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जेलों के हालात सुधारेगा चीन

चीन ने मौत की सजा पाने वाले उन कैदियों के अंगों की मदद से अंग प्रतिरोपण पर रोक लगा दी थी जिनको सजा दी जा चुकी है।

Author बेजिंग | Published on: September 13, 2016 5:54 AM
Sheila Dikshit, Sheila Dikshit son in law, Sheila Dikshit Daughter, Sheila Dikshit son in law News, Sheila Dikshit son in law latest Newsचित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

चीन ने मानवाधिकारों के हनन को लेकर वैश्विक स्तर पर हो रही अपनी आलोचना के बीच अधिकारों की रक्षा संबंधी कानूनों में सुधार करने की घोषणा की। इसके साथ-साथ जेलों और हिरासत गृहों के हालात में सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों को भी रेखांकित किया।  चीन में मानवाधिकारों की न्यायिक रक्षा में नई प्रगति शीर्षक वाले जारी एक आधिकारिक श्वेतपत्र में कहा गया है कि चीनी न्यायिक अधिकारियों ने मानवाधिकारों की कानूनी गारंटी प्रक्रिया में और सुधार के लिए कई क्षेत्रों में बदलाव की वकालत की है। केंद्रीय कैबिनेट की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि चीन ने मामला दर्ज करने की समीक्षा प्रणाली को पंजीकरण प्रणाली में बदलकर मामला दायर करने की प्रक्रिया में सुधार किए हैं।

श्वेत पत्र में कहा गया है कि चीन ने आपराधिक प्रक्रिया कानून में संशोधन किया है। गैरकानूनी सबूतों के निष्कासन, आरोपी को संदेह का लाभ देने में वैधता के सिद्धांतों को लागू किया है। इसमें कहा गया है कि देश ने विवादों के प्रभावशाली निपटारे के लिए दीवानी प्रक्रिया कानून में संशोधन किया है। प्रशासनिक मुकदमों में निजी पक्षों के हितों और वैध अधिकारों की रक्षा को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया कानून में संशोधन किया गया है। चीन ने घरेलू हिंसा के पीड़ितों के निजी अधिकारों की कानूनी रक्षा को मजबूत करने के लिए पहला घरेलू हिंसा विरोधी कानून बनाया है। हिरासतगाहों और जन सुरक्षा संस्थाओं के पूछताछ कक्षों में आॅडियो व वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा होगी ताकि कानून प्रवर्तन अधिकारियों के प्रताड़ित कर इकबालिया बयान लेने और अवैध माध्यमों से सबूत प्राप्त करने जैसे गलत आचरण को रोका जा सके। श्वेतपत्र में कहा गया है कि देश पर्यवेक्षी गतिविधियों और सजा की तामील संबंधी जांच बढ़ाएगा, वह सजा कम करने, पैरोल और जेल के बाहर सजा की तामील का मानकीकरण करेगा।

श्वेत पत्र के मुताबिक, देश यह नियम बनाएगा कि आपराधिक मामलों में बचाव पक्षों और अपीलकर्ताओं को हिरासतगाह के नाम वाले कपड़े पहनने की कोई जरूरत नहीं हो ताकि हिरासत में बंद लोगों की निजी गरिमा, सुरक्षा, कानूनी संपदा और बचाव करने, अपील करने, शिकायत करने, कानून के उल्लंघन की शिकायत करने समेत कानूनी अधिकारों की रक्षा की जा सके। इसमें कहा गया है कि चीन के 2,169 हिरासत गृहों में साल 2015 में मनोवैज्ञानिक परामर्श कक्ष बनाए गए। सरकारी संवाद समिति शिंहुआ के मुताबिक, जेलों और हिरासत गृहों में चिकित्सकीय सेवाओं व जीवन प्रबंधन का मानकीकरण किया जाएगा ताकि हिरासत में बंद लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा की जा सके। अधिकारियों ने कहा कि चीनी जेल प्रणाली में पिछले कुछ सालों से सुधार हुआ है। चीन ने मौत की सजा पाने वाले उन कैदियों के अंगों की मदद से अंग प्रतिरोपण पर रोक लगा दी थी जिनको सजा दी जा चुकी है। अंगों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मौत की सजा की दर बढ़ाने को लेकर हो रही आलोचना के बीच यह प्रतिबंध लगाया गया था।

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