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US ने चीनी कंपनियों को काली सूची में डाला, “ड्रैगन” ने जवाबी कार्रवाई का लिया संकल्प

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीन ‘‘चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।’’

बीजिंग | Updated: July 12, 2021 1:11 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटोः एजेंसी)

चीन ने रविवार को कहा कि वह उइगुर समुदाय और अन्य मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार में कथित भूमिका को लेकर चीनी कंपनियों को काली सूची में डालने की अमेरिका की कार्रवाई का जवाब देने के लिए ‘‘जरूरी कदम’’ उठाएगा।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का यह कदम ‘‘चीनी उद्यमों का अनुचित दमन और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं व्यापार नियमों का गंभीर उल्लंघन है।’’ मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि चीन ‘‘चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।’’ चीन ने अपने सुदूर पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग में उइगुर समुदाय को लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में रखे जाने और उनसे जबरन श्रम कराने के आरोपों का खंडन किया है। साथ ही उसने अपनी कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ लगाई गई पाबंदियों के जवाब में वीजा एवं वित्तीय संबंधों पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं।

गौरतलब है कि अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने शुक्रवार को एक बयान में कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक और प्रौद्योगिकी कंपनियों एवं अन्य व्यापार इकाइयों ने शिनजियांग में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ “चीन सरकार के दमन, सामूहिक हिरासत और उच्च-प्रौद्योगिकी निगरानी के अभियान” को सक्षम करने में मदद की है। इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी इन चीनी कंपनियों को उपकरण या अन्य सामान नहीं बेच सकते।

बाइडन ने ट्रंप के फैसले का समर्थन कियाः अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने दक्षिण चीन सागर में चीन के लगभग सभी अहम समुद्री दावों को खारिज करने के पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के फैसले को रविवार को बरकरार रखा। प्रशासन ने चीन को चेतावनी भी दी कि विवादित क्षेत्र में फिलीपीन पर अगर किसी भी तरह का हमला हुआ तो अमेरिका एक पारस्परिक रक्षा संधि के तहत जवाबी कार्रवाई करेगा। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन की ओर से यह कड़ा संदेश चीन के दावों के खिलाफ फिलिपीन के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले के इस सप्ताह पांच साल पूरा होने से पहले जारी एक बयान में सामने आया है। हालांकि चीन इस फैसले को खारिज करता है।

पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने न्यायाधिकरण के फैसले के प्रति समर्थन जताया था और यह भी कहा था कि वह चीन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जलक्षेत्र के बाहर दक्षिण चीन सागर में उसके लगभग सभी समुद्री दावों को अवैध मानता है। रविवार के बयान में, ट्रंप प्रशासन में विदेश मंत्री रहे माइक पोम्पिओ की इन्हीं बातों को दोहराया गया है। ब्लिंकन ने पोम्पिओ के समान भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा, ‘‘दक्षिण चीन सागर की तुलना में कहीं भी नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था अधिक खतरे में नहीं है।’’ उन्होंने चीन पर इस महत्वपूर्ण वैश्विक रास्ते में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करने और दक्षिण पूर्वी एशियाई तटीय देशों को मजबूर करने तथा डराने-धमकाने का आरोप लगाया।

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