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दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा के खिलाफ चीनी मीडिया की भारत को चेतावनी

लेख में कहा गया, ‘दलाई लामा को विवादित क्षेत्र की यात्रा करने की अनुमति देने से अनिवार्य रूप से टकराव उत्पन्न होगा।'

Author बीजिंग | March 6, 2017 4:35 PM
Dalai Lama, China, Serious Crime, World Leaders, China Warns, Meeting with Dalai Lama, Meeting with Dalai Lama is a Serious Crime, China Warns World, Zhang Yijiong, Zhang Yijiong Statement, International News, Jansattaतिब्बती बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा। (फाइल फोटो)

चीनी मीडिया ने भारत पर दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव से निपटने के लिए दलाई लामा कार्ड का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है और अरुणाचल प्रदेश में ‘विवादित’ क्षेत्र में तिब्बती आध्यात्मिक नेता की मेजबानी करने पर नई दिल्ली को ‘गंभीर परिणाम’ की चेतावनी दी है। सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में कहा, ‘चीन की आपत्तियों के बावजूद भारत आने वाले हफ्तों में चीन-भारत सीमा पर एक विवादित क्षेत्र में दलाई लामा की मेजबानी करेगा।’ इस टिप्पणी से पहले चीनी विदेश मंत्री ने दलाई लामा को अरुणाचल प्रदेश की यात्रा की अनुमति देने के लिए भारत की आलोचना की थी जिसे बीजिंग दक्षिणी तिब्बत होने का दावा करता है।

यात्रा की अनुमति पिछले वर्ष अक्तूबर में दी गई थी और संभावना है कि दलाई लामा आने वाले हफ्तों में क्षेत्र का दौरा करेंगे। भारतीय अधिकारियों की उन कथित टिप्पणियों का जिक्र करते हुये कि यह एक धार्मिक यात्रा है और इससे पहले दलाई लामा ऐसी कई यात्राएं कर चुके हैं, लेख में कहा गया है कि अधिकारयिों को इसके परिणाम का एहसास नहीं है। लेख में कहा गया, ‘या तो इन भारतीय अधिकारियों को दलाई लामा की यात्रा के गंभीर परिणाम का एहसास नहीं है या फिर उन्होंने जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया है।’ इसमें कहा गया, ‘14 वें दलाई लामा किसी भी तरह से एक आध्यात्मिक नेता नहीं बल्कि एक तिब्बती अलगाववादी हैं।’

लेख में कहा गया, ‘दलाई लामा को विवादित क्षेत्र की यात्रा करने की अनुमति देने से अनिवार्य रूप से टकराव उत्पन्न होगा, क्षेत्र की स्थिरता कमजोर होगी और भारत-चीन संबंधों में खटास पैदा होगी।’ इसमें कहा गया, ‘लंबे समय से कुछ भारतीयों ने दलाई लामा को रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में देखा है। वे मानते हैं कि भारत दलाई मुद्दे का इस्तेमाल कर कई लाभ हासिल कर सकता है। उदाहरण के लिए, दलाई लामा मुद्दे को दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव से निपटने के लिए एक कूटनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कहा गया, ‘लेकिन वे अपने मूल हितों की रक्षा करने की चीन की प्रतिबद्धता को कम आंकने के साथ ही दलाई लामा और उनके समूह का कुछ ज्यादा ही राजनीतिक मोल लगा लेते हैं।’

भविष्य में दलाई लामा को आमंत्रित नहीं करने के मंगोलिया के हाल के निर्णय की ओर संकेत करते हुये लेख में कहा गया, ‘इस बात का एहसास होने पर कि दलाई लामा कार्ड अप्रभावी है, हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में पश्चिमी नेताओं ने दलाई लामा के लिए दरवाजे बंद कर दिये हैं।’ इसमें कहा गया, ‘ऐसे समय में जब द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए भारत-चीन वार्ता आयोजित की गयी है, विवादित क्षेत्र में दलाई लामा की मेजबानी करने का निर्णय समझदारी नहीं है।’ इसमें कहा गया, ‘हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में आई गति को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। भविष्य में, सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के लिए बहुत अधिक संभावनाएं हैं।’

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