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अमेरिका में बोले राहुल गांधी- युवाओं को नौकरी नहीं दे सकी कांग्रेस, इसलिए नरेन्द्र मोदी को मिली सत्ता

राहुल गांधी के भाषण को सुनने पहुंचे एक शख्स ने कहा, 'ज्यादातार नेता साठ गांठ, गठबंधन और सरकार बनाने के बारे में बात करते हैं, लेकिन हमनें नीतियों के मुद्दे पर उनकी बातों में विजन देखा।

राहुल ने कहा कि हम अपनी सबसे बहुमूल्य संपत्ति को नहीं खो सकते।

अमेरिका में राहुल गांधी के विचारों को सुनने गये पॉलिसी एक्सपर्ट, डिप्लोमैट और सिविल सोसायटी के प्रबुद्ध व्यक्तियों के मन में हर बार की तरह इस बार भी यही उम्मीद थी कि कांग्रेस उपाध्यक्ष का भाषण पहले की तरह ही होगा। लेकिन इस बार राहुल के कार्यक्रम से लौटे लोगों की धारणा बदली हुई थी। राहुल गांधी अपने इस अमेरिकी दौरे में कांग्रेस की कमियां भी स्वीकार कर रहे है और भविष्य के लिए अपनी रणनीति भी गिना रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक राहुल गांधी के भाषण पर नजर रखने वाले डिप्लोमैट, रणनीतिकार और पॉलिसी एक्सपर्ट इस बार कांग्रेस उपाध्यक्ष के भाषण से प्रभावित हैं। बुधवार (20 सितंबर) प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में राहुल अपने संबोधन में बेबाक नजर आए। राहुल ने छात्रों के साथ बातचीत में स्वीकार किया कि मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को भारत में सत्ता इसलिए मिली क्योंकि लोग कांग्रेस पार्टी से बेरोजगारी के मुद्दे पर नाराज थे। राहुल ने कहा, ‘ दुनिया में बेरोजगारी से लोग परेशान हैं और इसीलिए नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं को लोगों ने चुना।’ हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी भारत में इस समस्या के लिए पर्याप्त मात्रा में काम नहीं कर रहे हैं।

सोमवार को राहुल को सुनने पहुंचे एक शख्स ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा, ‘मैं उन्हें जानता हूं, कुछ दिनों से उन पर मेरी नजर है लेकिन इस बार वो बदले बदले दिखे।’ हालांकि इस शख्स ने अपना नाम नहीं बताया क्योंकि राहुल गांधी के साथ उनकी ये एक निजी मुलाकात थी। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने शानदार तरीके से अपनी बात रखी, और अपनी बातों को प्रभावी तरीकों से रखा। राहुल गांधी ने रोजगार के एजेंडे पर कहा कि इसका मतलब राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में लोगों को सशक्त करना और शामिल करना है। गांधी ने छात्रों से कहा, ‘‘मैं सोचता हूं, मोदी के उभार का मुख्य कारण और ट्रंप के सत्ता में आने की वजह, अमेरिका और भारत में रोजगार का प्रश्न होना है। हमारी बड़ी आबादी के पास कोई नौकरी नहीं है और वह अपना भविष्य नहीं देख सकते हैं। और इसलिए वह परेशान हैं, और उन्होंने इस तरह के नेताओं को समर्थन दिया है।’’  बता दें कि राहुल गांधी इमेज मेकओवर के एक बड़े एक्सरसाइज पर अमेरिका की यात्रा पर है। दो हफ्ते की इस यात्रा में राहुल गांधी भारत अमेरिका से जुड़े कई थिंक टैंक, विश्वविद्यालयों, बिजनेस क्लास और छात्रों से मिल रहे हैं।

अमेरिका के प्रिंसटन विश्वविद्यालय में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने चीन से भारत के संबंधों पर खुलकर बोला। राहुल ने कहा कि भारत और चीन के प्रदर्शन से यह निर्धारित होगा कि दुनिया आधारभूत रूप से किस तरह नया रूप लेगी। राहुल गांधी ने कहा, ‘‘बड़ी संख्या में दो तरह का प्रवास हो रहा है – पहला पूरी तरह स्वतंत्र है और दूसरा पूर्णत: नियंत्रित। प्रशासन का ताना बाना इससे अलग-अलग तरीके से निपटता है। भारत और चीन दो बड़े देश हैं जो खेती करने वाले देशों से आधुनिक शहरी मॉडल देश बन रहे हैं और यह विश्व जनसंख्या का बड़ा हिस्सा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कैसे ये दोनों देश मूल रूप से दुनिया को नया आकार देने जा रहे हैं। मुझे यह नहीं कहना कि चीन लोकतांत्रिक है या नहीं। उन्होंने अपना रास्ता चुना है और हमने अपना रास्ता चुना है।’’ गांधी ने कहा, ‘‘दुनिया के दो सबसे बड़ी आबादी वाले देशों के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा है। हमें यह देखना है कि कैसे हम रोजगार लाएं। असल में हमें चीन से मुकाबला करना है।’’ उन्होंने कहा कि भारत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है। बता दें कि जब भारत का चीन से डोकलाम मुद्दे पर विवाद चल रहा था उस दौरान राहुल गांधी भारत में चीन के राजदूत लुओ जाहुओई से मुलाकात की थी।

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