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2500 साले पहले भारत में होती थी प्‍लास्टिक सर्जरी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने भी माना

सुश्रुत संहिता में 1100 से अधिक रोगों के इलाज, सैंकड़ो औषधीय पौधों के उपयोग और सर्जरी के लिए निर्देश दिए गए हैं। इस सर्जरी में तीन तरह के स्कीन ग्राफ्ट और नाक के पुननिर्माण के बारे में लिखा है।

चीन के शंघाई टाइम प्लास्टिक सर्जरी अस्पताल में डॉक्टर से बात करती मरीज। (Pic: LATimes)

हाल ही में देश के चर्चित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में 106वें इंडियन सायंस कांग्रेस का आयोजन किया गया था। इस कांग्रेस में शामिल होने आए शोधकर्ताओं ने एक से बढ़कर एक दावे किए। कॉन्क्लेव के दौरान यह भी कहा गया, “भारत डायनासोर के प्रजनन का मुख्य जगह था, जिसकी उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा द्वारा की गई थी। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि कौरव टेस्ट ट्यूब बेबी थे। रावण के पास एक बैलेस्टिक मिसाइल था।” पूरे देश में इन बातों पर लंबी बहस हुई। इन सब के बीच कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने यह माना है कि भारत में 2500 साल पहले प्लास्टिक सर्जरी होती थी। औषधीय पौधों की मदद से इलाज होता है। जिन लोगों के नाक काट दिए जाते थे, उनके चेहरे पर फिर से सर्जरी के माध्यम से नाक को जोड़ा जाता था।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के इरविंग मेडिकल सेंटर, जो कि प्लास्टिक सर्जरी के मामलों को देखते हैं, की वेबसाइट columbiasurgery.org पर प्रकाशित एक लेख के अनुसार, भारत में 2500 साल पहले प्लास्टिक सर्जरी होती थी। आइवी लीग विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार, “आज से करीब 2500 साल पहले 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान एक भारतीय चिकित्सक जिनका नाम सुश्रुत था, ने दुनिया के दवा और सर्जरी पर सबसे पुराने कामों के बारे में लिखा था। सुश्रुत को भारत में ‘शल्य चिकित्सा के जनक’ के रूप में भी जाना जाता है।”

लेख के अनुसार, “सुश्रुत संहिता में 1100 से अधिक रोगों के इलाज, सैंकड़ो औषधीय पौधों के उपयोग और सर्जरी के लिए निर्देश दिए गए हैं। इस सर्जरी में तीन तरह के स्कीन ग्राफ्ट और नाक के पुननिर्माण के बारे में लिखा है। सुश्रुत ग्रंथ में सिर के फ्लैप राइनोप्लास्टी का पहला लिखित रिकॉर्ड है, जिस तकनीक का आज भी उपयोग किया जाता है। इसमें नाक को फिर से जोड़ने के माथे से त्वचा की पूरी मोटाई का टुकड़ा का उपयोग होता है। उस समय, ऐसी प्रक्रिया उन लोगों के साथ होती थी, जो चोरी या व्यभिचार के लिए सजा के रूप में अपनी नाक खो चुके थे। सर्जरी की इस विधियों को सुश्रुत संहिता में अच्छी तरह से समझाया और बताया गया है।”

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