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चीन में मुसलमानों पर जुल्म: ‘जबरन खिला रहा सुअर और चीनी बोलने पर कर रहा मजबूर’

हालांकि, चीनी सरकार अक्सर मुस्लिमों के साथ होने वाले इस शोषण और अत्याचार के आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है। सफाई में कई बार कहा गया है कि ये 'वोकेश्नल एजुकेशन सेंटर' हैं, जहां पर लोगों को चरमपंथी/कट्टरपंथी विचारों से निजात दिलाने की कोशिश की जाती है।

China, Muslims, Re Educational Camps, Pork, Pig, Mandarin, Chinese, Torture, Former Detainee, Omir Bekali, China, International News, Hindi Newsतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

चीन में मुसलमानों पर जुल्म ढाया जा रहा है। ‘मानसिक शुद्धिकरण’ शिविरों में उन्हें जबरन सुअर खिलाया जाता है, जबकि चीनी भाषा (मैंडरिन) बोलने पर भी मजबूर किया जाता है। ये खुलासा हाल ही में वहां के पूर्व बंदी ओमिर बेकाली ने किया है। ‘डेली मेल’ ऑनलाइन पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिन्जियांग स्थित कारामे के शिविर में वह दो हफ्ते रहे थे, जहां बंदियों का ब्रेनवॉश (धार्मिक मान्यताओं को लेकर) किया जाता था। यही नहीं, शिविरों में बंदियों से चीन के राष्ट्रवादी गाने गाने और खुद की आलोचना करने के लिए कहा जाता था। बेकाली ने दर्द भरी आपबीती इसलिए भी साझा की है, क्योंकि वह चाहते हैं कि शिविरों में फंसे लोग आवाज उठाएं, ताकि और लोग वहां होने वाली जोर-जबरदस्ती का शिकार न बनें।

कजाखिस्तान मूल के बेकाली को यह सब साल भर झेलना पड़ा था, जिसके बाद वह तुर्की भाग गए थे। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विशेषज्ञों के हवाले से रिपोर्ट में आगे कहा गया कि पश्चिमी चीन में ऐसे शिविरों में तकरीबन 10 लाख लोग रहते हैं, जिनमें अधिकतर उइगर (देश में सबसे बड़ी संख्या में रहने वाले मुस्लिम अल्पसंख्यक) हैं।

हालांकि, चीनी सरकार अक्सर मुस्लिमों के साथ होने वाले इस शोषण और अत्याचार के आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है। सफाई में कई बार कहा गया है कि ये ‘वोकेश्नल एजुकेशन सेंटर’ हैं, जहां पर लोगों को चरमपंथी/कट्टरपंथी विचारों से निजात दिलाने की कोशिश की जाती है। चीन के उप-विदेश मंत्री ली युचेंग ने इन शिविरों को ‘कैंपस’ बताया था।

शिन्जियांग सरकार के चेयरमैन शोहरत जाकिर ने चीन की सालाना संसदीय बैठक के बाद पत्रकारों से कहा था, “हमारे शैक्षणिक और प्रशिक्षण केंद्र जरूरत के हिसाब से स्थापित किए गए हैं। जो भी यहां पर चीजें सीखने-समझने आता है, उसमें बड़े स्तर पर बदलाव आ जाता है।”

वहीं, बेकाली का कहना है कि ये कैंप शिक्षित करने के बजाय ट्रॉमा की स्थिति में इंसान को डाल सकते हैं। उनके अनुसार, “शिविरों में हर सुबह सभी को चीन का राष्ट्रगान गाना पड़ा है। मैंने वैसा कभी नहीं करना चाहा, पर रोज की आदत की वजह से मजबूरी बन गई।”

दरअसल, आतंकियों की मदद करने के आरोपों के चलते सात महीने जेल में गुजारने के बाद बेकाली को उस शिविर में भेजा गया था, जहां पर शुक्रवार को सुअर खिलाया जाता था। बता दें कि शुक्रवार (जुमा) का दिन मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है, जबकि इस्लामिक मान्यताओं में सुअर खाना हराम है।

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