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एनएसजी में भारत की सदस्यता पर चीन बोला- हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं, 11 नंवबर को विएना में मीटिंग

चीन पहले से कहता रहा है कि भारत की एनएसजी सदस्यता पर विचार तभी संभव है जब परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर साइन न करने वाले देशों को शामिल करने के लिए कोई नियम नहीं तय कर दिए जाएं।

Author बीजिंग | Published on: November 7, 2016 7:34 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फाइल फोटो)

शुक्रवार को विएना में होने जा रही है न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) की मीटिंग से पहले सोमवार को चीन ने अपना रुख स्पष्ट किया है। चीन की ओर से कहा गया है कि भारत की एनएसजी में सदस्यता को लेकर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है। चीन पहले से कहता रहा है कि भारत की एनएसजी सदस्यता पर विचार तभी संभव है जब परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर साइन न करने वाले देशों को शामिल करने के लिए कोई नियम नहीं तय कर दिए जाएं। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि इस शुक्रवार को विएना में एनएसजी का पूर्ण अधिवेशन होने जा रहा है और आज की तारीख में चीन की भारत को लेकर स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। बता दे कि चीन के विरोध के कारण की एनएसजी में भारत की एंट्री नहीं हो सकी थी।

जून में हुई एनएसजी की बैठक में चीन के नेतृत्व वाले कुछ देशों के समूह ने भारत की एंट्री का विरोध किया था। जिसके बाद उस समय भारत की एंट्री नहीं हो सकी थी। लू ने पिछले शुक्रवार को भारत और चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच हुई मीटिंग को लेकर कहा कि इस मुद्दे पर चीन, भारत समेत सभी पक्षों से निकट संपर्क में है तथा सकारात्मक बातचीत और कॉर्डिनेशन जारी है। चीन कई बार कह चुका है कि पहले उन देशों को लेकर समाधान ढूंढने की जरुरत है जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और उसके बाद भारत के आवेदन पर चर्चा होगी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने आज कहा था कि चीन की स्थिति “बहुत स्पष्ट तथा यथावत है।

वीडियो: चीन NSG पर भारत का समर्थन करने के लिए तैयार लेकिन मसूद अज़हर को बैन करने के खिलाफ

चीन एनएसजी की सदस्यता को लेकर पाकिस्तान से बात करता रहा है। गौरतलब है कि सियोल में एनएसजी देशों की बैठक में चीन ने भारत को सदस्यता दिए जाने पर कड़ा एतराज जताया था जबकि अमेरिका ने भारत को इसकी सदस्यता दिए जाने की वकालत की थी। चीन ने कहा था भारत के आवेदन को पाकिस्तान के आवेदन से अलग नहीं है, क्योंकि दोनों देशों एनएसजी की मेंबरशिप चाहते हैं लेकिन उन्होंने एनपीटी पर साइन नहीं किए हैं।

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