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मसूद अजहर मामले में चीन अपने रुख पर कायम, मीडिया ने भी नहीं दिया महत्व

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अपने समकक्षों से बातचीत में सोमवार को अजहर मुद्दे को मजबूती से उठाकर चीन से अपने रुख की समीक्षा करने के लिए कहा था।

Author बीजिंग | April 19, 2016 10:59 PM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है। (एपी फोटो)

चीन ने मंगलवार (19 अप्रैल) को कहा कि संयुक्त राष्ट्र से जैश ए मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगवाने के प्रयास को रोकने का उसका फैसला ‘‘तथ्यों और संबंधित प्रस्तावों’’ के अनुरूप है। चीन की तरफ से यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने चीन के अपने समकक्षों के साथ यह मुद्दा उठाया था।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के उनके समकक्ष यांग जिएची के बीच सोमवार (18 अप्रैल) को महत्वपूर्ण सीमा वार्ता से पहले चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन अजहर मुद्दे पर भारतीय पक्ष सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ ‘‘अच्छी तरह से बातचीत’’ कर रहा है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अपने समकक्षों से बातचीत में सोमवार को अजहर मुद्दे को मजबूती से उठाकर चीन से अपने रुख की समीक्षा करने के लिए कहा था। हुआ ने दोहराया कि बीजिंग का फैसला ‘‘तथ्यों’’ और ‘‘संबंधित’’ संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप है।

हुआ ने कहा, ‘‘सूचीबद्ध मामलों के लिए, चीन ने अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है। हम आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान में संयुक्त राष्ट्र की केन्द्रीय समन्वय भूमिका का समर्थन करते हैं और चीन ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग में सक्रिय भूमिका निभाई है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम आतंकवाद निरोधक अभियान में दोहरे मापदंड का विरोध करते हैं। हम सूचीबद्ध मामलों से तथ्यों तथा संबंधित प्रस्तावों के अनुरूप निपट रहे हैं। हम भारतीय पक्ष सहित सभी संबंधित पक्षों से अच्छी बातचीत कर रहे हैं।’’

चीन ने ये बयान ऐेसे समय दिये जब सुषमा ने मास्को में रूस भारत चीन विदेश मंत्री स्तरीय बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेताया था कि अगर वह आतंकवाद से निपटने में ‘‘दोहरे मापदंड’’ अपनाना जारी रखता है तो उसे ‘‘गंभीर परिणाम’’ भुगतने पड़ेंगे। सोमवार (19 अप्रैल) को यहां शुरू हो रही भारत-चीन सीमा वार्ता पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा अजहर को प्रतिबंधित करवाने के भारत के प्रयास को रोकने के लिए चीन के ‘‘वीटो’’ के मुद्दे का साया रहेगा।

चीनी मीडिया ने अजहर के मामले को नहीं दिया महत्व

चीन की मीडिया ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के इस बयान को मंगलवार (19 अप्रैल) को विशेष महत्व दिया कि भारत और चीन के संबंध किसी तीसरे पक्ष से प्रभावित नहीं होने चाहिए लेकिन मीडिया जेएएम प्रमुख मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के भारत के प्रयास बाधित करने के चीन के रुख की पुनर्समीक्षा करने संबंधी पर्रिकर की अपील का जिक्र करने से बचता दिखा।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार (18 अप्रैल) को मॉस्को में अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ बैठक में पाकिस्तान स्थित जैश ए मोहम्मद के प्रमुख अजहर का मुद्दा उठाया था। पर्रिकर ने भी आतंकवाद के मामले पर चीन से भारत के साथ खड़े रहने की अपील की। पर्रिकर ने चीन के रक्षा मंत्री चांग वानक्वान के साथ बैठक के बाद सोमवार (19 अप्रैल) को कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र में जो हुआ, वह सही दिशा में नहीं था और उन्हें आतंकवाद के मामले पर एक साझी रेखा पर चलना होगा जो भारत और चीन के हित में हो।’’

