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चीन ने एनएसजी में भारत की दावेदारी का किया विरोध, कहा ‘एनपीटी’ पर हस्ताक्षर अनिवार्य

चीन ने कहा कि यदि कोई देश एनएसजी का सदस्य बनना चाहता है तो उसके लिए परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करना ‘अनिवार्य है’।

Author सोल | June 24, 2016 11:51 AM
गुरुवार (23 जून) को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात करते भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (PTI Photo/Twitter/File)

चीन ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह एनएसजी में भारत की सदस्यता का जोरदार ढंग से विरोध जारी रखा है और ऐसे में 48 सदस्य देशों वाले इस समूह में भारत का प्रवेश फिलहाल संभव नहीं दिखाई दे रहा है। समूह की दो दिवसीय समग्र बैठक शुक्रवार (24 जून) को समापन की ओर बढ़ गई। चीन के शस्त्र नियंत्रण विभाग के महानिदेशक वांग कुन ने संवाददाताओं को बताया कि एनपीटी पर हस्ताक्षर न करने वाले भारत जैसे देशों को एनएसजी की सदस्यता देने के मुद्दे पर कोई आम सहमति नहीं बनी।

उन्होंने कहा कि यदि कोई देश एनएसजी का सदस्य बनना चाहता है तो उसके लिए परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करना ‘अनिवार्य है’। यह नियम चीन ने नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने बनाया है। वान ने चेतावनी दी कि ‘यदि यहां या फिर एनपीटी के सवाल पर अपवादों को अनुमति दी जाती है तो अंतरराष्ट्रीय अप्रसार एकसाथ ढह जाएगा।’ जब उनसे बीजिंग द्वारा भारत की सदस्यता की राह में रोड़े अटकाने की खबरों के बारे में पूछा गया तो चीन के प्रमुख वार्ताकार ने कहा कि एनएसजी अब तक एजेंडे में एनपीटी पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों की भागीदारी से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सहमत नहीं हुआ है। इसलिए चीन द्वारा भारत की सदस्यता का समर्थन या विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता।

चीन की ओर से शुक्रवार (24 जून) को एकबार फिर भारत-विरोधी रुख अपनाए जाने से यह साफ हो गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गुरुवार (23 जून) को ताशकंद में उनसे की गई इन अपीलों को नहीं माना है कि बीजिंग को भारत की दावेदारी का समर्थन करना चाहिए। भारत की सदस्यता के लिए चीन का समर्थन मांगते हुए मोदी ने शी से अपील की थी कि वे सोल में चल रही बैठक में भारत के आवेदन का ‘निष्पक्ष और तथ्यपरक’ आकलन करें। दोनों नेताओं ने गुरुवार (23 जून) को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात की थी।

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