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चीन में ट्रांसजेंडर ने जीता अपनी तरह का पहला मुकदमा, नियोक्ता को देना होगा वेतन और हर्जाना

नियोक्ता के खिलाफ अदालत जाने वाले पुरुष का जन्म एक महिला के तौर पर हुआ था लेकिन वो खुद को पुरुष समझता था। वो आम तौर पर पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले कपड़े पहनकर ही दफ्तर जाता था।

Author Updated: January 3, 2017 5:14 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर (Source: Photo by Oinam Anand)

चीन में अपनी तरह के पहले मामले में एक ट्रांसजेंडर पुरुष ने मंगलवार (तीन जनवरी) को अपने नियोक्ता के खिलाफ मुकदमा जीत लिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अनुचित तरीके से नौकरी से निकाला गया। हालांकि अदालत ने नियोक्ता को भेदभाव के आरोप से बरी कर दिया। नियोक्ता के खिलाफ अदालत जाने वाले पुरुष का जन्म एक महिला के तौर पर हुआ था लेकिन वो खुद को पुरुष समझता था। वो आम तौर पर पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले कपड़े पहनकर ही दफ्तर जाता था।  इस व्यक्ति को महज सात दिनों की नौकरी के बाद गुईझाओ प्रांत के एक हेल्थ सेंटर से बर्खास्त कर दिया गया था।

मामले की संवेदनशीलता और व्यक्ति की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए उसका नाम गुप्त रखा गया है। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार चीनी मीडिया इस व्यक्ति को मिस्टर सी कह रहा है। अदालत ने मिस्टर सी को 121 युआन (करीब आठ हजार रुपये) वेतन और 1500 युआन (करीब 14 हजार रुपये) हर्जाना देने के लिए कहा है। चीनी मीडिया के अनुसार अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं है कि वादी के संग भेदभाव किया गया है। चीनी अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि इस क्षेत्र में कानून बनाने की सख्त जरूरत है।

मिस्टर सी ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि वो इस फैसले से “काफी खुश” हैं। मिस्टर सी ने कहा, “चीन में पहली बार किसी लैंगिक अल्पसंख्यक ने ऐसा कोई मुकदमा जीता है। ये पूरे ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अच्छी खबर है।” मिस्टर सी अदालत से पहले श्रम अधिकरण पैनल में हार गए थे। श्रम अधिकरण पैनल ने माना था कि उन्हें “योग्यता के अभाव” में नौकरी से निकाला गया। चीन के रूढ़िवादी समाज में लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय के प्रति पिछले कुछ सालों में जागरूकता बढ़ी है लेकिन अभी इस दिशा में काफी काम किये जाने की जरूरत है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार एलजीबीटी समुदाय को चीन में काफी भेदभाव का सामना करना पड़ता है।  एलजीबीटी समुदाय अब अपने संग होने वाले भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए अदालत की शरण में जाने लगा है। साल 20154 में बीजिंग की एक अदालत ने एक क्लीनिक को एक समलैंगिक व्यक्ति को बिजली के झटके देने के लिए हर्जाना देने का आदेश दिया था। क्लीनिक का दावा था कि वो व्यक्ति की समलैंगिकता दूर कर सकता है।

वीडियो: नोटबंदी के बाद अब ट्रांजेक्शन चार्ज को लेकर लोग परेशान

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