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आदमी ही नहीं, केकड़े और मछलियों का भी कोविड टेस्‍ट करा रहा चीन, नई रिसर्च में डिमेंशिया और ब्रेन फॉग के बारे में बड़ा खुलासा

China Covid Test: चीन के तटीय शहर ज़ियामेन में मछुआरों के साथ उनके द्वारा पकड़ी गई मछलियों का भी कोविड टेस्ट हो रहा है। टेस्ट के बाद ही उनको शहर में ले जाने की अनुमति मिल रही है।

आदमी ही नहीं, केकड़े और मछलियों का भी कोविड टेस्‍ट करा रहा चीन, नई रिसर्च में डिमेंशिया और ब्रेन फॉग के बारे में बड़ा खुलासा
केकड़े और मछलियों का कोविड टेस्‍ट करा रहा चीन (photo source- screengrab/ @SCMPNews)

China Covid Test: कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच चीन में महामारी के डर से इंसानों के साथ-साथ जानवरों का भी कोविड टेस्ट (Covid Test) किया जा रहा है। चीन के जियामेन (Xiamen) शहर का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों को समुद्र से पकड़ी गई मछलियों का टेस्ट करने के लिए उनका सैंपल लेते हुए देखा जा सकता है।

दरअसल, चीन के जियामेन शहर में कोरोना के मामले बढ़ने के बाद पांच मिलियन से ज्यादा लोगों को कोविड-19 टेस्ट कराने का आदेश दिया गया था। जिसके बाद अब इंसानों के साथ-साथ यहां जानवरों का भी कोविड टेस्ट किया जा रहा है। एक आधिकारिक नोटिस में कहा गया है कि नए कोविड टेस्टिंग अभियान में समुद्री जीवों का भी टेस्ट कराया जाएगा। अधिकारियों ने वायरस से बचाव के लिए सी फूड की टेस्टिंग भी शुरू की है।

समुद्री जीवों का भी हो रहा टेस्ट: हाल ही में ज़ियामेन की जिमी समुद्री महामारी नियंत्रण जिला समिति ने एक नोटिस जारी करते हुए कहा कि मछुआरों के बंदरगाहों पर वापस लौटने पर मछुआरे और उनके सी फूड दोनों का कोविड टेस्ट किया जाना चाहिए। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए जिसमें चिकित्साकर्मियों को जिंदा मछलियों और केकड़ों का कोविड-19 टेस्ट करते हुए देखा गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने पीपीई किट पहनी और मछलियों के मुंह और केकड़ों के शेल के अंदर स्वाब डालकर टेस्टिंग की।

वहीं, दूसरी ओर एक स्टडी के अनुसार, COVID-19 से उबरने वाले लोगों में ब्रेन फॉग और डिमेंशिया भी बढ़ रहा है। गुरुवार (18 अगस्त) को प्रकाशित रिसर्च से पता चलता है कि दूसरे श्वसन संक्रमणों की तुलना में इस तरह की न्यूरोलॉजिकल और मनोरोग स्थितियां कोरोना संक्रमण के बाद दो साल तक समान्यतः रहती हैं।

एंजाइटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ा: रिसर्चर्स ने पाया कि कोरोना संक्रमण के बाद लोगों में एंजाइटी और डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ते हुए पाया। हालांकि, यह संक्रमण के दो महीने के अंदर कम हो जाता है। स्काई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, द लैंसेट साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी के लिए दो साल की अवधि के दौरान एक लाख से अधिक रोगियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड से एकत्र किए गए न्यूरोलॉजिकल और मनोरोग के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इनमें से ज्यादातर मरीज अमेरिका से थे।

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