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ह‍िंद महासागर में चीन ने बढ़ाई भारत की च‍िंता: पूरी तरह चालू क‍िया देश से बाहर बना पहला सैन्‍य अड्डा- र‍िपोर्ट में दावा

China Naval Base Djibouti: जिबूती में बनाए गए चीन के सैन्य अड्डे को लेकर पूर्व भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश का कहना है कि चीन का यह कदम एक सुनियोजित और सोची-समझी रणनीति है, जिसके जरिए वह समुद्री क्षेत्र में अपने प्रभाव को फैला रहा है।

ह‍िंद महासागर में चीन ने बढ़ाई भारत की च‍िंता: पूरी तरह चालू क‍िया देश से बाहर बना पहला सैन्‍य अड्डा- र‍िपोर्ट में दावा
श्रीलंका के दक्षिणी हंबनटोटा बंदरगाह में चीनी जहाज (Twitter/DailyMirrorS)

China Naval Base Djibouti: पूरी दुनिया पर कब्जा करने की मंशा रखने वाले चीन की ताकत बढ़ती जा रही है। चीन का पहला विदेशी सैन्य अड्डा तैयार हो गया है। अफ्रीका के जिबूती में स्थित इस नौसैनिक अड्डे के चालू होने के बाद भारत की चिंता बढ़ गई है क्योंकि हिंद महासागर में भी अपनी स्थिति मजबूत करने की तरफ चीन का यह कदम है।

यह सैन्य अड्डा हिंद महासागर में तैनात चीनी युद्धपोतों के लिए काम कर रहा है। वहीं, सेना से जुड़े लोगों ने भी चीन के जिबूती सैन्य अड्डे की शक्तिशाली मजबूती का दावा किया है, जिसने भारत की चिंताएं और ज्यादा बढ़ा दी हैं।

एनडीटीवी ने सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों के आधार पर इस बात का दावा किया है कि चीन का जिबूती सैन्य अड्डा पूरी तरह से चालू हो चुका है। इस सैन्य बेस को बाब-अल-मांडेब जलसंधि के पास बनाया गया है। बाब-अल-मांडेब जलसंधि गल्फ ऑफ एडेन और रेड सी को अलग करता है।

जिबूती में चीन की उपस्थिति हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति स्थापित करने के लिए एक विस्तृत योजना का हिस्सा है, जो ना सिर्फ अमेरिकी नौसेना के लिए निर्देशित है, बल्कि भारतीय नौसेना के लिए भी है।

क्या हैं इसकी खासियत

  • साल 2016 से निर्माणाधीन जिबूती सैन्य अड्डो को मजबूत तरीके से तैयार किया गया है और यह सीधे हमलों से निपटने में सक्षम है।
  • इसे 590 मिलियन डॉलर की लागत से तैयार किया गया और इसकी सतह पर कई सुरक्षा कवच हैं। इस वजह से यह हमलों को मजबूती से झेल सकता है और इसे नुकसान पहुंचाना मुश्किल होगा।
  • इसे आधुनिक तरीके से तैयार किया गया है और सैटेलाइट की तस्वीरों में देखा गया कि चीन ने यहां उन जहाजों को तैनात किया है, जो उसकी रीढ़ की हड्डी रहे हैं।

पूर्व भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश का कहना है कि चीन का यह कदम एक सुनियोजित और सोची-समझी रणनीति है, जिसके जरिए वह समुद्री क्षेत्र में अपने प्रभाव को फैला रहा है। वहीं, अमेरिकी नौसेना के शीर्ष कमांडर भी पहले चेतावनी दे चुके हैं कि पहले ही चीन को हिंद महासागर में परमाणु-संचालित हमला करने वाली पनडुब्बियों को संचालित करते देखा गया है और इन जल क्षेत्रों में वाहक युद्ध समूहों को भी काम करते हुए देखा जा सकता है।

श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पहुंचा चीनी जासूसी जहाज, भारत के लिए खतरा

चीन का जासूसी जहाज युआल वांग 5, 16 अगस्त को श्रीलंका के हंबनटोटा पहुंचा। बता दें कि चीन ने इस बंदगहार को श्रीलंका से 1.1 अरब डॉलर की कीमत पर 99 साल के लिए पट्टे पर ले लिया है। युआल वांग 5, 22 अगस्त तक यहां रहेगा। जिस रास्त जहाज यहां पहुंचा है, वहां से वह भारत की किसी भी उस बैलिस्टिक मिसाइल को ट्रैक कर सकता है, जिसका टेस्ट सेनाओं के लिए किया जाएगा।

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