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चीनी मीडिया ने कहा, भारत के रिकॉर्ड उपग्रह प्रक्षेपण ने तेज़ कर दी है अंतरिक्षीय दौड़

ग्लोबल टाईम्स ने कहा, ‘बुधवार (15 फरवरी) का प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की हालिया जीत है।’

Author बीजिंग | February 20, 2017 4:40 PM
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी की सफलता से डरा पाकिस्‍तान। ( Photo Source: PTI)

चीनी अधिकारियों का कहना है कि उपग्रह प्रक्षेपण प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के मामले में भारत ने चीन से अच्छा काम किया है और इसके कारण बीजिंग दुनिया के छोटे उपग्रह बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपने रॉकेट प्रक्षेपणों का व्यवसायीकरण तेज करने के लिए प्रेरित हो सकता है। शंघाई इंजीनियरिंग सेंटर फॉर माइक्रोसेटेलाइट्स के निदेशक झांग योंघे ने कहा, ‘व्यवसायिक अंतरिक्ष के बढ़ते बाजार के लिए चल रही वैश्विक दौड़ में देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के बीच, इस प्रक्षेपण ने दिखा दिया है कि भारत अंतरिक्ष में कम खर्च में व्यवसायिक उपग्रह भेज सकता है।’

चीन के सरकारी मीडिया ने ‘भारतीय उपग्रह प्रक्षेपण ने तेज की अंतरिक्षीय दौड़’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में चीनी अधिकारियों के हवाले से कहा कि भारत की सफलता के बाद चीन अपने रॉकेट प्रक्षेपणों के व्यवसायीकरण को तेज कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि झांग का मानना है कि भारत ने अपनी प्रक्षेपण सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय तौर पर बढ़ावा देने में चीन से अच्छा काम किया है। चीन से पहले भारत के मंगल पर पहुंच जाने की बात को रेखांकित करने के साथ-साथ झांग ने पिछले सप्ताह भारत द्वारा एक ही रॉकेट के जरिए 104 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर देने की सराहना की। झांग ने कहा, ‘‘विश्व में फैलते छोटे उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए चीन अपने रॉकेट प्रक्षेपणों का व्यवसायीकरण तेज कर सकता है।’ ग्लोबल टाईम्स ने कहा, ‘बुधवार (15 फरवरी) का प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की हालिया जीत है।’

इसरो की कामयाबी पर भड़का चीनी मीडिया, लिखा- अभी भी हमसे मीलों पीछे हो, सबसे ज्‍यादा गरीब भी तुम्‍हारे यहां ही हैं

एक बार में 104 सैटलाइट्स को स्पेस में भेजकर इतिहास रचने वाले इंडियन स्पेस रिसर्च अॉर्गनाइजेशन (इसरो) की कामयाबी ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया, लेकिन पड़ोसी देश चीन को यह शायद पच नहीं रहा। चीनी मीडिया ने भारत को इस कामयाबी पर मुबारकबाद तो दी, लेकिन साथ ही तंज कसने में भी पीछे नहीं रही। चीन की सरकारी मीडिया ने गुरुवार को कहा कि भले ही भारत ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की हो, लेकिन अब भी दुनिया में सबसे ज्यादा गरीब वहीं हैं और उसकी स्पेस टेक्नॉलजी चीन और अमेरिका से कोसों पीछे है।

अखबार ने लिखा, ‘हालांकि स्पेस टेक्नॉलजी की रेस को सैटलाइट्स की लॉन्चिंग की संख्या से नहीं आंका जा सकता। यह कहना सही होगा कि इसकी उपलब्धि का महत्व सीमित है। इस बारे में भारतीय लोगों के मुकाबले वहां के वैज्ञानिक ज्यादा जानते हैं, जिसे भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स में खासा प्रोत्साहित किया गया है।’ अखबार के मुताबिक खासतौर पर कम निवेश के बावजूद स्पेस टेक्नॉलजी में ग्लोबल लेवल हासिल कर इसरो ने बड़ा काम किया है।

अखबार के मुताबिक इसरो की यह उपलब्धियां अन्य देशों को भी सोचने को मजबूर करती हैं। इस लेख में कहा गया कि अभी तक भारत की ओर से स्पेस स्टेशन के लिए कोई भी प्लान नहीं है, तो वहीं मौजूदा समय में भारत का कोई भी एस्ट्रोनॉड अंतरिक्ष में नहीं है। उनके अनुसार, चीन के दो एस्ट्रोनॉड्स ने पिछले साल 30 दिन अंतरिक्ष में बिताए थे। हालांकि चीनी मीडिया ने इसरो द्वारा रूस का एक बार में 37 सैटलाइट भेजने के रिकॉर्ड को तोड़ने पर कुछ नहीं कहा।

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