क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में कहा कि उनके देश के विश्वविद्यालयों में वर्ष 1876 से संस्कृत भाषा की पढ़ाई हो रही है। उन्होंने भारत और क्रोएशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए यह बात कही।
डीयू द्वारा जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री प्लेनकोविक ने ‘महाद्वीपों को जोड़ना: एक जुड़े हुए विश्व में क्रोएशिया और भारत’ विषय पर व्याख्यान दिया। डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में भारत में क्रोएशिया के राजदूत पीटर ल्युबिकिक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
अब क्रोएशिया के प्रधानमंत्री जिस संस्कृत भाषा का जिक्र कर रहे हैं, उसका महत्व पूरी दुनिया भी समझती है। अमेरिका के प्रसिद्ध लेखक, इतिहाकार एवं दार्शनिक विलियम जेम्स डुरांट की किताब ‘द स्टोरी आफ सिविलाइजेशन’ में बड़ी साफगोई से काफी कुछ लिखा गया है। इसकी कुछ पंक्तियां सच्चाई दर्शाती हैं, ‘भारत से ही हमारी सभ्यता की उत्पत्ति हुई थी। संस्कृत सभी यूरोपीय भाषाओं की मां है। हमारा समूचा दर्शन संस्कृत से उपजा है। हमारा गणित इसकी देन है। लोकतंत्र और स्वशासन भी भारत से ही उपजा है।’
भारत में भी यूनिवर्सिटी अब संस्कृत भाषा को बढ़ावा दे रही हैं, लोग भी आगे आकर इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई संबोधनों में संस्कृत भाषा का जिक्र किया है, उन्होंने इसे ना सिर्फ भारत की संस्कृति बताया है बल्कि सभी भाषाओं का आधार भी कहा है। अब इसी कड़ी में जब क्रोएशिया ने भी संस्कृत भाषा को लेकर बड़ा बयान दे दिया है, जानकार इसे एक बड़ी जीत के तौर पर देखते हैं, वे इसे भारत की संस्कृति के लिए सकारात्मक प्रभाव मानते हैं।
