गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स पर चीन का बहाना क्यों

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच चल रहे सैन्य तनाव को कम करने के प्रयासों को झटका लगा है।

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लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विनोद भाटिया,जनरल (सेवानिवृत्त) वेद प्रकाश मलिक, पूर्व सेना प्रमुख! फाइल फोटो।

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच चल रहे सैन्य तनाव को कम करने के प्रयासों को झटका लगा है। सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता में पीछे हटने को लेकर बनी सहमति के बावजूद चीन ने पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देपसांग के संघर्ष वाले क्षेत्रों में सैनिकों के पीछे हटाने से इंकार कर दिया है।

साथ ही, चीन ने यह भी कहा है कि भारत को जो कुछ हासिल हुआ है, उसे उससे खुश होना चाहिए। भारत ने इस पर संयत रवैया अख्तियार करते हुए बातचीत के जरिए मसले का हल निकालने का प्रयास जारी रखा है। दरअसल, इन तीनों क्षेत्रों के सामरिक महत्त्व के कारण चीन बातचीत को उलझा रहा है। इलाके में गश्त के मामले में भारतीय जवान भारी पड़ रहे हैं। पहाड़ियों पर काबिज जवान चीनी गतिविधियों पर आसानी से नजर रख रहे हैं। अलबत्ता, उन क्षेत्रों में सैन्य तनाव के पूरी तरह खात्मे के लिए जरूरी माना जा रहा है कि चीनी सहमति वाले बिंदुओं पर अमल करें।

वार्ताओं में क्या बनी सहमति

सैन्य कमांडर स्तरीय और राजनयिक स्तरीय- दोनों तरह की वार्ताओं में चीन ने पहले हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा के गश्ती बिंदु 15 और 17ए से अपनी सेना को पीछे हटाने पर सहमति जताई थी। 10 दौर की वार्ताओं में सहमति बन गई थी। लेकिन बाद में उसने इससे इनकार कर दिया। चीनी सेना ने भारतीय सेना के स्थानीय कमांडरों पर दबाव डालना शुरू किया है कि वे तीनों क्षेत्रों में उसकी नई स्थिति को स्वीकार करे।

भारतीय सेना के एक आला अधिकारी ने बताया, ‘गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स में चीन के करीब 60 सैनिक अप्रैल 2020 की स्थिति से आगे मौजूद हैं।’ 20 फरवरी को सैन्य स्तर की वार्ता हुई थी। तब भी भारत ने देपसांग, हॉटस्प्रिंग्स और गोगरा समेत अन्य लंबित मुद्दों के समाधान पर जोर दिया था। उसके बाद सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा था कि पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र से सैनिकों के पीछे हटने से भारत के लिए खतरा केवल कम हुआ है, खत्म नहीं। तब देशों की सहमति के बाद पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त सहित सैन्य गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी।

क्यों खास हैं इलाके

ये इलाके भारत और चीन- दोनों के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। चीनी सेना गोगरा, हॉट स्प्रिंग और कोंगका ला इलाके में तैनात अपने सैनिकों के लिए रसद पहुंचा पाती है। दसवें दौर की वार्ता 20 फरवरी को हुई थी। दोनों देशों की सेनाएं पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से अपने-अपने सैनिक और हथियारों को पीछे हटाने पर राजी हुईं थीं। हालांकि, अब चीन आनाकानी कर रहा है।

भारत पर दबाव बनाने के लिए चीनी सेना ने तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र में भर्ती अभियान शुरू किया है। भर्ती किए गए ज्यादातर तिब्बती युवा पहले से ही पीएलए के शिविरों में थे। इन युवाओं से चीन विशेष तिब्बती सेना इकाई तैयार करना चाहता है। चीन तिब्बती युवाओं को इसलिए भर्ती कर रहा है, क्योंकि ऊंचाई वाले इलाकों में उसके सैनिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ा है। भारत ने पहले से ही तिब्बती युवाओं की अपनी एक विशेष वाहिनी बना रखी है। इस वाहिनी ने चीनी सैन्य अतिक्रमण के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।

देपसांग में भी अड़ा है चीन

देसपांग के मैदानों के बिल्कुल उत्तरी इलाके में स्थित बॉटलनेक पर चीनी सैनिक भारतीय सैनिकों को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। इस कारण भारतीय सैन्य टुकड़ियां गश्ती बिंदु 10, 11, 11ए, 12 और 13 तक नहीं जा पा रही हैं, जहां वो परंपरागत तौर पर पहरेदारी करती रही थीं। देसपांग मैदान काराकोरम दर्रे के पास स्थित दौलत बेग ओल्डी के करीब हैं, जहां भारत ने अपना रणनीतिक आधार शिविर बना रखा है।

दरअसल, सैन्य एवं राजनयिक स्तर की बातचीत के बाद भारत और चीन दोनों पक्षों ने इस वर्ष फरवरी में पैंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से सैनिकों एवं हथियारों को पीछे हटा लिया था। 10 फरवरी को चीन ने एक घोषणा की थी कि नई दिल्ली और बेजिंग पैंगोंग त्सो झील में अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर सहमत हो गए हैं। दोनों देशों के बीच बने समझौते के अनुसार, चीनी सैनिक वापस फिंगर आठ के पास खिसक गए और भारतीय सैनिकों की तैनाती झील के उत्तरी तट के फिंगर दो और तीन के बीच धन सिंह थापा पोस्ट तक हो गई।

क्या कहते
हैं जानकार

गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स के इलाकों से भी चीन को अपने सैनिक हटाने ही होंगे। इस इलाके में ज्यादा टिक पाना उनके लिए मुमकिन नहीं है। लेकिन यह जरूर है कि जब तक पीएलए के सैनिक गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स में रहेंगे, तब तक तनाव रहेगा।
जनरल (सेवानिवृत्त) वेद प्रकाश मलिक,
पूर्व सेना प्रमुख

कूटनीतिक स्तर पर ही समाधान होगा। सेना लंबे समय तक अपने इलाकों को घुसपैठियों से खाली कराने, उन्हें रोके रखने के लिए वहां मौजूद है। लेकिन आज पहले जैसी स्थिति नहीं है जब दोनों ओर के सैनिक अपनी बंदूकों के ट्रिगर पर उंगली रखकर बैठे थे।
– लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विनोद भाटिया, पूर्व सैन्य संचालन महानिदेशक

क्या हैं जमीनी हालात

हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा पोस्ट के इलाकों में चीन तथा भारतीय सैन्य टुकड़ियां एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। ये स्थिति मई 2020 से ही कायम है। इन इलाकों से सैन्य टुकड़ियों की वापसी पिछले साल जुलाई में शुरू हुई थी, लेकिन यह काम अधूरा रह गया था। जुलाई के पहले सप्ताह में चीनी सेना के वाहनों की वापसी गलवान, हॉटस्प्रिंग्स और गोगरा में देखी गई थी।

ये गतिविधियां 30 जून को चुशुल में दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच हुई सहमति के अनुसार हुईं, लेकिन फिर इन पर रोक लग गई। अब हॉटस्प्रिंग्स-गोगरा-कोंगका झील इलाके में गश्ती बिंदु 15, 17 और 17ए पर भारत और चीन की सेनाएं एक-दूसरे के सामने खड़ी हैं। मौके पर तो भारत की तरफ से 50 से 60 सैनिक ही हैं, लेकिन थोड़ा हटकर भारी संख्या में सैन्य बल तैनात हैं। जबकि, चीन ने पूरी प्लाटून तैनात कर रखी है।

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