथ मिलाया है।

Author नई दिल्ली | June 20, 2019 10:46 AM
राफेल की जगह साल 2026 में इस नए विमान का प्रोटोटाइप पेश किया जाएगा। (फाइल फोटो)

फ्रांस की विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन अपने एडवांस फाइटर प्लेन राफेल को रिप्लेस करने जा रही है। कंपनी राफेल के स्थान पर अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का निर्माण करेगी। कंपनी ने इसके लिए एयरबस के साथ हाथ मिलाया है। नया विमान राफेल के साथ ही जर्मनी के यूरोफाइटर लड़ाकू विमान की जगह लेगा।

दसॉल्ट एविएशन और एयरबस के यह विमान साल 2040 तक आसमान में उड़ान भरना शुरू कर देगा। इस संबंध में फ्रांस, जर्मनी और स्पेन ने पेरिस एयरशो के दौरान एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके पीछे फ्रांस की राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों की अहम भूमिका रही।

फ्रांस और जर्मनी ने साल 2026 तक नए लड़ाकू विमान का प्रोटोटाइप पेश करने का लक्ष्य तय किया है। इस परियोजना पर फ्रांस और जर्मनी की सरकार की तरफ से 4.5 अरब डॉलर का निवेश किए जाने का अनुमान है। फ्रांसीसी रक्षा विभाग के अनुसार फ्रांस की तरफ से इसमें 2.5 अरब यूरो का निवेश किया जाएगा।

फ्रांस का सैफरन और जर्मनी का एमटीयू एयरो इंजिंस मिलकर नए युद्धक विमान के लिए इंजन तैयार करेंगे। जर्मनी के रक्षा मंत्री उर्सूला वोन जर लेयेन ने कहा कि ये प्रोजेक्ट यूरोपीय डिफेंस इंडस्ट्रीज को मजबूत करेगा। साथ ही कंपनियों को नए अत्याधुनिक रिसर्च का मौका भी उपलब्ध कराएगा।

इसके साथ ही यूरोपीय रक्षा सहयोग भी मजबूत होगा। फ्रांस, ब्रिटेन के साथ इस परियोजना पर काम करने की संभावनाओं को तलाश रहा था। इसका उद्देश्य यूरोप की दो बड़ी सैन्य शक्तियों को एकसाथ लाना था। जुलाई 2017 में मैक्रों और जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने नए फ्यूचर कॉम्बेट एयर सिस्टम के प्लान की घोषणा की थी। इसमें फाइटर जेट के साथ ही ड्रोन जैसे एसोसिएटेड वेपन्स भी शामिल थे।

मालूम हो कि इससे पहले भारत सरकार ने अपने वायुसेना के बेडे़ के मजबूती देने के लिए फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया है। हालांकि, भारत में इस सौदे में दलाली के आरोप को लेकर काफी हंगामा मचा था। भारत में इस सौदे में फ्रांसीसी कंपनी की तरफ से उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी के अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे।

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