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सरकारी मीडिया की चिंता- चीन के लिए खतरे की घंटी बना चीनी कंपनियों का रुख, बेरोजगारी बढ़ने का खतरा

जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कॉपरेशन की ओर से साल 2014 में कराए गए सर्वे का हवाला देते हुए कहा गया कि चीन का भारत में प्रत्‍यक्ष निवेश छह गुना बढ़कर 870 मिलियन डॉलर हो गया है।
चीनी कंपनियों के भारत में प्रॉडक्‍शन प्‍लांट लगाने पर चीनी मीडिया ने चिंता जताई है।

चीनी की टेलीकॉम कंपनी ह्युवेई ने भारत में निर्माण शुरू कर दिया है। कंपनी के इस कदम से चीन का सरकारी मीडिया चिंतित है। उसने चेताया है कि चीन को नौकरियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है क्‍योंकि कंपनियां दूसरे देशों में निर्माण कर रही हैं। ग्‍लोबल टाइम्‍स अखबार ने 26 सितंबर के अंक में लिखा, ”निर्माण से जुड़े उद्योगों के भारत में जाने से पड़ने वाले असर से चीन को चिंतित होने की जरुरत है। चीनी निर्माताओं के भारत में असेंबली लाइन स्‍थापित करने की रूचि बढ़ रही है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक प्रतिस्‍पर्धा बढ़ सकती है।”

अखबार ने लिखा कि ह्युवेई उन कई कंपनियों में से एक है जिसने उभरते हुए मोबाइल मार्केट में निर्माण शुरू किया है। यदि मोबाइल निर्माण भारत की तरफ गया तो इससे नौकरियों में कमी होगी। उसके अनुसार, ”हाल के सालों में कई चीनी कंपनियां स्‍मार्टफोन बनाने लगी है। इस बात का सही तरीके से अनुमान लगाना मुश्किल है कि इन कंपनियों में कितने चीनी मजदूर काम करते हैं। लेकिन यह साफ है कि यदि स्‍मार्टफोन वेंडर चीन से भारत गए तो इन मजदूरों की नौ‍करियां जाने वाली है। स्‍पष्‍ट कहें तो चीन इसे झेल नहीं सकता। ऐसे समय में जब भारत उत्‍पादन का नया केंद्र बन रहा है तब चीन को प्रॉडक्‍शन में अपने कंपीटिशन का बनाए रखना होगा।”

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इसी अखबार में छपे एक अन्‍य आर्टिकल में कहा गया कि चीनी निवेश बढ़ रहा है। चीनी कंपनियों को निवेश से पहले भारतीय कंपनियों और उनके श्रम कानूनों को समझना चाहिए। भारत के तुलनात्‍मक स्‍थायी राजनीतिक माहौल, लगातार आर्थिक‍ विकास, बड़ी जनसंख्‍या और सस्‍ते श्रम के चलते कई अंतरराष्ट्रीय निवेशक आकर्षित हुए हैं। जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कॉपरेशन की ओर से साल 2014 में कराए गए सर्वे का हवाला देते हुए कहा गया कि चीन का भारत में प्रत्‍यक्ष निवेश छह गुना बढ़कर 870 मिलियन डॉलर हो गया है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार कई चीनी कंपनियां भारत पर निगाहें रखे हुए हैं। भारत में निवेश के राजनीतिक और आर्थिक जोखिम जानने की जरूरत है।

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