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कराची में चीनी पनडुब्बी का लंगर डालना भारत के लिए खतरा नहीं: चीनी सेना

पाकिस्तान के कराची बंदरगाह में मई में अपनी पनडुब्बी के लंगर डालने को तवज्जो न देते हुए चीन ने कहा कि चीनी पनडुब्बियों की गतिविधियां किसी तीसरे पक्ष की...
Author July 1, 2015 17:52 pm
चीनी सेना के विशेषज्ञों ने पीएलए द्वारा पिछले माह जारी श्वेत पत्र में हुई अनुवाद की त्रुटि को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया जिसमें कहा गया था कि भूमि विवाद सुलग रहा है। (फ़ोटो-रॉयटर्स)

पाकिस्तान के कराची बंदरगाह में मई में अपनी पनडुब्बी के लंगर डालने को तवज्जो न देते हुए चीन ने कहा कि चीनी पनडुब्बियों की गतिविधियां किसी तीसरे पक्ष की ओर लक्षित नहीं थीं और हिंद महासागर में पीएलए की गतिविधियां ‘‘जाहिर तथा पारदर्शी’’ हैं।

पिछले साल कोलंबो में और इस साल मई में कराची में चीनी पनडुब्बियों के लंगर डाले जाने को लेकर भारत में चिंता के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में चीनी रक्षा प्रवक्ता सीनियर कर्नल यांग यूजिन ने बताया कि चीनी पोतों की गतिविधियों का लक्ष्य कोई तीसरा पक्ष नहीं था।

चीनी रक्षा मंत्रालय में एशियाई मामलों के ब्यूरो के स्टाफ ऑफिसर मेजर जियांग बिन ने कहा ‘‘हिंद महासागर में पीएलए नौसेना की गतिविधियां जाहिर और पारदर्शी हैं। हमने क्षेत्र में भारत तथा अन्य देशों से यह स्पष्ट कहा है।’’

यहां आए भारतीय मीडिया के एक प्रतिनिधिमंडल से उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष ने फरवरी 2016 में भारत में होने जा रहे इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होने के लिए पीएलए नौसेना को आमंत्रित किया है। इससे सैन्य स्तर पर गहरे सहयोग का पता चलता है। अब दोनों पक्षों के रिश्ते और अधिक परिपक्व हो गए हैं।

चीनी सेना के अधिकारियों ने भी कहा कि पाकिस्तान ने चीन भारत के उत्तरोत्तर मजबूत होते रिश्तों को लेकर चिंता जताई और यह स्पष्टीकरण भी मांगा है कि क्या इन रिश्तों का असर उनके ‘सर्वकालिक’ द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।

जियांग ने कहा ‘‘साफ कहूं तो पाकिस्तानी मित्रों ने यही सवाल किया है कि ‘हमने पाया है कि आप भारत के साथ संबंधों में बहुत प्रगति कर रहे हैं’ और इसका चीन-भारत संबंधों पर असर पड़ेगा।’’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जहां चीन का एक परांपरागत मित्र रहा है वहीं चीन भारत संबंध विकसित होते रहे हैं, खास कर पिछले साल चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा और इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन दौरा संपन्न होने के बाद।

जियांग ने कहा ‘‘इसके बाद द्विपक्षीय संबंध और अधिक बेहतर होते गए हैं।’’ भारत चीन संबंधों के मामले से निपट रहे अधिकारियों में से एक जियांग ने स्थानीय भारतीय संवाददाताओं और यहां आए भारतीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की चीनी सेना के प्रवक्ता वरिष्ठ कर्नल यांग की अगुवाई में विभिन्न चीनी सैन्य विशेषज्ञों से बातचीत के दौरान यह बात कही।

चीनी सैन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों ने कल पहली बार यह बताया कि बढ़ते चीन भारत संबंधों, खास कर दोनों सेनाओं के बीच बढ़ते संबधों को लेकर पाकिस्तान असहज महसूस करता है।

चीन भारत संबंधों पर चीन पाकिस्तान के सर्वकालिक रिश्तों के प्रभाव को तवज्जो न देते हुए जियांग ने कहा ‘‘हमारी नीति यह है कि विकसित होते चीन पाकिस्तान संबंधों का लक्ष्य भारत के खिलाफ नहीं रहा और बीजिंग नयी दिल्ली तथा इस्लामाबाद के बीच एक पुल की तरह काम करना चाहेगा।’’

जियांग ने कहा ‘‘उनके बीच संवाद के लिए हम दोनों पक्षों के बीच पुल की तरह भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि हमें उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान अपनी समस्याओं का खुद ही शांतिपूर्वक हल कर सकते हैं।’’

चीनी रक्षा मंत्रालय में एशियाई मामलों के ब्यूरो के स्टाफ आॅफिसर मेजर जियांग बिन ने कहा ‘‘जब भारत और पाकिस्तान एक दूसरे से बातचीत करने में मुश्किल पाते हैं तो हम उनका संदेश देने में मदद कर सकते हैं। हम ऐसा करते रहे हैं।’’

जियांग ने कहा ‘‘चीन के आसपास शांतिपूर्ण पड़ोस हमारे विकास, तथा इन तीनों देशों के लोगों के विकास एवं शांतिपूर्ण जीवन के लिए अच्छा है।’’

संवाद के दौरान चीनी सेना के विशेषज्ञों ने पीएलए द्वारा पिछले माह जारी श्वेत पत्र में हुई अनुवाद की त्रुटि को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया जिसमें कहा गया था कि भूमि विवाद सुलग रहा है।

भारत का संदर्भ दिए बिना दस्तावेज में कहा गया था कि जमीनी भूभाग को लेकर कुछ विवाद अब तक सुलग रहे हैं। एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वास्तविक अनुवाद यह था कि सीमा विवाद अब तक बरकरार है।

श्वेत पत्र में ज्यादातर बातें तटीय हिस्से से लेकर गहरे समुद्र तक चीनी सेना की गतिविधियों में विस्तार के बारे में थीं। प्रवक्ता यांग ने कहा कि भारत और चीनी सेना के बीच सहयोग में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने सीमा मुद्दे पर एक परामर्श व्यवस्था स्थापित की है। विभिन्न स्तरों पर सीमा परामर्श काम कर रहा है।

दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के हल के लिए विशेष प्रतिनिधि वार्ता की व्यवस्था भी है। यांग ने कहा कि निकट भविष्य में दोनों सेनाओं के जनरल हेड क्वार्टर्स के बीच सीधा संपर्क होगा।

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