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भारत की चिंता के बीच श्रीलंका के Hambantota डॉक पर पहुंच ही गया चीनी जहाज, जानिए पूरी कहानी

Chinese ballistic missile: चीन अपने युआनवांग श्रेणी के जहाजों का इस्तेमाल सैटेलाइट, रॉकेट और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के लॉन्चिंग को ट्रैक करने के लिए करता है।

भारत की चिंता के बीच श्रीलंका के Hambantota डॉक पर पहुंच ही गया चीनी जहाज, जानिए पूरी कहानी
चीन के जासूसी जहाज के हंबनटोटा बंदरगाह आने को लेकर भारत सतर्क है(फोटो सोर्स: Wikimedia Commons)।

सौरभ कपूर

Hambantota Port: चीन का बैलिस्टिक मिसाइल और सैटेलाइट ट्रैकिंग जहाज युआनवांग-5 के 16 अगस्त से एक सप्ताह के लिए श्रीलंका के दक्षिणी तट पर हंबनटोटा बंदरगाह पर डॉक रहेगा। बता दें कि यह जहाज चीन का जासूसी जहाज कहा जाता है। द इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट के मुताबिक लिखा है कि इस जहाज को लेकर भारत द्वारा जताई गई चिंता के बाद श्रीलंका पहले चीन से हाई-टेक पोत के आगमन को स्थगित करने के लिए कहा था। हालांकि 13 अगस्त को इसे डॉकिंग के लिए मंजूरी दे दी गई।

दरअसल श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह का निर्माण पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के कार्यकाल में चीन द्वारा दिए कर्ज के पैसों से हुआ था। ऐसे में चीन इसपर अपना हक जताता है। बता दें कि चीन के 1.1 अरब डॉलर के कर्ज को चुकाने में असमर्थ श्रीलंका में इस बंदरगाह को राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधान मंत्री रानिल विक्रमसिंघे की सरकार ने 2017 में 99 साल के लीज पर चीन को तौर सौंपा है।

इसके अलावा श्रीलंका ने बंदरगाह के आसपास की 15,000 एकड़ जमीन भी चीनियों को सौंप दी। चीन का दावा है कि श्रीलंका पर चीन का कुल 8 अरब डॉलर कर्ज है।

हंबनटोटा बंदरगाह पहुंचे चीन के निगरानी जहाज युआनवांग-5 को सूचनाएं हासिल करने के लिए जाना जाता है। इस जहाज के जरिए चीन अपने समुद्री मिशन को सफल बनाने की कोशिशों में हैं। इस जहाज पर सैटेलाइट डिश लगी हुई हैं। इस जहाज की लंबाई करीब 222 मीटर, चौड़ाई 25 मीटर है। आधुनिक उपकरणों से लैस इस जहाज के सहारे चीन अंतरिक्ष में दूसरे देशों के सैटेलाइट की जानकारी भी चुराने की कोशिश करता है। इसे चीन का ताकतवर जासूसी जहाज भी कहा जाता है।

चीन अपने युआनवांग श्रेणी के जहाजों का इस्तेमाल सैटेलाइट, रॉकेट और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के लॉन्चिंग को ट्रैक करने के लिए करता है। चीन के पास ऐसे सात ट्रैकिंग जहाज हैं, जो पूरे प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागरों में काम करते हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इन स्पेस सपोर्ट शिप को पीएलए के एसएसएफ(स्ट्रैटेजिक सपोर्ट फोर्स) द्वारा संचालित किया जाता है। युआन वांग 5 चीन के जियांगन शिपयार्ड में बनाया गया था।

भारत की चिंता:

युआन वांग 5 एक शक्तिशाली ट्रैकिंग पोत है जिसकी हवाई पहुंच कथित तौर पर लगभग 750 किमी है। इस रेंज के हिसाब से भारत में केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई बंदरगाह चीन के रडार पर हो सकते हैं। जहाज के श्रीलंका आने से भारत अपनी चिंताओं को लेकर सतर्क है। दरअसल हंबनटोटा से भारत की दूरी 450 किलोमीटर है। ऐसे में चीन की नापाक चालों को देखते हुए भारत इस जहाज पर लगातार नजर बनाए हुए है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस पोत के चलते दक्षिण भारत में कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की जासूसी किए जाने का खतरा हो सकता है।

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