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एससीओ में भारत, पाकिस्तान के प्रवेश से क्षेत्रीय स्थिरता को मिल सकती है मजबूती : चीनी मीडिया

चीन के नेतृत्व वाले शंघाई सहयोग संगठन :एससीओ: में भारत और पाकिस्तान के प्रवेश से इन दोनों देशों के बीच आतंकवाद-विरोधी सहयोग को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

Author March 15, 2017 10:51 am

चीन के नेतृत्व वाले शंघाई सहयोग संगठन :एससीओ: में भारत और पाकिस्तान के प्रवेश से इन दोनों देशों के बीच आतंकवाद-विरोधी सहयोग को बढ़ाने में मदद मिल सकती है और यह संगठन इनके आपसी मतभेदों को सुलझाने के लिए एक मंच उपलब्ध करवा सकता है।यह बात आज चीन के सरकारी मीडिया ने कही है। इस साल जून में कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित होने वाली एससीओ की अगली बैठक के दौरान इस छह सदस्यीय संगठन में भारत और पाकिस्तान के शामिल होने की संभावना है।

सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, ‘‘आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे पर लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी रहे भारत और पाकिस्तान को एससीओ का सदस्य बनने के लिए कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने होंगे और एससीओ नियमों के अनुरूप काम करने का संकल्प लेना होगा। इन नियमों में वर्ष 2015 में हस्ताक्षरित सीमा रक्षा सहयोग से जुड़ा एससीओ सदस्य देशों का समझौता भी शामिल है।’’

लेख में कहा गया है, ‘‘एससीओ में दो देशों के प्रवेश से बुनियादी ढांचों और आतंकवाद-विरोधी प्रयासों आदि में भारत और पाकिस्तान के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।’’इसमें कहा गया है कि एससीओ की रूपरेखा के मुताबिक, दोनों देशों के बीच भड़के किसी संघर्ष को रोकने के लिए तीसरा पक्ष हस्तक्षेप कर सकता है। लेख के मुताबिक, ‘‘हालांकि, भारत एससीओ देशों के साथ लचीले बहुपक्षीय समझौतों की कोशिश कर सकता है लेकिन भारत और पाकिस्तान को सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी सहयोग को मजबूत करने के लिए एससीओ के अन्तर्गत मूल रूपरेखा और सिद्धांत का पालन करना होगा।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘भारत और पाकिस्तान के बीच की दुश्मनी के जल्दी समाप्त होने की संभावना नहीं है लेकिन एससीओ से दोनों देशों को एक नया मंच मिलेगा जिसपर इनके बीच विवाद धीरे-धीरे समाप्त किए जा सकते हैं।’’

बता दें परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले किसी भी देश को एनएसजी में शामिल नहीं करने के नियम तो अमेरिका ने ही तय किए थे। सनद रहे कि अमेरिका अब इस नियम को खास तवज्जो नहीं देते हुए सभी देशों से आग्रह कर रहा है कि वह भारत को एनएसजी में प्रवेश दिलाने में मदद करे।

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