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अमेरिकी नौसेना के कमांडर का दावा-हिंद महासागर में भारत के लिए कभी भी खतरा बन सकता है चीन

अमेरिकी नेवी में पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस ने कहा, एेसा कोई भी नहीं है जो चीनी नौसेना को आज हिंद महासागर में जाने से रोक सके।

Indian naval, Indian naval ship, naval ship Blast, Kochi, Keralaपिछले 3 वर्षों से चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैतों से लड़ने के लिए विमानवाहक युद्धपोत के अलावा परमाणु पनडुब्बियां तैनात की हुई हैं।

भारतीय जल क्षेत्र में चीनी नेवी की बढ़ती मौजूदगी पर अमेरिका के एक कमांडर ने भारत को सचेत होने की सलाह दी है। अमेरिकी नेवी में पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस ने कहा, मुझे लगता है कि भारत को चीन की बढ़ती मौजूदगी पर चिंता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर आपको लगता है कि क्षेत्र में एक निश्चित प्रभाव है तो वह प्रभाव चीन का है, भारत का नहीं। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में चीनी नेवी की गतिविधियों को कम करके आंकने का सवाल ही नहीं है और यह भारतीय नेवी के लिए चिंता की बात है।

एनडीटीवी ने जब उनसे पूछा कि क्या हिंद महासागर में चीनी विमानवाहक युद्ध पोत सक्रिय है तो उन्होंने कहा कि साफ तौर पर। एेसा कुछ भी नहीं है जो उन्हें आज हिंद महासागर में जाने से रोक सके। हालांकि एडमिरल ने यह भी कहा कि चीनी विमानवाहक पोत अमेरिकी नेवी की तरह दिन रात परिचालन करने में सक्षम नहीं है। वहीं भारतीय नौसेना चीन के मुकाबले विमानवाहक पोतों के परिचालन में ज्यादा सक्षम है।
चीनी युद्धविमानवाहक पोतों और सबमरीन की गतिविधियों का पता लगाने के लिए भारत और अमेरिकी सेनाओं के बीच सहयोग पर मुहर लगाते हुए एडमिरल ने कहा, हम इस काम पर नजर रखने के लिए साथ काम कर रहे हैं।

जब एनडीटीवी ने उनसे पूछा कि यह कैसे काम करेगा तो उन्होंने कहा कि मैं इसमें ज्यादा जाना नहीं चाहता, लेकिन इसके तहत चीनी विमानवाहक पोतों की गतिविधियों के बारे में सूचनाएं शेयर की जाती हैं। इससे पहले एनडीटीवी ने ही अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारतीय नौसेना अमेरिका में बनी पी8-1 एंटी सबमरीन पर काफी हद तक निर्भर है और इसके जरिए वह बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चीनी नौसेना की गतिविधियों के बारे में पता लगाती है। एडमिरल हैरिस ने कहा कि अगर भारत और अमेरिकी नेवी के बीच संचार संगतता और सुरक्षा करार (सीओएमसीएएसए) हो जाए तो सूचनाएं लेने-देने के क्षेत्र में काफी काम हो सकता है। आपको बता दें कि पिछले 3 वर्षों से चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैतों से लड़ने के लिए विमानवाहक युद्धपोत के अलावा परमाणु पनडुब्बियां तैनात की हुई हैं।

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