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Dalai Lama: कौन बनेगा अगला दलाई लामा? जापान ने कही चीन को ‘मिर्च’ लगने वाली बात

Dalai Lama: जापानी बौद्ध सम्मेलन में कहा गया कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी की चयन प्रक्रिया से चीन को दूर रहना चाहिए।

Dalai Lama: कौन बनेगा अगला दलाई लामा? जापान ने कही चीन को ‘मिर्च’ लगने वाली बात
Dalai Lama: तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा (फोटो सोर्स: Twitter / @DalaiLama)

Dalai Lama: पूरी दुनिया जानना चाहती है कि अगला दलाई लामा (Dalai Lama) कौन होगा। चीन पर लगातार अगले दलाई लामा को चुनने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के आरोप लग रह रहे हैं। अब जापान की तरफ से एक ऐसी बात कही गई है जो चीन को चुभ सकती है।

वर्ल्ड फेडरेशन के लिए जापानी बौद्ध सम्मेलन में यह साफ तौर पर कहा गया है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन से चीन को दूर रहना चाहिए और तिब्बती लोगों को अपने संस्कृति और इतिहास के हिसाब से चुनने देना चाहिए।

बता दें, विश्व महासंघ के लिए जापान बौद्ध सम्मेलन एक छत्र संगठन है जो जापान और अन्य देशों में लाखों अनुयायियों के साथ जापानी बौद्ध धर्म के कई संप्रदायों को एक साथ लाता है। पत्र में तिब्बत के धार्मिक और आध्यात्मिक मामलों में चीन के निरंतर हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।

87 साल के हो चुके दलाई लामा

6 जुलाई, 2022 को दलाई लामा 87 वर्ष के हो गए। उनके भावी उत्तराधिकारी का मुद्दा धीरे-धीरे दुनिया भरमें ध्यान आकर्षित कर रहा है। जापान के भिक्षुओं का मानना है कि तिब्बती लोगों बौद्ध संस्कृति और इतिहास के आधार पर फैसला करना चाहिए। वर्ल्ड फेडरेशन के लिए जापान बौद्ध सम्मेलन के महासचिव श्रद्धेय इहिरो मिज़ुतानी ने पत्र में कहा कि चीन की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

‘जिनके पास धार्मिक मूल्य नहीं, उन्हें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए’

वर्ल्ड फेडरेशन के लिए जापान बौद्ध सम्मेलन के पत्र में कहा गया है कि धर्म से संबंधित मामले धार्मिक मूल्यों के अनुरूप होने चाहिए, इसलिए जिन लोगों के पास धार्मिक मूल्य नहीं हैं, उन्हें ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यह धार्मिक आस्था (विश्वास) की स्वतंत्रता को महत्व देता है।
जापान, भारत और तिब्बतियों के संबंध बौद्ध धर्म से जुड़े हुए हैं, जो मजबूत इतिहास के साथ एशिया के प्रमुख विश्व धर्मों में से एक है।

5वीं शताब्दी ईसा पूर्व भारत में आया बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म भारत में 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में आया। जो उपमहाद्वीप के प्रमुख धर्मों में से एक था। हालांकि, यह धीरे-धीरे भारत में गिरावट देखी गई, लेकिन आज के वक्त में बौद्ध धर्म जनसंख्या न के बराबर है। इसके बावजूद, बौद्ध धर्म भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है और भारतीय संस्कृति में एक अपनी अलग पहचान रखता है।

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First published on: 21-01-2023 at 04:13:27 pm
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