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नॉर्थ कोरिया में सेना घुसाने की तैयारी में चीन, बना रहा टैंक के लिए सड़कें! सामने आई तस्वीरें

सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा बनाए जा रहे इस 'जी 1112 जियान-शुंगालियाओ एक्सप्रेसवे' का मुख्य मकसद युद्ध टैंकों और सैनिकों को उत्तर कोरिया ले जाना है।

सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा बनाए जा रहे इस ‘जी 1112 जियान-शुंगालियाओ एक्सप्रेसवे’ का मुख्य मकसद युद्ध टैंकों और सैनिकों को उत्तर कोरिया ले जाना है।

उत्तर कोरिया ने पिछले महीने की शुरुआत में हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था। इसके बाद जापान के ऊपर से बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था। इसे देखते हुए अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे साथ ही ये आरोप भी लगाया था कि अगर चीन उत्तर कोरिया की मदद न करे तो वहां का तानाशाह किम जोंग उटपटांग हरकतें करना बंद कर देगा। इस बीच चीन अपनी सेना की पहुंच उत्तर कोरिया तक सुलभ बनाने के लिए उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र में छह लेन का एक हाईवे बना रहा है। हालांकि, यह इलाका बहुत ठंडा और कम जनघनत्व वाला है। वहां बहुत कम संख्या में कार और अन्य गाड़ियां हैं। ट्रैफिक भी बहुत कम है, बावजूद इसके वहां हाईवे बनाया जा रहा है। इस लिहाजा से माना जा रहा है कि यह हाईवे सीधे उत्तर कोरिया तक चीनी सेना की पहुंच के लिए बनाया जा रहा है। हाल ही में वहां हो रहे निर्माण कार्य की तस्वीरें जारी हुई हैं, जो इस बात की तस्दीक करती हैं।

सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन द्वारा बनाए जा रहे इस ‘जी 1112 जियान-शुंगालियाओ एक्सप्रेसवे’ का मुख्य मकसद युद्ध टैंकों और सैनिकों को उत्तर कोरिया ले जाना है। ब्रिटिश वेबसाइट डेली स्टार.को.यूके के मुताबिक यह विशालतम एक्सप्रेसवे चीन के जिलिन प्रांत से जियान तक बनाई जा रही है। इस सीमावर्ती शहर की कुल आबादी 2 लाख 30 हजार ही है जो चीनी मानकों पर बहुत कम है। बता दें कि राजधानी बीजिंग में 24 मिलियन और शांघाई में 34 मिलियन लोग रहते हैं। इसलिए यह तर्कसंगत नहीं जान पड़ता कि लोगों के इस्तेमाल के लिए एक्सप्रेसवे बन रहा है। जियान शहर यालू नदी के पार है, जो उत्तर कोरिया की सीमा से काफी सटा हुआ है।

वेबसाइट के मुताबिक इस नदी पर इसी साल के शुरुआत में एक नए पुल का उद्घाटन हुआ है। इसके अलावा चीन बड़ी मात्रा में उत्तर कोरिया की सीमा के पास बिल्डिंग और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास में निवेश कर रहा है। चीन के इस कदम से अब दुनियाभर में लोग इस बात की चर्चा करने लगे हैं कि कोरियाई प्रायद्वीप थर्ड वर्ल्ड वार की भूमि के रूप में तब्दील होता जा रहा है। पिछले हफ्ते ही सुरक्षा मामलों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि अमेरिका और चीन उत्तर कोरिया के मसले पर भिड़ सकते हैं।

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