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डार्नेला फ्रेजियर : नागरिक पत्रकारिता का पहला पुलित्जर पाने वाली किशोरी

अमेरिका की 18 साल की डार्नेला ने ही जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हुई हत्या का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था।

डार्नेला फ्रेजियर। फाइल फोटो।

अमेरिका की 18 साल की डार्नेला ने ही जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हुई हत्या का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था। उस वीडियो को साक्ष्य मान हाल में अदालत ने फैसला सुनाया। उस काम का संज्ञान लेते हुए पुलित्जर अवॉर्ड्स ने उन्हें खास पुरस्कार देने की घोषणा की है। वह दुनियाभर में चर्चित हो चुकी है और लोग उसे जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हुई निर्मम हत्या का वीडियो बनाने वाली साहसी लड़की के तौर पर जानते हैं।

डार्नेला फ्रेजियर का कहना है, ‘मैं एक ऐसी लड़की के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती हूं, जो बाकी सबकी तरह अपनी जिंदगी गुजारना चाहती है।’ फ्रेजियर की यह टिप्पणी अमेरिकी समाज में फैले रंगभेद की बेरहम सच्चाई को बड़ी मासूमियत से बयान करती है, ठीक उसी तरह जैसे 25 मई 2020 को उसके द्वारा बनाए गए चंद मिनट के एक वीडियो ने अश्वेतों के खिलाफ व्यवस्थागत रंगभेद और पुलिस की ज्यादती को बेनकाब किया था। इस घटना के विरोध में अमेरिका के कई शहरों में आंदोलन और दंगे हुए तथा ‘ब्लैक लाइव्ज मैटर’ के नारे के साथ अश्वेतों को भी बराबरी के अधिकार दिए जाने की एक बार फिर पुरजोर वकालत की गई। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान इस वीडियो को ठोस साक्ष्य माना गया और इसकी वजह से संबद्ध पुलिस अधिकारी को तीन आरोपों में दोषी ठहराया गया।

हालांकि मुकदमे के फैसले के बाद 20 अप्रैल 2021 को फ्रेजियर ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘मेरा दिल जॉर्ज फ्लायड के परिवार के साथ है। हालांकि कोई भी दोषसिद्धि किसी अपने को वापस नहीं ला सकती, लेकिन न्याय हुआ और हत्यारे को अब अपने किए की कीमत चुकानी होगी।’
अमेरिका के मिनियापोलिस में हुई इस घटना के समय फ्रेजियर 17 साल की थी। वह किसी काम से अपने घर से बाहर निकली तो उसने एक पुलिसवाले को मामूली धोखाधड़ी के आरोप में 46 वर्षीय फ्लॉयड को पकड़कर जमीन पर पटकते और फिर उसकी गर्दन पर अपना घुटना रखकर उसकी जान लेते हुए देखा। फ्रेजियर ने आठ मिनट के इस घटनाक्रम को अपने फोन में रिकॉर्ड कर लिया।

फ्रेजियर का कहना है कि इस हादसे को अपनी आंखों से देखने के बाद वह कई दिन तक परेशान रही। सांस लेने के लिए तड़पते जॉर्ज फ्लॉयड में कभी उसे अपने पिता नजर आते तो कभी अपने भाई। फ्रेजियर को इस बात का दुख था कि वह आगे बढ़कर फ्लॉयड की मदद नहीं कर पाई। वह कहती है, ‘मैंने कई रातें जॉर्ज फ्लॉयड से माफी मांगते हुए गुजारी हैं क्योंकि मैंने आगे बढ़कर हस्तक्षेप नहीं किया और उसकी जान नहीं बचाई।’ डार्नेला के बनाए वीडियो से इतिहास बदल गया। डार्नेला के इस कार्य के लिए पुलित्जर अवॉर्ड्स ने उन्हें एक खास पुरस्कार देने की घोषणा की है। आम तौर पर पत्रकारिता के लिए 1917 से दिए जा रहे इन पुरस्कारों के निर्णायक मंडल ने यह माना कि डार्नेला ने इस बर्बर घटना को अपने फोन के कैमरे से रिकॉर्ड कर एक नागरिक पत्रकार (सिटीजन रिपोर्टर) का फर्ज निभाया। पुलित्जर बोर्ड ने कहा, ‘उनकी कोशिश के कारण ही दुनिया का ध्यान इस मुद्दे पर गया।’

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