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‘चीन की जमीन’ से हट जाए भारत पीएलए की बंदरघुड़की

रक्षा और विदेश मंत्रालय को यह भरोसा है कि चीन भले ही जुबानी तीर चला रहा हो, वह भारत के साथ युद्ध का जोखिम नहीं उठाएगा, न ही किसी छोटे स्तर के सैन्य अभियान को अंजाम देगा।
Author बेजिंग/नई दिल्ल | August 8, 2017 02:37 am
चीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है।

डोकलाम गतिरोध के बीच चीनी सरकार की ओर से प्रायोजित भारतीय पत्रकारों की बेजिंग के बाहरी इलाके में स्थित हुऐरो सैन्य छावनी की यात्रा को चीनी सेना ने प्रचार युद्ध में तब्दील कर दिया। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के वरिष्ठ कर्नल ली ली ने युद्ध की धमकी देते हुए कहा, ‘भारतीय सेना के लिए कठोर संदेश है – टकराव से बचने के लिए चीनी सरजमीन से हटो।’ उधर, नई दिल्ली में भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने संयत रहते हुए राजनयिक वार्ता के जरिए गतिरोध का हल निकाल लेने की उम्मीद जताई। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि चीन कभी भी भारत के साथ युद्ध का जोखिम नहीं उठाएगा। बेजिंग में वरिष्ठ कर्नल ली ने दावा किया, ‘भारतीय सेना ने जो किया, वह चीनी सरजमीन पर हमला है।’ भारतीय पत्रकारों से उन्होंने कहा, ‘चीनी सैनिक जो सोच रहे हैं, उसके बारे में आप रिपोर्ट कर सकते हैं। मैं एक सैनिक हूं, मैं राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सब कुछ करने की कोशिश करूंगा। हम में संकल्प है।’ भारतीय मीडिया के सामने पीएलए ने युद्धकौशल का प्रदर्शन किया। युद्धकौशल के प्रदर्शन में छोटे हथियारों से निशाना बनाना, आमने सामने की जंग में दुश्मन सैनिकों को पकड़ना और वास्तविक युद्ध की स्थितियों में थल सेना की टुकड़ियों का लेजर सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण शामिल था। हालांकि, ली ने स्पष्ट किया कि इस सैन्य प्रदर्शन का डोकलाम से संबंध नहीं है। डोकलाम पर चीन की ओर से आए दिन दबाव बनाने की कोशिशों के बीच भारत ने अपना रवैया संयत रखा है।

रक्षा और विदेश मंत्रालय को यह भरोसा है कि चीन भले ही जुबानी तीर चला रहा हो,  वह भारत के साथ युद्ध का जोखिम नहीं उठाएगा, न ही किसी छोटे स्तर के सैन्य अभियान को अंजाम देगा। विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, राजनयिक वार्ता के जरिए हल निकाल लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, वार्ता में भारत यह भी प्रस्ताव दे रहा है कि दोनों देश एक साथ डोकलाम से अपनी-अपनी सेना हटाएं। हालांकि, रक्षा मंत्री अरुण जेटली समेत मंत्रालय के अधिकारी एकाधिक बार यह कह चुके हैं कि अगर युद्ध की नौबत आती भी है तो भारतीय सेना उसके लिए पूरी तरह तैयार है और वह चीन के किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम है। डोकलाम में गतिरोध को 50 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं और भारत ने कई बार कहा है कि युद्ध इस समस्या का हल नहीं है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कह चुकी हैं कि लिपक्षीय वार्ता, धैर्य और भाषा का संयम ही तनाव को दूर करने का काम कर सकते हैं।

 

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