COP23 Bonn Summit, preparations for the climate change conference, climate village near ryne river, 6-17 november COP23 - 23वां जलवायु सम्मेलन: राइन नदी किनारे बना विशाल तंबू वाला क्लाइमेट विलेज, साइकिल-कार्बन न्यूट्रल बस का इंतजाम - Jansatta
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23वां बॉन जलवायु सम्मेलन: राइन नदी किनारे बना विशाल तंबू वाला क्लाइमेट विलेज, साइकिल-कार्बन न्यूट्रल बस का इंतजाम

यह र‍िपोर्ट जनसत्‍ता अॉनलाइन के ल‍िए डॉयचेवेले ह‍िंदी (ड‍िज‍िटल) के अशोक कुमार ने तैयार की है।

बॉन में 23वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में आने वाले प्रतिनिधियों के स्वागत में लगा बैनर।

अशोक कुमार (बॉन, जर्मनी)

जर्मनी का शहर बॉन 23वें जलवायु सम्मेलन की मेजबानी करने को पूरी तरह से तैयार है। 6 से 17 नवंबर तक चलने वाले कॉप23 सम्मेलन के कारण पूरी दुनिया की नजरें बॉन पर टिकी रहेंगी। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से 20 से 25 हजार लोग इस सम्मेलन में आएंगे और पर्यावरण को बचाने की विश्व व्यापी कोशिशों को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। इनमें न सिर्फ दुनिया भर की सरकारों के प्रतिनिधि होंगे बल्कि 500 से ज्यादा गैर सरकारी संगठनों के लोग भी शामिल होंगे। यही नहीं, एक हजार पत्रकार भी इस आयोजन की कवरेज के लिए बॉन में होंगे।

सम्मेलन के लिए बॉन में महीनों से तैयारियां चल रही थीं। सम्मेलन का मुख्य केंद्र राइन नदी के किनारे संयुक्त राष्ट्र की इमारत के आसपास होगा। हालांकि शहर के दूसरे हिस्सों में आयोजन स्थल तैयार किये गये हैं। बॉन के विशाल राइनाऊ पार्क में तंबुओं वाला एक बहुत बड़ा परिसर तैयार किया गया है। इन तंबुओं में बिजली, इंटरनेट और हीटिंग तक, सब सुविधाएं हैं। दो हजार लोग हफ्तों से लगे थे ताकि सब कुछ समय पर तैयार हो सके।

जर्मनी के बॉन शहर में राइन नदी के किनारे तंबुओं वाला क्लाइमेट विलेज बनाया गया है।

सम्मेलन के दौरान बॉन क्लाइमेट कैंपस में तब्दील कर दिया जाएगा जिसके दो हिस्से होंगे। पहला बॉन जोन और दूसरा बुला जोन। बुला जोन में जहां सरकार के प्रतिनिधियों की वार्ताएं होंगी, वहीं राइनआऊ पार्क में बनाये गये बॉन जोन में पर्यावरण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम होंगे। बुला का अर्थ फिजी की भाषा में स्वागत है। यह सम्मेलन भले ही बॉन में हो रहा है, लेकिन इसका आधिकारिक मेजबान फिजी ही है।

बॉन जोन में अलग-अलग देशों के पवैलियन तैयार किये गये हैं जिनमें वे देश दिखा सकते हैं कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उनके यहां क्या क्या पहल हो रही हैं। सम्मेलन में भारत एक अहम भागीदार देश है। पेरिस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्रिय भागीदारी की थी और बढ़ते तापमान को रोकने लिए हर संभव प्रयास करने का वादा किया था। अपने बड़े पैवेलियन में वह इसके लिए उठाये जा रहे कदमों को शोकेस करेगा।

सम्मेलन के दौरान पूरा शहर पर्यावरण के रंग में रंगा होगा। बॉन के भारतीय मूल के मेयर अशोक श्रीधर ने शहर के सभी बाशिंदों के घर चिट्ठी भेजकर इस आयोजन में शामिल होने और इसे सफल बनाने की गुजारिश की है। स्कूलों में बच्चे भी इस सम्मेलन के लिए खास तैयारियां कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि तीन लाख की आबादी वाले बॉन शहर में एक साथ 20 से 25 हजार लोगों के आ जाने से उन्हें रखने और परिवहन सुविधाओं पर दबाव बढ़ सकता है। वैसे आयोजकों की कोशिश है कि जलवायु सम्मेलन ज्यादा से ज्यादा क्लाइमेंट फ्रेंडली हो। इसके लिए बड़ी संख्या में साइकिलों का इंतजाम भी किया गया है। इसके अलावा, कार्बन न्यूट्रल बसें भी चलायी जा रही हैं। आयोजक चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग सार्वजनिक परिवहन का ही इस्तेमाल करें क्योंकि सम्मेलन स्थल के पास कारों की पार्किंग के लिए ज्यादा जगह नहीं है।

सम्मेलन के लिए एक विशाल कैंटीन बनायी गयी है जिसमें एक साथ 1500 लोग खाना खा सकते हैं। इस कैंटीन में बनने वाले खाने में जैविक सामग्री इस्तेमाल करने पर जोर दे रहे हैं। शाकाहारी खाने को खास तौर से प्राथमिकता दी जाएगी। बॉन के लगभग सभी होटल फुल हैं। सम्मेलन में आने वाले कई लोगों को बॉन से पास कोलोन और कोबलेंस जैसे शहरों में ठहराया गया है।

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