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चीन ने चेताया- पहाड़ ह‍िल सकता है, पीएलए नहीं, हमारी ताकत को लेकर भ्रम में न रहे भारत

हम भारत से बहुत ही मजबूती के साथ आग्रह करते हैं कि वे इस मामले में कोई व्यावहारिक कदम उठाए और अपनी गलतियों को सुधार ले।

चीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है।

सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच काफी लंबे समय से तनाव बना हुआ है। यह विवाद इतना बढ़ चुका है कि दोनों देश बयानबाजी कर एक दूसरे पर दवाब बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस विवाद को लेकर चीन के रक्षा मंत्री का कहना है कि भारत चीनी सेना को लेकर किसी भ्रम में न रहे। पहाड़ हिल सकता है लेकिन चीन नहीं। सोमवार को भारत को धमकी देते हुए चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू कियान ने कहा कि भारत ऐसे किसी भी भ्रम में रहे कि हमारी सेना उनका सामना नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी पहाड़ को हिलाया जा सकता है लेकिन पीपल्स लिबरेशन आर्मी को हटाना मुश्किल है। चीनी सेना का सामने करने की भारत में काबिलियत नहीं है।

चीन के अनुसार भारत ने न केवल डोकलाम रीजन को पार किया है बल्कि वहां पहाड़ी मैदान में चल रहे सड़क बनाने के कार्य में दखलअंदाजी की है। सड़क निर्माण कार्य को लेकर भारत का कहना है कि एक ही बोर्डर होने के कारण इससे सुरक्षा में सेंद लग सकती है। कियान ने कहा कि हम भारत से बहुत ही मजबूती के साथ आग्रह करते हैं कि वे इस मामले में कोई व्यावहारिक कदम उठाए और अपनी गलतियों को सुधार ले। चीन की सेना का 90 साल का इतिहास हमारी क्षमता को साबित करता है इसलिए भारत को किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए।

बता दें कि भारत-चीन के बीच कुल 3500 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। इन दोनों देशों के बीच सीमा विवाद की वजह से 1962 में युद्ध हो चुका है। बावजूद इसके सीमा विवाद नहीं सुलझ सका। यही वजह है कि अलग-अलग हिस्सों में अक्सर भारत-चीन के बीच सीमा विवाद उठता रहा है। मौजूदा सीमा विवाद भारत-भूटान और चीन सीमा के मिलान बिन्दु से जुड़ा हुआ है। सिक्किम में भारतीय सीमा से सटे डोकलाम पठार है, जहां चीन सड़क निर्माण कराने पर आमादा है। भारतीय सैनिकों ने पिछले दिनों चीन की इस कोशिश का विरोध किया था। डोकलाम पठार का कुछ हिस्सा भूटान में भी पड़ता है। भूटान ने भी चीन की इस कोशिश का विरोध किया। भूटान में यह पठार डोक ला कहलाता है, जबकि चीन में डोकलांग। भूटान और चीन के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं है। भूटान को अक्सर ऐसे मामलों में भारतीय सैन्य और राजनयिक सहयोग मिलता रहा है। लिहाजा, भारतीय सेना ने इस बार भी चीनी सैनिकों के सड़क निर्माण की कोशिशों का विरोध किया है। चीन को यह बात नागवार गुजरी है।

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