यहां सरकारी मीडिया ने चांग से कहे गए पर्रिकर के इन बयानों को रेखांकित किया कि भारत उम्मीद करता है कि तीसरे पक्ष समेत अन्य कारक द्विपक्षीय संबंधों के विकास को प्रभावित नहीं करेंगे। सरकारी ‘चाइना डेली’ ने कहा कि यह बयान ऐसे समय में दिया गया है जब एक सप्ताह पूर्व पर्रिकर और अमेरिका के विदेश मंत्री एश्टन कार्टर ने दक्षिण चीन सागर समेत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की रक्षा करने का संकल्प लिया था।

‘चाइना डेली’ ने कहा, ‘‘पर्यवेक्षकों के अनुसार भारत इस सप्ताह चीनी अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकों में चीन और अमेरिका के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।’’ पर्रिकर ने कहा कि भारत चीन के साथ अपने संबंधों को अत्यधिक महत्वपूर्ण समझता है।

शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज में साउथ एशिया स्टडीज के निदेशक झाउ गानचेंग ने कहा कि भारत सरकार चीन के साथ सीमा विवादों को सुलझाने के लिए लंबे समय से समर्पित रही है, ऐसे में देश में पर्रिकर की यात्रा का मकसद सीमा गश्त द्वारा पैदा हुए तनाव को कम करना है। हालांकि इस मसले को रातभर में नहीं सुलझाया जा सकता।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके चीनी समकक्ष यांग जीची इस सप्ताह यहां 19वीं सीमा वार्ता में सीमा विवाद पर चर्चा करेंगे। झाउ ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा के चीनी क्षेत्र में सामान्य गश्तों को भारतीय प्रेस ने भारतीय क्षेत्र में ‘‘आक्रामक’’ घुसपैठ के तौर पर पेश किया है।

चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेम्पररी इंटरनेशनल रिलेशंस में दक्षिण एशियाई मामलों के विशेषज्ञ फु शियाओक्यिांग ने मीडिया में प्रचार और कुछ भारतीय नेताओं द्वारा चीन के मामले पर सख्त रवैये का हवाला देते हुए ‘ग्लोबल टाइम्स’ से कहा, ‘‘सीमा रक्षा सहयोग समझौते के बावजूद इसका क्रियान्वयन जटिल है।’’

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चीन की यात्रा के दौरान बीजिंग एवं नई दिल्ली ने 3488 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा में सुधार के लिए एक औपचारिक तंत्र का निर्माण करते हुए अक्तूबर 2013 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

फु ने कहा कि भारत ने समझौते को सीमा के पूर्वी हिस्से पर विवादित क्षेत्र की यथास्थिति में चीन की मौन सहमति का संकेत समझने की गलती की। उसने पश्चिमी हिस्से में चीनी बलों की सामान्य गश्त को कम किए जाने की मांग की है। उन्होंने नयी दिल्ली की मांग को ‘‘संतुष्ट न किए जा सकने वाली’’ बताया।

उन्होंने कहा कि भारतीय पक्ष के अनावश्यक प्रतिक्रिया देने ने शांतिपूर्ण माहौल को कुछ हद तक प्रभावित किया है। यही एक कारण है जिसकी वजह से दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीमा मामलों पर कई वार्ताएं खास आगे नहीं बढ़ीं। झाउ ने कहा, ‘‘रक्षा सहयोग भारत-अमेरिका संबंधों का एक अहम हिस्सा है। भारत जानता है कि अमेरिका के साथ निकट गठजोड़ चीन को सतर्क कर देगा।’’

फु ने कहा कि हालांकि भारत एक ऐसा देश है जिसकी एक स्वतंत्र विदेश नीति है और वह अपनी नीतियों को अपने हितों के आधार पर बनाता है। वह अमेरिका के लिए चीन के साथ अपने राजनयिक संबंधों को खराब नहीं करना चाहता। ऐसे में पर्रिकर साजो सामान के विनियम के समझौते पर स्पष्टीकरण देने की पहल कर सकते हैं।

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