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ओबामा-मोदी की मुलाकातों पर भड़का ड्रैगन, 73 सालों से किसी चीनी नेता को नहीं मिला US कांग्रेस को संबोधित करने का मौका

1943 के बाद से अब तक किसी भी चीनी नेता को यूएस कांग्रेस के संयुक्‍त संत्र को संबोधित करने के लिए नहीं बुलाया गया है।

Author नई दिल्‍ली | June 9, 2016 1:04 PM
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को अमेरिकी संसद के संयुक्‍त सत्र को संबोधित किया। (Source: Reuters)

अमेरिका और भारत की करीबी पर चीन भड़क गया है। चीन के सरकारी मीडिया में छपी खबरों के अनुसार, मोदी और आेबामा की मुलाकातों से चीन चिंतित है। उसने कहा है कि चीन को भला-बुरा कहकर भारत अपना सपना सच नहीं कर सकता है।

चीन मोदी के यूएस कांग्रेस को संबाेधित करने से भी खफा है। 1943 के बाद से अब तक किसी भी चीनी नेता को यूएस कांग्रेस के संयुक्‍त संत्र को संबोधित करने के लिए नहीं बुलाया गया है। 18 फरवरी, 1943 को चीन की तत्‍कालीन प्रथम महिला सूंग-मे-लिंग ने संबोधित किया था।

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चीन के सरकारी अखबार ‘ग्‍लोबल टाइम्‍स’ ने बुधवार को लिखा कि भारत एक पक्ष को दूसरे के खिलाफ खड़ा करके नहीं उभर सकता। रिपोर्ट में लिखा है, “दो साल में अमेरिका की चार यात्राएं और राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ सात बैठकें- भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत और अमेरिका के संबंधों को अभूतपूर्व स्तर पर ले गए हैं। किसी एक पक्ष का समर्थन करना या किसी दूसरे पक्ष के खिलाफ खेमेबंदी करने से भारत का उदय नहीं होगा।”

अखबार ने आगे लिखा है, “चीन के साथ कई मुद्दों पर कॉम्‍प्‍टीशन के बावजूद भारत यह समझता है कि उसका बड़ा सपना चीन को भला-बुरा कहकर या उसे रोककर हकीकत में नहीं बदल सकता। इसकी जगह, उन्हें अपने हित के लिए सहयोग को विस्तार देना चाहिए, संभावनाओं को तलाशना चाहिए और आपसी विश्वास कायम करना चाहिए। चीन भारत के लिए एक प्रतिद्वंद्वी से ज्यादा सहयोगी है। यह चीन के प्रति भारत की मौलिक समझ बनाएगा।”

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