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दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य तैयारियां तेज, वियतनाम ने भारत को दी हालात की जानकारी

अमेरिका ने चीन की हरकतों के जवाब में विवादित द्वीपसमूह के पास अपने सैन्य पोत भेज दिए हैं और कहा है कि क्षेत्र पर बीजिंग का दावा अवैध है। भारत और वियतनाम के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा व सैन्य संबंधों में काफी वृद्धि हुई है।

Author Edited By Sanjay Dubey नई दिल्ली | August 23, 2020 5:30 AM
india china tension, indian army, PLA, LADAKHचीनी सेना ने पैंगोग त्सो के फिंगर4 इलाके में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

वियतनाम ने चीन की गतिविधियों के चलते दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बारे में भारत को अवगत कराया है। कई देशों के संयम बरतने के आह्वान की परवाह किए बिना चीन संसाधन दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से में बड़ी संख्या में पोतों और लड़ाकू विमानों की तैनाती कर अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है। वियतनाम ने चीन की इन गतविधियों के चलते क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर भारत को जानकारी दी है। दक्षिण चीन सागर भारत के लिए भी बेहद महत्त्वपूर्ण है क्योंकि देश का 55 फीसद व्यापार इसी क्षेत्र से होता है।

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, यह मुद्दा शुक्रवार को विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से वियतनाम के राजदूत फाम सान्ह चाउ की मुलाकात के दौरान उठा। वियतनाम के राजदूत ने भारत के तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) की तेल खोज परियोजनाओं की मौजूदगी वाले वियतनामी जलक्षेत्र के इर्द-गिर्द सहित दक्षिण चीन सागर में वर्तमान स्थिति के बारे में श्रृंगला को अवगत कराया।

दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक सैन्य गतिविधि ऐसे समय हो रही हैं, जब उसकी और भारत की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में तीन महीने से अधिक समय से तनातनी चली आ रही है। विदेश मंत्रालय अथवा वियतनाम दूतावास की ओर से हालांकि, बैठक का कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

बैठक के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ट्वीट किया, ‘विदेश सचिव हर्षवर्धन ने वियतनाम के सान्ह चाउ फाम से मुलाकात की जिसके साथ भारत के मजबूत संबंध और समग्र रणनीतिक भागीदारी है।’ चीन बड़ी मात्रा में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी वाले समूचे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। हलांकि, वियतनाम, फिलीपीन और ब्रुनेई सहित कई आसियान देश भी क्षेत्र पर अपना जवाबी दावा करते हैं।

वर्ष 2014 में पार्सल द्वीप समूह पर चीन की तेल संबंधी कवायद के चलते वियतनाम में चीन विरोधी दंगे भड़क उठे थे जिनमें अनेक चीनी कारखानों को नुकसान पहुंचा था। भारत दक्षिण चीन सागर में समुद्री कानून संबंधी 1982 की संयुक्त राष्ट्र संधि सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप नौवहन की स्वतंत्रता और संसाधनों तक पहुंच का समर्थन करता रहा है।

चीन दक्षिण चीन सागर में वियतनामी जलक्षेत्र में भारत की तेल खोज परियोजनाओं पर आपत्ति व्यक्त करता रहा है। भारत यह कहकर उसकी आपत्ति को खारिज करता रहा है कि वियतनाम के साथ उसका ऊर्जा सहयोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप है। चीन ने पिछले दो महीनों में दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य आक्रामकता बढ़ा दी है जब पूरा विश्व कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है।

अमेरिका ने चीन की हरकतों के जवाब में विवादित द्वीपसमूह के पास अपने सैन्य पोत भेज दिए हैं और कहा है कि क्षेत्र पर बेजिंग का दावा अवैध है। भारत और वियतनाम के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा व सैन्य संबंधों में काफी वृद्धि हुई है। दोनों देशों ने एक दशक तक रणनीतिक भागीदार रहने के बाद 2016 में अपने संबंधों के दर्जे को बढ़ाकर ‘समग्र रणनीतिक भागीदारी’ के स्तर का कर दिया था।

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